वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया फ्लाइट के पायलट को टेकऑफ से पहले अल्कोहल के नशे में पकड़ा गया। कनाडा के ट्रांसपोर्ट रेगुलेटर ने इसे ‘गंभीर मामला’ बताते हुए एयर इंडिया से 26 जनवरी तक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। एयर इंडिया ने पायलट को उड़ान ड्यूटी से हटाकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला दिया, जबकि पहले हुए ड्रीमलाइनर क्रैश और DGCA चेतावनियों के बाद कंपनी की सेफ्टी संस्कृति पर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
ड्रीमलाइनर क्रैश के बाद नया विवाद: शराब के असर में पायलट पकड़ने पर एयर इंडिया की सेफ्टी पर फिर खतरे की घंटी
एयर इंडिया का नया विवाद: वैंकूवर–दिल्ली फ्लाइट पर अल्कोहल के नशे में पायलट पकड़ा गया
एयर इंडिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट (23 दिसंबर) में टेकऑफ से ठीक पहले वहां के अधिकारियों ने पायलट को अल्कोहल के प्रभाव में पाया और उसे फ्लाइट से हटा दिया। घटना कनाडा के वैंकूवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई और अब कनाडा के ट्रांसपोर्ट रेगुलेटर ने इसे “सीरियस मैटर” यानी गंभीर मामला बताते हुए एयर इंडिया से औपचारिक जांच रिपोर्ट मांगी है।
कनाडा की जांच और ‘सीरियस मैटर’ टैग
रिपोर्ट के मुताबिक, वैंकूवर एयरपोर्ट पर कनाडाई पुलिस ने पायलट का दो बार ब्रीथएनालाइज़र टेस्ट किया, जिसमें वह “अनफिट फॉर ड्यूटी” यानी उड़ान के लिए अयोग्य पाया गया। इसके बाद ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एयर इंडिया को पत्र लिखकर इस घटना को “serious matter” कहा और प्रवर्तन कार्रवाई (enforcement action) की चेतावनी भी दी।
ट्रांसपोर्ट कनाडा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह एयर इंडिया और भारत के एविएशन रेगुलेटर (DGCA) के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि उचित फॉलो-अप एक्शन सुनिश्चित किए जा सकें। कनाडा के नियम साफ कहते हैं कि कोई पायलट अल्कोहल पीने के 12 घंटे के भीतर विमान नहीं उड़ा सकता, और उल्लंघन पर जुर्माने से लेकर अन्य सख्त कार्रवाई हो सकती है।
एयर इंडिया की प्रतिक्रिया: ‘जीरो टॉलरेंस’ और वैकल्पिक पायलट
एयर इंडिया ने अपने बयान में माना कि 23 दिसंबर की वैंकूवर–दिल्ली फ्लाइट में “लास्ट-मिनट डिले” हुआ, क्योंकि एक पायलट से जुड़े इस घटना के चलते उसे फ्लाइट से हटाना पड़ा। कंपनी ने बताया कि तुरंत एक अल्टरनेट पायलट की व्यवस्था कर उड़ान संचालित की गई, ताकि यात्रियों की यात्रा पूरी हो सके।
एयर इंडिया ने कहा कि कनाडाई अथॉरिटीज ने पायलट की फिटनेस पर गंभीर चिंता जताई। कंपनी ने पायलट को जांच पूरी होने तक उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है और दावा किया कि वह किसी भी नियम उल्लंघन के मामले में “zero-tolerance policy” अपनाती है। एयर इंडिया के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर अगर उल्लंघन साबित हुआ तो कंपनी की नीति के मुताबिक सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
घटना की अहम डिटेल्स एक नजर में
– फ्लाइट रूट: वैंकूवर (कनाडा) से दिल्ली (भारत)
– तारीख: 23 दिसंबर (स्थानीय समय के अनुसार)
– एयरक्राफ्ट: बोइंग 777 (लगभग 344 यात्रियों की क्षमता)
– क्या हुआ: टेकऑफ से पहले पायलट का अल्कोहल टेस्ट, ‘अनफिट’ पाए जाने पर उसे फ्लाइट से हटाया गया।
– किसने जांच की: कनाडाई पुलिस द्वारा दो बार ब्रीथएनालाइज़र टेस्ट।
– आगे क्या: ट्रांसपोर्ट कनाडा ने 26 जनवरी तक एयर इंडिया से विस्तृत रिपोर्ट, जांच निष्कर्ष और भविष्य में रोकथाम के उपायों की जानकारी मांगी।
कनाडा के नियम बनाम भारत के DGCA नियम: शराब और पायलट
कनाडा के एविएशन नियमों के तहत:
– कोई पायलट अल्कोहल पीने के 12 घंटे के भीतर विमान नहीं उड़ा सकता।
– पॉजिटिव पाए जाने पर न्यायिक या प्रशासनिक कार्रवाई, जुर्माना, लाइसेंस पर असर हो सकता है।
भारत में DGCA के मौजूदा नियम:
– क्रू मेंबर उड़ान से पहले निर्धारित समय तक अल्कोहल से दूर रहें (ड्राई पीरियड)।
– भारत में हर फ्लाइट के बाद पहले पोर्ट ऑफ लैंडिंग पर पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ एनालाइज़र टेस्ट अनिवार्य है।
– बार-बार पॉजिटिव पाए जाने पर कड़ी सजा।
DGCA ने हाल में एक प्रस्ताव भी रखा है कि अगर कोई पायलट तीन बार अल्कोहल टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द (permanent loss of licence) किया जा सकता है। यह नियम अभी प्रस्ताव स्तर पर है, लेकिन यह दिखाता है कि रेगुलेटर इस मुद्दे को लेकर और सख्त होना चाहता है।
एयर इंडिया पर पहले से चल रही सेफ्टी स्क्रूटनी
यह घटना ऐसे समय आई है जब एयर इंडिया पहले से ही सेफ्टी के मोर्चे पर तीखी जांच और आलोचना झेल रही है। 12 जून को एयर इंडिया की एक बोइंग ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई। इस भीषण क्रैश के बाद भारत के एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयर इंडिया की सेफ्टी प्रैक्टिस, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, और क्रू ट्रेनिंग पर कई सवाल उठाए हैं।
DGCA ने हाल ही में एयर इंडिया के चार पायलटों को चेतावनी नोटिस भेजे, जिनमें “सीरियस सेफ्टी कंसर्न्स” का जिक्र किया गया। नोटिसों के अनुसार, इन पायलटों ने एक बोइंग 787 विमान को ऑपरेट करने के लिए स्वीकार कर लिया, जबकि उन्हें पहले से पता था कि उस विमान में बार-बार तकनीकी खराबियां (repeated snags) और सिस्टम डिग्रेडेशन मौजूद हैं। यह विमान लॉन्ग-हौल फ्लाइट्स में इस्तेमाल होता है।
सेफ्टी कल्चर पर बड़े सवाल
ड्रीमलाइनर क्रैश, बार-बार टेक्निकल स्नैग के बावजूद फ्लाइट स्वीकार करने वाले पायलट, और अब अल्कोहल के नशे में पकड़ा गया पायलट – इन सब घटनाओं ने एयर इंडिया की सेफ्टी कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्य चिंताएं:
– क्या इंटरनल मॉनिटरिंग और अल्कोहल टेस्टिंग सिस्टम पर्याप्त सख्त हैं?
– क्या पायलट और क्रू के बीच सेफ्टी लेकर “जीरो टॉलरेंस” संदेश सच में लागू हो रहा है या सिर्फ कागजों पर है?
– क्या कॉर्पोरेट प्रेशर (फ्लाइट ऑन टाइम, कॉस्ट कटिंग) के कारण सेफ्टी को कहीं दरकिनार तो नहीं किया जा रहा?
ऐसी घटनाएं न केवल कंपनी की ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि यात्रियों के भरोसे को भी हिला देती हैं, खासकर तब जब लॉन्ग-हौल इंटरनेशनल रूट पर 300–350 यात्रियों की जान दांव पर हो।
यात्रियों के लिए क्या मायने? सुरक्षा की नजर से देखें
- इमीजिएट रिस्पॉन्स पॉइंट
सकारात्मक यह है कि वैंकूवर एयरपोर्ट पर लोकल अथॉरिटी ने टेकऑफ से पहले ही पायलट को रोक लिया और वैकल्पिक पायलट की व्यवस्था की गई, यानी घटना दुर्घटना बनने से पहले रोक दी गई। - ट्रांसपेरेंसी और रिपोर्टिंग
ट्रांसपोर्ट कनाडा का औपचारिक पत्र और एयर इंडिया का पब्लिक स्टेटमेंट दिखाता है कि अब ऐसी घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। यात्रियों के लिए इसका मतलब है कि गलतियां छिपने के बजाय सामने आ रही हैं, जिससे सुधार की संभावना बढ़ती है। - स्ट्रॉन्गर रेगुलेशन
DGCA के नए प्रस्ताव, तीन बार पॉजिटिव पर स्थायी लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम, लंबे समय में एविएशन सेफ्टी को बेहतर बना सकते हैं। हालांकि, इनका सख्त और निष्पक्ष लागू होना जरूरी है।
एयर इंडिया और रेगुलेटर्स को क्या करना चाहिए?
– प्री-फ्लाइट अल्कोहल टेस्टिंग को हर अंतरराष्ट्रीय पोर्ट पर भी अनिवार्य और ऑडिटेबल बनाना।
– पायलटों के लिए नशा-मुक्ति, काउंसलिंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट प्रोग्राम्स को मजबूत करना, ताकि छिपे हुए अल्कोहल डिपेंडेंसी केस सामने आ सकें।
– सेफ्टी रिपोर्टिंग कल्चर: पायलट और क्रू को प्रोत्साहन कि वे किसी भी सेफ्टी रिस्क (जैसे साथी पायलट की संदिग्ध हालत) की गुमनाम रिपोर्ट कर सकें।
– इंडिपेंडेंट सेफ्टी ऑडिट: बोइंग 777 और 787 जैसे वाइड-बॉडी फ्लीट पर अलग से सेफ्टी ऑडिट और पायलट प्रोफाइलिंग।
5 FAQs
- वैंकूवर–दिल्ली फ्लाइट में क्या हुआ था?
वैंकूवर एयरपोर्ट पर 23 दिसंबर को एयर इंडिया की फ्लाइट के पायलट का दो बार अल्कोहल टेस्ट हुआ, जिसमें वह उड़ान के लिए अनफिट पाया गया और उसे फ्लाइट से हटा दिया गया। - इस घटना के बाद कनाडा ने क्या कदम उठाए?
कनाडा के ट्रांसपोर्ट रेगुलेटर ने इसे “serious matter” बताकर एयर इंडिया को पत्र लिखा और 26 जनवरी तक जांच रिपोर्ट और भविष्य की रोकथाम के उपायों का पूरा ब्योरा मांगा है। - एयर इंडिया ने पायलट के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
एयर इंडिया ने पायलट को फिलहाल उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद अगर नियम उल्लंघन साबित होता है तो कंपनी की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। - क्या इससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी?
घटना टेकऑफ से पहले पकड़ ली गई, इसलिए तत्काल दुर्घटना नहीं हुई, लेकिन अगर पायलट नशे की हालत में उड़ान भरता तो करीब 344 यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। - DGCA के शराब संबंधी प्रस्तावित नियम क्या हैं?
DGCA ने प्रस्ताव रखा है कि अगर कोई पायलट तीन बार अल्कोहल टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया तो उसका लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। वर्तमान नियमों में हर उड़ान के बाद भारत में पहले पोर्ट ऑफ लैंडिंग पर पोस्ट-फ्लाइट ब्रीथ एनालाइज़र टेस्ट अनिवार्य है।
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