पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोहरा ने कहा कि इस्तीफा देने के बाद नेतृत्व ने उनके फैसले के कारणों पर चर्चा नहीं की, राहुल गांधी ने सिर्फ भावनात्मक बातें कीं। बोहरा ने दावा किया कि 2024 लोकसभा नतीजों के बाद गोगोई को अध्यक्ष बनाने की कोशिश शुरू हुई और बेहाली उपचुनाव टिकट उनकी जानकारी बिना घोषित हुआ।
“32 साल कांग्रेस में रहा, अब आत्मसम्मान टूट गया” – बोहरा ने BJP जाने के संकेत दिए, हिमंता से पुराने रिश्ते भी बताए
कांग्रेस छोड़ने पर भूपेन बोहरा का आरोप: “मेरी चिंताओं पर बात नहीं हुई, राहुल गांधी ने सिर्फ पुरानी यादें और इमोशनल बातें कीं”
असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोहरा ने पार्टी से दूरी बनाने के पीछे की अपनी बात खुलकर रखी है। बोहरा ने कहा कि जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया, उसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उनके फैसले के पीछे के कारणों या चिंताओं पर कोई सार्थक चर्चा नहीं की। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने उनसे बातचीत में मुख्य रूप से “इमोशनल बातें” कीं और पुराने दिनों को याद किया, लेकिन बोहरा की वास्तविक शिकायतों पर चर्चा नहीं हुई।
बोहरा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया कि राहुल गांधी ने उन्हें यह याद दिलाया कि उनके पिता के निधन के समय राहुल अस्पताल गए थे, मीटिंग्स की पुरानी बातें कीं और यह भी कहा कि बोहरा को 5 बार चुनाव टिकट मिले हैं। बोहरा का कहना है कि यह सब बातें भावनात्मक थीं, मगर उनके इस्तीफे के असली कारणों पर कोई बातचीत नहीं हुई।
“2024 के लोकसभा नतीजों के बाद सब बदल गया” – बोहरा का दावा
भूपेन बोहरा ने दावा किया कि जब वे पहली बार असम कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, तब उनका गौरव गोगोई के साथ “भाई जैसा” रिश्ता था। लेकिन बोहरा के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद अचानक सब कुछ बदल गया।
उन्होंने कहा कि उसी समय धुबरी से सांसद राकिबुल हुसैन ने विधायकों (MLAs) से सिग्नेचर जुटाने शुरू किए कि गौरव गोगोई को राज्य अध्यक्ष बनाया जाए, और उनके खिलाफ कई शिकायतें उठने लगीं। बोहरा ने इस पूरे बदलाव को संगठन के अंदर शुरू हुए सत्ता-संतुलन के खेल के रूप में पेश किया।
बेहाली उपचुनाव टिकट विवाद: “मेरी जानकारी के बिना दिल्ली से ऐलान”
बोहरा ने टिकट वितरण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2024 के बेहाली (Behali) उपचुनाव के लिए टिकट उनकी जानकारी के बिना तय कर दिया गया। बोहरा के मुताबिक, गौरव गोगोई, राकिबुल हुसैन और जितेंद्र सिंह ने मिलकर एक “लैंड ब्रोकर” को टिकट दे दिया और यह घोषणा दिल्ली से कर दी गई।
बोहरा का कहना है कि उन्हें खुद इसकी जानकारी अगले दिन सुबह TV और अखबार देखकर मिली कि बेहाली सीट का टिकट उस व्यक्ति को दे दिया गया है। उनके अनुसार, यह संगठनात्मक अनुशासन और राज्य नेतृत्व की भूमिका पर सीधा सवाल खड़ा करता है, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष होते हुए भी वे निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखे गए।
इस्तीफे के बाद हिमंता बिस्वा सरमा की मुलाकात: “पॉलिटिक्स में सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट”
बोहरा ने यह भी बताया कि इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा उनसे मिलने आए थे। बोहरा ने कहा कि वे और हिमंता कभी कांग्रेस में साथ रहे हैं और उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय साथ बिताया है—दोनों ने एक ही दिन कांग्रेस जॉइन की थी और एक ही दिन यूथ कांग्रेस में जनरल सेक्रेटरी भी बने थे।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से हिमंता के खिलाफ सबसे ज्यादा बोलने और हमले करने वालों में वे खुद रहे हैं। बोहरा ने दावा किया कि BJP शासन में उन्हें और उनके परिवार को परेशानियां भी झेलनी पड़ीं, यहां तक कि उन्हें हाईवे पर पीटे जाने की बात भी उन्होंने कही। लेकिन बोहरा के शब्दों में, राजनीति “survival of the fittest” है—यानी सत्ता और ताकत के हिसाब से टिके रहने की लड़ाई।
BJP में जाने का संकेत? बोहरा बोले—“ऑप्शन क्या बचता है?”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे BJP में शामिल होंगे, तो बोहरा ने कहा कि गौरव गोगोई ने अपनी राय स्पष्ट कर दी थी और मुख्यमंत्री चाहते थे कि वे उनकी पार्टी जॉइन करें। “ऐसी स्थिति में मेरे पास विकल्प क्या है?”—बोहरा ने यह सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि वे 32 साल “आइडियोलॉजी” के कारण कांग्रेस में रहे, लेकिन अब उनका “दिग्निटी” और “सेल्फ-रेस्पेक्ट” पूरी तरह टूट चुका है। बोहरा का कहना है कि अगर वे कुछ दिन और पार्टी में रहते, तो कांग्रेस ही उन्हें हटा देती। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि वे पार्टी बदलने को मजबूरी और आत्मसम्मान की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
असम कांग्रेस की राजनीति पर असर: नेतृत्व, टिकट और भरोसे का संकट
बोहरा के इंटरव्यू और आरोपों से असम कांग्रेस में नेतृत्व-युद्ध, टिकट वितरण और अंदरूनी भरोसे का संकट खुलकर सामने आता है। एक तरफ वे कहते हैं कि नेतृत्व ने उनकी समस्याएं नहीं सुनीं, दूसरी तरफ वे यह भी संकेत देते हैं कि पार्टी में निर्णय दिल्ली से हो रहे थे और राज्य नेतृत्व को हाशिये पर रखा जा रहा था।
आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, क्योंकि बोहरा के आरोप सीधे बड़े नेताओं और संगठनात्मक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि असम में विपक्षी राजनीति की दिशा काफी हद तक कांग्रेस के अंदरूनी एकजुटता और नेतृत्व संतुलन पर निर्भर करेगी।
FAQs (5)
- भूपेन बोहरा ने कांग्रेस छोड़ने पर क्या मुख्य आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि इस्तीफा देने के बाद पार्टी नेतृत्व ने उनकी चिंताओं और कारणों पर चर्चा नहीं की, राहुल गांधी ने सिर्फ भावनात्मक बातें और पुरानी यादें साझा कीं। - बोहरा के अनुसार 2024 के बाद क्या बदलाव आया?
बोहरा ने दावा किया कि 2024 लोकसभा नतीजों के बाद राकिबुल हुसैन ने MLAs के सिग्नेचर जुटाने शुरू किए कि गौरव गोगोई को राज्य अध्यक्ष बनाया जाए, और उनके खिलाफ शिकायतें बढ़ीं। - बेहाली उपचुनाव टिकट को लेकर बोहरा ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई, राकिबुल हुसैन और जितेंद्र सिंह ने एक लैंड ब्रोकर को बेहाली उपचुनाव का टिकट उनकी जानकारी बिना दे दिया, और उन्हें यह बात TV/अखबार से पता चली। - इस्तीफे के बाद हिमंता बिस्वा सरमा की मुलाकात पर बोहरा ने क्या बताया?
बोहरा ने कहा कि CM हिमंता उनसे मिलने आए, दोनों का कांग्रेस समय से पुराना रिश्ता है, और राजनीति में यह “survival of the fittest” जैसा है। - क्या बोहरा ने BJP जॉइन करने के संकेत दिए?
उन्होंने कहा कि CM चाहते थे कि वे BJP जॉइन करें और ऐसी स्थिति में “मेरे पास विकल्प क्या है?”, साथ ही दावा किया कि उनका आत्मसम्मान टूट गया है और पार्टी उन्हें हटा सकती थी।
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