MEA ने बांग्लादेश को कड़ा संदेश दिया कि अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमलों को राजनीतिक या व्यक्तिगत झगड़ों का नाम देकर नजरअंदाज न करें। दिसंबर में 51 घटनाएं, 2900+ कुल मामले। तुरंत कार्रवाई करें।
2900+ घटनाओं पर भारत का गुस्सा: ढाका को MEA का अल्टीमेटम, अल्पसंख्यक हिंसा को बहाना न बनाएं!
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले: MEA का ढाका को सख्त चेतावनी
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेश को साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा को नजरअंदाज न करे। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों पर एक्सट्रीमिस्ट्स के हमले चिंताजनक हैं। इन्हें तुरंत और सख्ती से काबू किया जाए।
जायसवाल ने कहा, “हम लगातार देख रहे हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, उनके घरों और कारोबार पर एक्सट्रीमिस्ट्स के हमले हो रहे हैं। ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं को जल्द और मजबूती से निपटना चाहिए।” उन्होंने ढाका की उस आदत पर नाराजगी जताई जिसमें हमलों को निजी दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या अन्य बहानों से जोड़ा जाता है। “ऐसा नजरअंदाज करना अपराधियों को हौसला देता है और अल्पसंख्यकों में डर बढ़ाता है।”
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंसा का आंकड़ा
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार दिसंबर 2025 में ही 51 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें 10 हत्याएं, 10 चोरी-लूट, 23 घरों-मंदिरों-जमीनों पर कब्जा, लूटपाट-अग्नि हादसे शामिल हैं। चार मामलों में झूठे धार्मिक अपमान या ‘RAW एजेंट’ के आरोप पर गिरफ्तारी-तड़पाेह, एक बलात्कार प्रयास और तीन मारपीट की घटनाएं। जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में यह सिलसिला जारी रहा।
इंटरिम सरकार के कार्यकाल में स्वतंत्र स्रोतों ने 2900 से ज्यादा घटनाएं दर्ज कीं – हत्याएं, आगजनी, जमीन हड़पना आदि। दिसंबर 26 को भी MEA ने मायमेनसिंह में हिंदू युवक की बर्बर हत्या की निंदा की थी। कहा था कि ये घटनाएं मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर या राजनीतिक हिंसा कहकर टालने वाली नहीं।
13वीं संसदीय चुनाव से पहले क्यों तनाव?
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में 13वीं नेशनल पार्लियामेंट्री इलेक्शन हैं। इसके नजदीक आते ही सांप्रदायिक हिंसा तेज हो गई। पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे तारिक रहमान की वापसी के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया। MEA ने कहा कि स्थिरता जरूरी है क्योंकि दोनों देशों के व्यापार, आर्थिक, लोगों के रिश्ते और समुद्री हित जुड़े हैं।
विपक्षी दलों पर अल्पसंख्यक हिंसा भड़काने का आरोप लग रहा। हसीना सरकार के पतन के बाद अव्यवस्था बढ़ी। मुहम्मद यूनुस की इंटरिम सरकार पर 2900 घटनाओं को रोकने में नाकामी का इल्जाम। भारत ने साफ कहा – दोषियों को सजा दो, बहाने मत बनाओ।
MEA के पिछले बयान और भारत की चिंता
26 दिसंबर 2025 को जायसवाल ने कहा था, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार दुश्मनी गंभीर चिंता है। मायमेनसिंह हत्याकांड की निंदा। दोषी बेनकाब हों। 2900 घटनाएं ब्रश असाइड नहीं की जा सकतीं।” भारत ने झूठे नैरेटिव को खारिज किया।
भारत की चिंता सिर्फ मानवीय नहीं। बांग्लादेश सीमा पर 4096 किमी लंबी सरहद। अवैध घुसपैठ, रोहिंग्या संकट, आतंकवाद का खतरा। अल्पसंख्यक हिंसा से शरणार्थी बढ़ सकते हैं। भारत ने ढाका से संयम बरतने को कहा।
दिसंबर 2025 हिंसा के आंकड़े
कुल: 51 घटनाएं। ट्रेंड जनवरी में भी जारी।
अल्पसंख्यक संगठनों की अपील
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि हिंसा चुनावी माहौल से जुड़ी है। मंदिरों पर हमले, जमीनें हड़पना, हत्याएं – सब संगठित लगते हैं। भारत ने इसे नोटिस किया।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
दोनों देश पड़ोसी। व्यापार 14 बिलियन डॉलर से ऊपर। लेकिन अल्पसंख्यक हिंसा से तनाव। भारत ने पहले भी चटगांव हिल ट्रैक्ट्स, हिंदू मंदिर हमलों पर आवाज उठाई। अब इंटरिम सरकार से उम्मीद – कार्रवाई करें।
क्या होगा आगे?
MEA ने साफ कहा – हमले रोकें, दोषी सजा पाएं। ढाका अगर न माने तो डिप्लोमेटिक प्रेशर बढ़ेगा। भारत अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करेगा। क्षेत्रीय स्थिरता जरूरी।
बांग्लादेश को सबक लेना चाहिए। अल्पसंख्यक सुरक्षित तो रिश्ते मजबूत। वरना तनाव बढ़ेगा।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- MEA ने बांग्लादेश को क्या चेतावनी दी?
MEA के रंधीर जायसवाल ने कहा कि अल्पसंख्यकों पर हमलों को नजरअंदाज न करें। इन्हें तुरंत सख्ती से काबू करें। बहाने बनाना बंद। - दिसंबर 2025 में कितनी घटनाएं हुईं?
51 घटनाएं – 10 हत्याएं, 23 कब्जा-लूट, 10 चोरी आदि। जनवरी में सिलसिला जारी। - कुल कितने मामले इंटरिम सरकार में दर्ज?
2900 से ज्यादा – हत्याएं, आगजनी, जमीन हड़पना। स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि। - चुनाव से कैसे जुड़ा मामला?
13वीं संसदीय चुनाव फरवरी 2026 में। तनाव के साथ हिंसा तेज। राजनीतिक माहौल गरमाया। - भारत की क्या चिंता है?
अल्पसंख्यक सुरक्षा, सीमा स्थिरता, व्यापारिक रिश्ते। हमलों से शरणार्थी व तनाव बढ़ सकता।
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