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Air Pollution and Health:कैसे बचें खांसी, गले के दर्द और सांस की दिक्कत से

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Air pollution affecting throat and lungs.
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Air Pollution and Health से सूखी खांसी, गले में खराश और श्वसन संक्रमण बढ़ रहे हैं। जानें कारण, लक्षण और विशेषज्ञों के आसान उपाय—फेफड़ों और गले की सुरक्षा के लिए जरूरी टिप्स।

Air Pollution and Health-क्यों बढ़ती जा रही हैं खांसी और गले की समस्याएँ

आजकल शहरों की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों को सुबह उठते ही सूखी खांसी, गले में जलन, खराश, सांस फूलना और नाक बंद होने जैसी समस्याएँ महसूस होती हैं।
प्रदूषण के महीन कण—PM2.5, PM10—साथ ही धुआँ, धूल, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक गैसें, हमारी श्वसन नलियों और गले की परत को सीधे नुकसान पहुँचाती हैं।

इससे गले में सूजन, खांसी, बलगम, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ती हैं, खासकर सर्दियों के महीनों में।


प्रदूषण गले और फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुँचाता है

शहरों की हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और जहरीली गैसें हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाती हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि वे नाक से लेकर फेफड़ों की नाजुक झिल्ली तक पहुँचते हैं। इससे—

  • गले की परत में जलन
  • आवाज़ बैठना
  • सूखा खांसी
  • एलर्जिक प्रतिक्रिया
  • बलगम का जमाव
  • सांस लेने में कठिनाई

देखने को मिलती है।

प्रदूषण से होने वाली जलन खासकर उन लोगों में अधिक बढ़ती है जिनके शरीर का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है—जैसे छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से अस्थमा या श्वसन रोग वाले लोग।


सूखी खांसी: क्यों बढ़ती है प्रदूषण में

सूखी खांसी तब होती है जब फेफड़ों में हवा की नलियाँ सूजन या जलन के कारण संवेदनशील हो जाती हैं। यह खांसी बिना बलगम के होती है और अक्सर रात में बढ़ जाती है।

सूखी खांसी के कारण:

  • सूक्ष्म प्रदूषक कणों का हवा के साथ शरीर में प्रवेश
  • ठंडी और सूखी हवा से नमी कम होना
  • श्वसन मार्ग में जलन
  • एलर्जी उत्पन्न करने वाले कणों का बढ़ जाना

कुछ मामलों में यह खांसी कई दिनों या हफ्तों तक बनी रह सकती है।


गले की खराश और जलन: प्रदूषण की सामान्य प्रतिक्रिया

जब हवा में धूल, धुआँ या स्मॉग बढ़ जाता है, तो गले की श्लेष्मा झिल्ली सूखी और संवेदनशील हो जाती है। इससे—

  • गले में चुभन
  • खराश
  • बोलने में दर्द
  • निगलने में तकलीफ
  • गला बैठना

जैसे लक्षण हो सकते हैं।

गले की यह समस्या सिर्फ वायरल नहीं—बल्कि प्रदूषण से जुड़ी हुई प्रतिक्रिया भी हो सकती है।


सांस की दिक्कतें और फेफड़ों पर प्रदूषण का असर

प्रदूषण सिर्फ गले तक ही सीमित नहीं रहता। यह फेफड़ों को भी प्रभावित करता है, जिससे—

  • सांस फूलना
  • तेजी से सांस लेना
  • छाती में भारीपन
  • एलर्जिक अस्थमा के दौरे
  • पुराना ब्रोंकाइटिस

जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

कुछ लोगों में प्रदूषण लंबे समय तक रहने से श्वसन रोगों की शुरुआत भी कर सकता है।


विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण से बचाव कैसे करें

1. अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें
बाहर निकलते समय PM2.5 फ़िल्टर वाला मास्क पहनना जरूरी है। यह छोटे-छोटे कणों को शरीर में घुसने से काफी हद तक रोकता है।

2. दिन में जब प्रदूषण चरम पर हो, बाहर न निकलें
सुबह और शाम के समय प्रदूषण अधिक रहता है। यदि संभव हो, तो इन समयों में बाहर जाने से बचें।

3. घर का वातावरण शुद्ध रखें
• खिड़कियाँ वहीँ खोलें जब हवा साफ लग रही हो
• घर की नियमित सफाई करें
• धूल जमा होने न दें

4. पर्याप्त पानी पीते रहें
गले को हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है। गुनगुना पानी, हर्बल चाय, या भाप लेने से गले को आराम मिलता है।

5. नमक-पानी के गरारे
गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर गरारे करने से गले की जलन कम होती है।

6. धूम्रपान और तंबाकू से दूरी
धूम्रपान, तंबाकू और वेपिंग प्रदूषण के दुष्प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं। इससे बचें।

7. इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ खाएँ
फल, सब्जियाँ, विटामिन-C, गर्म सूप, हल्दी, अदरक, तुलसी—ये सभी श्वसन तंत्र को मजबूत करते हैं।


कौन लोग प्रदूषण से ज्यादा प्रभावित होते हैं

कुछ लोग प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, जैसे—

  • बच्चे
  • बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएँ
  • अस्थमा, एलर्जी या फेफड़ों की बीमारी वाले
  • कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति

इन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।


डॉक्टर के पास कब जाएँ

यदि नीचे दिए लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:

  • खांसी 10–15 दिन से ज्यादा हो
  • सांस फूलना
  • सीने में दर्द
  • बलगम में बदलाव
  • तेज बुखार
  • गले में तीव्र दर्द

सिरदर्द, थकान और आंखों की जलन भी प्रदूषण का संकेत हो सकते हैं

हम कई बार मान लेते हैं कि यह सिर्फ सामान्य थकान है, लेकिन प्रदूषण आंखों, दिमाग और शरीर को भी प्रभावित करता है। सिरदर्द, आंखों में जलन, चक्कर, थकान—ये सभी शुरुआती संकेत हो सकते हैं कि हवा में मौजूद कण आपकी सेहत पर असर डाल रहे हैं।


यह समस्या क्यों बढ़ रही है?

  • शहरों में बढ़ते वाहन
  • निर्माण कार्य
  • धूल और उद्योग
  • सर्दियों में धुंध और तापमान गिरना
  • वायु के स्थिर होने से प्रदूषक वहीँ जमा हो जाना

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