इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में मुकेश अंबानी ने कहा कि “AI का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है” और इसे आधुनिक ‘अक्षय पात्र’ बताया। उन्होंने दावा किया कि भारत 21वीं सदी में दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में उभरेगा—क्योंकि देश के पास 1 अरब इंटरनेट यूज़र, 1.4 अरब आधार, 12B+ मासिक UPI ट्रांजैक्शन और 100K स्टार्टअप्स जैसी डिजिटल ताकत है।
अंबानी का बड़ा संदेश: AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, “नई सभ्यता की ताकत” है—भारत की डिजिटल ताकत से बनेगा AI पावरहाउस
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में मुकेश अंबानी का बड़ा बयान: “AI का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है”
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को “आधुनिक अक्षय पात्र” कहकर उसकी तुलना महाभारत की उस पौराणिक थाली से की, जो कभी खाली नहीं होती थी। अंबानी ने कहा कि AI भी उसी तरह विकास और संपत्ति सृजन के लिए अनंत संभावनाएं देता है और यह सिर्फ एक नई टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि ऐसे मानव-जैसे सिस्टम्स की शुरुआत है जो सीख सकते हैं, बोल सकते हैं, विश्लेषण कर सकते हैं और स्वायत्त रूप से उत्पादन कर सकते हैं।
अंबानी ने मंच से कहा कि हम अभी इस दौर की “सुबह” यानी शुरुआती चरण में हैं और “AI का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है।” उनके अनुसार, AI हर मशीन और सिस्टम को तेज, बेहतर और ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम करने की ताकत देता है।
AI को ‘अक्षय पात्र’ कहना: इसका मतलब क्या है?
अंबानी के भाषण का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही रूपक रहा—AI को आधुनिक ‘अक्षय पात्र’ बताना। उनका तर्क यह था कि जैसे अक्षय पात्र से कभी भोजन खत्म नहीं होता था, वैसे ही AI ज्ञान, दक्षता और उत्पादकता में “लिमिटलेस ऑग्मेंटेशन” यानी असीम बढ़ोतरी दे सकता है।
सरल भाषा में समझें तो उनका संदेश यह है कि AI को सिर्फ चैटबॉट या ऑटोमेशन तक सीमित न देखा जाए। यह हेल्थकेयर, एजुकेशन, इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर, गवर्नेंस और बिजनेस—हर जगह नई क्षमता जोड़ सकता है, और यही वजह है कि वे इसे “अनंत क्षमता” वाली तकनीक मानते हैं।
भारत को AI महाशक्ति बनाने की ‘बोल्ड प्रेडिक्शन’
अंबानी ने AI के भविष्य को लेकर एक “बोल्ड प्रेडिक्शन” किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्तियों में से एक बनकर उभरेगा। उनका दावा था कि यह भरोसा भारत की कुछ अनोखी ताकतों से आता है—डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डेवलपमेंट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा जनरेशन और “AI harvest” जैसी क्षमता।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दशकों में दुनिया का कोई देश भारत की इन ताकतों का कॉम्बिनेशन “मैच” नहीं कर पाएगा। यानी भारत के पास न सिर्फ बड़े पैमाने पर यूज़र और डेटा है, बल्कि डिजिटल सिस्टम्स भी तैयार हैं जो AI को तेजी से अपनाने में मदद कर सकते हैं।
अंबानी की 5 वजहें: भारत के पास AI बढ़ाने की मजबूत डिजिटल नींव
अंबानी ने भारत की डिजिटल क्षमता को कुछ ठोस आंकड़ों के साथ समझाया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा कंज्यूमर है, देश में करीब 1 अरब इंटरनेट यूज़र हैं और डेटा कॉस्ट दुनिया में सबसे कम में है। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा क्वालिटी में “दिल्ली और दूरदराज गांव” के बीच फर्क नहीं है।
उन्होंने भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को AI ग्रोथ की रीढ़ बताते हुए ये मुख्य पॉइंट्स गिनाए:
- करीब 1.4 अरब आधार डिजिटल IDs।
- UPI हर महीने 12 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है।
- भारत टॉप 3 स्टार्टअप इकोसिस्टम्स में है, लगभग 1,00,000 स्टार्टअप और 100+ यूनिकॉर्न्स।
- भारत का “सिक्योर और इनक्लूसिव” डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक अब दुनिया के कई देशों में अपनाया जा रहा है।
- जियो के 500 मिलियन (50 करोड़+) सब्सक्राइबर्स ने ब्रॉडबैंड, 4G, 5G और होम कनेक्टिविटी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई।
टेबल: अंबानी के मुताबिक भारत की AI-ताकत के प्रमुख स्तंभ
| अंबानी का पॉइंट | उन्होंने क्या कहा |
|---|---|
| इंटरनेट स्केल | लगभग 1 अरब इंटरनेट यूज़र, डेटा कॉस्ट बेहद कम |
| डिजिटल पहचान | आधार: 1.4 अरब डिजिटल IDs |
| डिजिटल पेमेंट | UPI: 12 अरब+ मासिक ट्रांजैक्शन्स |
| स्टार्टअप इकोसिस्टम | 1,00,000 स्टार्टअप, 100+ यूनिकॉर्न |
| कनेक्टिविटी | जियो: 500 मिलियन+ सब्सक्राइबर्स, 4G/5G व ब्रॉडबैंड विस्तार |
PM मोदी की भूमिका पर अंबानी का बयान
अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की और उन्हें इस समिट के लिए “guiding inspiration” यानी प्रेरक शक्ति बताया। उनके अनुसार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और DPI के विस्तार ने भारत को वह आधार दिया है जिसके दम पर AI का फायदा बड़े स्तर पर आम लोगों तक पहुंच सकता है।
यह लाइन राजनीतिक रूप से भी मायने रखती है, क्योंकि AI और डिजिटल पॉलिसी को लेकर सरकार और बड़े उद्योग समूहों की सोच का एक साझा फ्रेम सामने आता है—“इंडिया-स्केल” पर टेक्नोलॉजी अपनाने का।
इस भाषण का ‘सीधा मतलब’ आम लोगों और बिज़नेस के लिए क्या है?
अंबानी का संदेश एक तरह से तीन लेयर में पढ़ा जा सकता है। पहला, AI हर सेक्टर में प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा, इसलिए जो संगठन AI को जल्दी अपनाएंगे वे आगे निकलेंगे। दूसरा, भारत के पास डिजिटल सिस्टम और डेटा का स्केल है, इसलिए यहां “AI adoption” तेज हो सकता है। तीसरा, AI को डर की चीज़ नहीं, अवसर की तरह देखना चाहिए—क्योंकि “बेस्ट ऑफ AI” अभी आया नहीं है।
हालांकि, ऐसे दावों के साथ एक जरूरी बात यह भी है कि AI की शक्ति जितनी बढ़ेगी, डेटा सुरक्षा, प्राइवेसी, फेक कंटेंट, साइबर जोखिम और स्किलिंग जैसे मुद्दे भी उतने ही अहम होंगे। अंबानी ने अपने भाषण में मुख्य रूप से अवसर और क्षमता पर जोर दिया, इसलिए नीति स्तर पर इन जोखिमों के लिए गार्डरेल्स बनाना सरकार और इंडस्ट्री—दोनों की जिम्मेदारी रहेगी।
FAQs (5)
- मुकेश अंबानी ने AI को ‘आधुनिक अक्षय पात्र’ क्यों कहा?
उन्होंने कहा कि जैसे महाभारत का अक्षय पात्र अनंत भोजन देता था, वैसे ही AI ज्ञान, दक्षता और उत्पादकता में “लिमिटलेस ऑग्मेंटेशन” देकर विकास और धन सृजन की अनंत संभावनाएं खोलता है। - “Best of AI yet to come” से अंबानी का क्या मतलब है?
उनका कहना है कि AI का दौर अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए आने वाले वर्षों में AI की क्षमता और प्रभाव और भी ज्यादा बढ़ेगा। - अंबानी ने भारत को AI पावर बनाने की कौन-कौन सी वजहें बताईं?
उन्होंने 1 अरब इंटरनेट यूज़र, 1.4 अरब आधार IDs, 12 अरब+ मासिक UPI ट्रांजैक्शन्स, 1,00,000 स्टार्टअप और 100+ यूनिकॉर्न, तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक के वैश्विक अपनाने जैसी ताकतें गिनाईं। - अंबानी के मुताबिक UPI का स्केल कितना है?
उन्होंने कहा कि UPI हर महीने 12 अरब से अधिक लेनदेन प्रोसेस करता है। - जियो की भूमिका पर अंबानी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि जियो के 500 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स के जरिए ब्रॉडबैंड, 4G, 5G और होम कनेक्टिविटी के विस्तार में कंपनी को प्रमुख भूमिका निभाने का सौभाग्य मिला।
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