राहुल गांधी ने X पर वीडियो में बताया कि संसद में उन्होंने ट्रेड डील पर ‘जिउ-जित्सु’ का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि खेल में ‘ग्रिप और चोक’ से विरोधी को नियंत्रित किया जाता है—और राजनीति में भी ऐसे “छिपे दबाव” होते हैं। उन्होंने किसानों, ऊर्जा सुरक्षा, $100 बिलियन आयात और “डेटा कॉलोनी” को लेकर PM मोदी से सवाल किए।
बजट सत्र में राहुल का MMA तंज: “छिपे हुए ग्रिप्स-चोक”, अमेरिका को खुश करने का आरोप—अब खुद दी सफाई
राहुल गांधी ने संसद में ‘जिउ-जित्सु’ वाला तंज क्यों किया? अब खुद बताया कारण
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान संसद में दिए अपने भाषण में जिस “जिउ-जित्सु” (Jiu-Jitsu) वाले उदाहरण का इस्तेमाल किया था, उस पर काफी चर्चा हुई। अब राहुल ने X पर एक वीडियो शेयर करके बताया है कि उन्होंने “ग्रिप और चोक” (grips and a choke) की बात क्यों कही। राहुल का कहना है कि जिउ-जित्सु में विरोधी को कंट्रोल करने के लिए ग्रिप और चोक का इस्तेमाल होता है, लेकिन राजनीति में भी इसी तरह के “दबाव” होते हैं—बस वे अक्सर छिपे रहते हैं।
राहुल ने कहा कि उनके अनुभव में राजनीति के “ग्रिप्स और चोक” ज़्यादातर लोगों को दिखते नहीं हैं, लेकिन वही असली तरीके से किसी नेता की स्थिति और फैसलों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने दावा किया कि यही बात उन्होंने अपने भाषण में बहुत “पावरफुल” तरीके से बताने की कोशिश की—और यही वजह थी कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर यह तुलना की।
ट्रेड डील पर राहुल के तीखे सवाल: किसान, तेल और डेटा तक
वीडियो/पोस्ट में राहुल गांधी ने जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा फोकस किया, वह एक “ट्रेड डील/एग्रीमेंट” है। उन्होंने सीधे-सीधे कई सवाल उठाए और आरोप का संकेत दिया कि यह समझौता भारत के हितों के मुकाबले अमेरिका के हितों के पक्ष में झुक सकता है।
राहुल ने सबसे पहले किसानों को लेकर सवाल किया—“हमारे किसानों को अमेरिकियों को खुश करने के लिए क्यों कुर्बान किया गया?” उनका तर्क यह है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों को ज्यादा मार्केट एक्सेस मिलता है, तो भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके बाद उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया—“भारत की एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता क्यों किया गया, US को हमारे ऑयल सप्लाई को डिक्टेट करने की अनुमति देकर?” राहुल के मुताबिक, लंबे समय की स्थिरता के लिए ऊर्जा स्रोतों पर रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) जरूरी है।
$100 बिलियन आयात और “डेटा कॉलोनी” वाला आरोप
राहुल गांधी ने एक और बड़ा सवाल उठाया—“$100 बिलियन प्रति वर्ष अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी, बिना किसी रेसिप्रोकल वादे के?” राहुल के अनुसार, ऐसा कदम व्यापार असंतुलन बढ़ा सकता है और डील “डिसप्रोपोर्शनली” अमेरिका के पक्ष में दिख सकती है।
डिजिटल स्पेस पर राहुल ने दावा किया कि यह एग्रीमेंट भारत की डिजिटल संप्रभुता (digital sovereignty) को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा—“मैंने क्यों कहा कि यह डील भारत को ‘डेटा कॉलोनी’ बना सकती है?” यानी उनका डर यह है कि डेटा, प्लेटफॉर्म कंट्रोल और डिजिटल नियमों में भारत का नीति-नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।
“इतना देकर, इतना कम क्यों?”—मोदी पर सीधा सवाल
राहुल ने अपनी पोस्ट का अंत सीधे प्रधानमंत्री के फैसले पर सवाल उठाकर किया। उन्होंने पूछा—“मोदी जी ऐसी डील पर क्यों सहमत होंगे जिसमें भारत इतना ज्यादा देता है और बदले में बहुत कम मिलता हुआ दिखता है?” राहुल का इशारा साफ है कि वे इस पूरे समझौते को ‘देने’ और ‘पाने’ के बैलेंस से देख रहे हैं।
कुल मिलाकर राहुल की लाइन यह है कि सरकार पर बाहरी दबाव हो सकता है—और वही दबाव उन्होंने जिउ-जित्सु के “ग्रिप और चोक” रूपक से समझाने की कोशिश की।
BJP का पलटवार: “सेलेक्टिव रीडिंग, गलत प्रस्तुति” का आरोप
राहुल के भाषण के बाद BJP ने उन पर संसद को “मिसलीड” करने का आरोप लगाया था। BJP के नेशनल मीडिया हेड और प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा कि राहुल ने अमेरिकी सरकार के एक “पुराने वर्जन” के फैक्ट शीट के आधार पर बातें कहीं, और उनका आरोप था कि राहुल ने “selective reading” करके बजट/डॉक्यूमेंट को गलत तरीके से पेश किया।
बलूनी ने X पर कहा कि राहुल ने सिर्फ आलोचना नहीं की, बल्कि “misquoted, misread” करके उसी पर अपना तर्क खड़ा किया। BJP का कहना है कि लोकतांत्रिक बहस तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि चुनिंदा व्याख्या पर।
राहुल का मार्शल आर्ट बैकग्राउंड भी चर्चा में
रिपोर्ट में बताया गया है कि राहुल गांधी जिउ-जित्सु में प्रशिक्षित हैं और उनके पास “ब्लू बेल्ट” है। साथ ही वे आइकीडो (Aikido) भी प्रैक्टिस करते हैं और उन्हें 2013 में इस डिसिप्लिन में “ब्लैक बेल्ट” मिली थी। इसी वजह से उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया खेल वाला रूपक राजनीतिक बहस में तुरंत पकड़ में आ गया।
यह भी उल्लेख किया गया कि 11 फरवरी को बजट पर आलोचना की शुरुआत करते समय राहुल ने “मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स” (MMA) से जुड़ा एक उदाहरण देकर कहा था कि राजनीति में ताकत अक्सर खुले बल की बजाय “इनविज़िबल प्रेशर” से काम करती है।
ट्रेड डील बहस में आगे क्या?
राहुल के सवालों का सीधा असर यह है कि आने वाले दिनों में ट्रेड डील, कृषि बाजार, ऊर्जा स्रोतों और डिजिटल नियमों पर बहस और तेज होगी। विपक्ष इसी लाइन पर सरकार से विस्तृत जवाब मांग सकता है—खासकर “किसान”, “ऊर्जा सुरक्षा” और “डेटा संप्रभुता” जैसे मुद्दों पर, जो सीधे आम लोगों और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
सरकार की तरफ से भी संभावना है कि वे दस्तावेज, फैक्ट शीट और टर्म्स के हवाले देकर राहुल के आरोपों को “गलत पढ़ाई/गलत व्याख्या” बताकर जवाब दें। कुल मिलाकर यह मामला संसद के बाहर भी पब्लिक डिबेट में बना रहने वाला है।
FAQs (5)
- राहुल गांधी ने संसद में जिउ-जित्सु का उदाहरण क्यों दिया?
राहुल ने कहा कि जिउ-जित्सु में “ग्रिप” और “चोक” से विरोधी को नियंत्रित किया जाता है, और राजनीति में भी ऐसे “छिपे दबाव” होते हैं; उन्होंने इसी बात को पावरफुल तरीके से दिखाने के लिए यह रूपक इस्तेमाल किया। - राहुल ने ट्रेड डील पर किसानों को लेकर क्या सवाल उठाया?
उन्होंने पूछा कि “हमारे किसानों को अमेरिकियों को खुश करने के लिए क्यों कुर्बान किया गया?”, और संकेत दिया कि US कृषि उत्पादों को ज्यादा मार्केट एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। - राहुल ने ऊर्जा सुरक्षा पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने सवाल किया कि “US को हमारे ऑयल सप्लाई डिक्टेट करने की अनुमति” देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया, और रणनीतिक स्वायत्तता को जरूरी बताया। - “$100 बिलियन आयात” पर राहुल की आपत्ति क्या है?
राहुल ने पूछा कि US से $100 बिलियन प्रति वर्ष आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई “बिना किसी रेसिप्रोकल वादे” के, और इसे व्यापार असंतुलन बढ़ाने वाला बताया। - BJP ने राहुल के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP प्रवक्ता अनिल बलूनी ने आरोप लगाया कि राहुल ने एक पुराने फैक्ट शीट के आधार पर “selective reading” करके संसद को मिसलीड किया—misquoted और misread करके तर्क बनाया।
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