रांची । रांची विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) झारखंड के नेतृत्व में एक व्यापक महाआंदोलन आयोजित किया गया। इस आंदोलन में सैकड़ों छात्रों ने भाग लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याओं को मजबूती से रखा। छात्रों की प्रमुख मांगों में सत्र में हो रही देरी को समाप्त करना, परीक्षा एवं परिणाम प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच, उत्तर पुस्तिकाओं के गुम होने की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, पीएचडी प्रवेश परीक्षा का नियमित आयोजन, छात्रसंघ चुनाव यथाशीघ्र कराने की मांग तथा विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना शामिल है। आंदोलन के पश्चात विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2 दिनों का समय लेते हुए सभी समस्याओं को सुनकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।
इस अवसर पर एनएसयूआई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बिनय उरांव, उपाध्यक्ष अमन अहमद, उपाध्यक्ष नसीम हुसैन, महासचिव मुस्सर्रफ हुसैन, महासचिव सैफ अहमद, महासचिव पवन नाग, सचिव पवन साहू, रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष अधिवक्ता कैफ़ अली, रांची महानगर अध्यक्ष सतीश केशरी, लोहरदगा जिला अध्यक्ष मुन्नवर आलम, विश्वजीत सिंह, इलयास अंसारी, इमदाद अंसारी, रोहन तिर्की, शादमान ख़ान, अनस अहमद, अमन शहज़ाद, कुमार रोशन, मेराज ख़ान, निपुण पांडे, मुज़्ज़ामिल अंसारी (चांद), रितिक साहू, हर्ष केशरी, अबू राफ़े, अब्दुल्ला रहमान, शाद गौहर सूरज पटेल, अमृतांशु कुमार, सुदेश महतो, निश्चल सोय, असाद इकराम, प्रियांशु कुमार, हमज़ा ख़ान, असद अख़्तर, सादिक़ इमाम, आदित्य कुमार, चंदन कुमार सहित एनएसयूआई के अनेक कार्यकर्ता एवं रांची विश्वविद्यालय अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों से सैकड़ों छात्र उपस्थित रहे।
एनएसयूआई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बिनय उरांव ने कहा, “रांची विश्वविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाएं अब असहनीय हो चुकी हैं। छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। छात्रसंघ चुनाव नहीं कराना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। एनएसयूआई स्पष्ट रूप से यह चेतावनी देता है कि यदि 2 दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन राज्यव्यापी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।”
रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष अधिवक्ता कैफ़ अली ने कहा, “यह आंदोलन छात्रों के अधिकार, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए है। विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्य प्रणाली लागू करना अत्यंत आवश्यक है। छात्रसंघ चुनाव कराना छात्रों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का मूल आधार है, जिसे अब और टाला नहीं जा सकता। हमने प्रशासन को 2 दिनों का समय दिया है, यदि समाधान नहीं हुआ, तो छात्र समुदाय लोकतांत्रिक तरीके से और भी सशक्त आंदोलन करेगा।”
छात्रों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो एनएसयूआई सड़कों से सदन तक निर्णायक लड़ाई लड़ेगा।
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