Baba Balak Nath Temple हिमाचल के शाहतलाई बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट ने 2026-27 के लिए 5.71 करोड़ का बजट पास किया। विकास पर 2.85 करोड़, चैत्र मेले पर 6.4 लाख – जानें पूरी डिटेल्स और भविष्य की योजनाएं।
बाबा बालक नाथ मंदिर शाहतलाई: हिमाचल का आध्यात्मिक रत्न
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में बसा शाहतलाई का बाबा बालक नाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यह सिद्धपीठ न सिर्फ भक्ति का प्रतीक है बल्कि पर्यटन का भी बड़ा आकर्षण। हाल ही में मंदिर ट्रस्ट ने 2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए 5.71 करोड़ रुपये का बजट पास किया है, जो विकास और सुविधाओं पर फोकस करता है। यह बजट श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहां विकास कार्यों के लिए 2.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
यह मंदिर गुरु दत्तात्रेय के शिष्य बाबा बालक नाथ की तपस्थली है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बाबा ने यहां 12 साल तक मां रत्नो की गायें चराईं और तपस्या की। हर साल चैत्र मास में होने वाला मेला इस वादे की याद दिलाता है। बजट पास करने वाली मीटिंग डिप्टी कमिश्नर राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई, जिन्होंने मॉडर्न कमांड सेंटर की स्थापना का निर्देश दिया।
बाबा बालक नाथ की पौराणिक कथा: श्रद्धा की अनोखी कहानी
बाबा बालक नाथ की कथा हृदयस्पर्शी है। किवदंती है कि मां रत्नो ने बाबा को अपना धर्म पुत्र बनाया और रोज रोटी-लस्सी दी। लेकिन बाबा ने कभी नहीं खाई, सब इकट्ठा कर दिया। जाते समय उन्होंने चिमटा पहाड़ी पर मारा तो लस्सी का कुंड बन गया, जिससे शाहतलाई नाम पड़ा। वट वृक्ष में छिपी रोटियां प्रकट हुईं। यह स्थान आज भी चरण गंगा के किनारे है, जहां गुरना पेड़ के नीचे बाबा तप करते थे।
शाहतलाई से करीब 40 किमी दूर हमीरपुर के डयोतसिद्ध में मुख्य गुफा मंदिर है, जहां बाबा का धुनी आज भी जलता है। मान्यता है कि बाबा अदृश्य रूप में मौजूद हैं। लाखों भक्त पैदल यात्रा कर दर्शन करते हैं। राजा भरथरी मंदिर और चरण पादुकाएं भी यहां की खासियत हैं। यह कथा आयुर्वेद और आध्यात्मिकता का मिश्रण दिखाती है, जहां प्रकृति पूजा प्रमुख है।
हिमाचल सरकार के पर्यटन विभाग के अनुसार, ऐसे सिद्धपीठ राज्य की धार्मिक अर्थव्यवस्था का आधार हैं। 2025 में चैत्र मेले में 70,000 से ज्यादा श्रद्धालु आए थे।
2026-27 बजट की मुख्य बातें: विकास का नया अध्याय
ट्रस्ट ने कुल 5.71 करोड़ का बजट मंजूर किया। इसमें विकास पर 2.85 करोड़ का सबसे बड़ा हिस्सा है। चैत्र मेला (13 मार्च से शुरू) के इंतजामों के लिए 6.4 लाख रुपये रखे गए। आर्थिक सहायता के लिए 7 लाख, सालाना मरम्मत पर 5.5 लाख और नॉन-प्लान हेड के तहत 25.66 लाख।
डिप्टी कमिश्नर ने नaina देवी मंदिर की तर्ज पर मॉडर्न कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने को कहा, जो भीड़ प्रबंधन और सिक्योरिटी बढ़ाएगा। चरण गंगा की सौंदर्यीकरण जल शक्ति विभाग को तेज करने के निर्देश। मंदिर का रिनोवेशन, लाइब्रेरी के लिए जमीन चयन और गौशाला के लिए 1 हेक्टेयर प्रस्ताव। सोलर लाइट्स लगेंगी और टीबी पेशेंट्स के लिए न्यूट्रीशन किट्स का प्लान।
यह बजट आधुनिकता और परंपरा का बैलेंस दिखाता है। हिमाचल में ऐसे ट्रस्ट राज्य की GDP में योगदान देते हैं, जहां धार्मिक पर्यटन से करोड़ों की कमाई होती है।
| बजट मद | राशि (रुपये में) | विवरण |
|---|---|---|
| विकास कार्य | 2.85 करोड़ | मंदिर रिनोवेशन, सेंटर, सौंदर्यीकरण |
| चैत्र मेला इंतजाम | 6.4 लाख | 13 मार्च से शुरू होने वाले मेले के लिए |
| आर्थिक सहायता | 7 लाख | श्रद्धालुओं को मदद |
| सालाना मरम्मत | 5.5 लाख | रखरखाव |
| नॉन-प्लान | 25.66 लाख | अन्य खर्चे |
| कुल | 5.71 करोड़ | 2026-27 वित्तीय वर्ष |
चैत्र मेला: भक्ति और उत्सव का संगम
चैत्र मेला शाहतलाई और डयोतसिद्ध दोनों जगह धूमधाम से मनाया जाता है। 13 मार्च से 13 अप्रैल तक चलता है। भक्त घी, अनाज, नकद चढ़ाते हैं। लंगर 24 घंटे चलते हैं। झंडा चढ़ाने से शुरू होता है। महिलाएं मंगल गीत गाती हैं।
पिछले साल 70,000 भक्त आए। रास्ते में चरण गंगा पर चौकी लगाई जाती है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां होती हैं। स्थानीय दुकानें मिठाई-खिलौनों से सजती हैं। बजट से मेले की व्यवस्था मजबूत होगी। हिमाचल पर्यटन के आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे मेलों से 2025 में 50 करोड़ का बिजनेस हुआ।
- मेले के प्रमुख आकर्षण:
विकास योजनाएं: श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएंगी
मॉडर्न सेंटर से CCTV, भीड़ मॉनिटरिंग होगी। सोलर लाइट्स से पर्यावरण संरक्षण। गौशाला से आयुर्वेदिक महत्व की गायें सुरक्षित। लाइब्रेरी से आध्यात्मिक किताबें उपलब्ध। टीबी किट्स से सामाजिक कार्य। एसडीएम अर्शिया शर्मा समय-समय पर रिव्यू करेंगी।
हिमाचल सरकार की ‘पर्यटन नीति 2025’ में ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर। इससे रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत। ICMR के अनुसार, धार्मिक स्थलों पर स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरी।
शाहतलाई पहुंचने का सफर: आसान और रोमांचक
बिलासपुर से 70 किमी दूर। बस-टैक्सी आसानी से। छोटी पहाड़ी पर है। डयोतसिद्ध हमीरपुर से 30 किमी। बेस्ट टाइम चैत्र। ठहरने के लिए धर्मशालाएं। खाने में स्थानीय हिमाचली व्यंजन जैसे सिद्धू, बकरी।
- यात्रा टिप्स:
- मौसम चेक करें, पहाड़ी रास्ता।
- घी चढ़ावा साथ लाएं।
- पैदल यात्रा के जूते।
- लंगर का आनंद लें।
आध्यात्मिक महत्व और आधुनिकता का मेल
बाबा बालक नाथ हिंदू देवता हैं, पंजाब-हिमाचल में पूजे जाते। विकिपीडिया के अनुसार, डयोतसिद्ध गुफा मुख्य। आयुर्वेद में बाबा की तपस्या से जुड़े औषधीय पौधे। बजट से पर्यटन बढ़ेगा, जो राज्य की 10% GDP है। WHO गाइडलाइंस के मुताबिक, ऐसे स्थलों पर साफ-सफाई जरूरी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था: मेले से होटल, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प को बूस्ट। 2026 में 1 लाख भक्त आने की उम्मीद।
ट्रस्ट की भूमिका: भक्ति और सेवा का केंद्र
ट्रस्ट श्रद्धालुओं की मदद करता है। डिप्टी कमिश्नर चेयरमैन। पारदर्शी बजट से विश्वास बढ़ा। भविष्य में और फंड्स की योजना। हिमाचल फाइनेंस डिपार्टमेंट के अनुसार, टेम्पल ट्रस्ट राज्य के मॉडल।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर फोकस
सोलर लाइट्स से कार्बन कम। चरण गंगा सफाई से जल संरक्षण। टीबी किट्स NIH मॉडल पर। आयुर्वेदिक गौशाला से गोमूत्र चिकित्सा।
भक्ति का नया दौर
यह बजट शाहतलाई को आधुनिक सिद्धपीठ बनाएगा। श्रद्धालु निश्चिंत दर्शन करेंगे। हिमाचल का गौरव बढ़ेगा।
5 FAQs
1. बाबा बालक नाथ मंदिर का 2026-27 बजट कितना है?
5.71 करोड़ रुपये, जिसमें विकास पर 2.85 करोड़ प्रमुख।
2. चैत्र मेला कब शुरू होता है?
13 मार्च से, शाहतलाई और डयोतसिद्ध दोनों जगह।
3. मंदिर में कौन सी नई योजनाएं आ रही हैं?
मॉडर्न कमांड सेंटर, सोलर लाइट्स, गौशाला, लाइब्रेरी।
4. बाबा बालक नाथ की कथा क्या है?
मां रत्नो की गायें चराईं, लस्सी कुंड miracle।
5. शाहतलाई कैसे पहुंचें?
बिलासपुर से 70 किमी, बस-टैक्सी द्वारा।
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