झीरम घाटी नरसंहार के 19 सबसे वांछित नक्सलियों में से एक कबीर उर्फ सुरिंदर उर्फ सोड़ी सोमा ने मध्य प्रदेश के बालाघाट पुलिस के सामने सरेंडर किया। न्यूज़18 को दिए इंटरव्यू में उन्होंने हमले की योजना, महेंद्र कर्मा की हत्या पर “गर्व”, कोलेटरल डैमेज, सलवा जुडूम का बदला, हथियार नेटवर्क और नक्सल संगठन की कमजोरी का खुलासा किया।
30 साल नक्सल जिंदगी के बाद सरेंडर: कबीर ने बताया CPI-माओइस्ट का MMC जोन, हिड़मा के साथ ऑपरेशन
झीरम घाटी नरसंहार का कबीर: “महेंद्र कर्मा को मारने पर गर्व, लेकिन बाकी कोलेटरल डैमेज थे”
छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी नरसंहार (25 मई 2013) के 19 सबसे वांछित नक्सलियों में शामिल कबीर उर्फ सुरिंदर उर्फ सोड़ी सोमा ने 17 दिसंबर 2025 को मध्य प्रदेश के बालाघाट पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। न्यूज़18 को दिए विशेष इंटरव्यू में इस बस्तर मूल के कमांडर ने हमले की साजिश, हथियार नेटवर्क, फंडिंग, संगठन की कमजोरी और सरेंडर के पीछे की वजहें खोलीं।
झीरम घाटी हमला: साजिश और “गर्व-अफसोस” का कबूलनामा
कबीर ने बताया कि झीरम घाटी हमला “planned and calculated” था, लेकिन पुलिस की अंधाधुंध फायरिंग से बिगड़ गया। मूल टारगेट पुलिस कन्वॉय था। दो दिन पहले पक्का इंटेलिजेंस मिला कि कांग्रेस परिवर्तन यात्रा में महेंद्र कर्मा होंगे।
CPI-माओइस्ट की सेंट्रल कमेटी (CC) ने कर्मा को खत्म करने का आदेश दिया। पहले 12+ कोशिशें नाकाम रहीं। प्लान था कर्मा को किडनैप कर गांव वालों के सामने जन अदालत लगाकर फांसी देना। लेकिन हमले के दौरान कर्मा ने सरेंडर कर दिया, फिर भी उसे मार दिया गया।
कबीर ने कहा, “महेंद्र कर्मा को मारने पर मुझे गर्व है। लेकिन बाकी लोगों की मौत पर दुख है, वे कोलेटरल डैमेज बन गए।” कर्मा को “evil” बताया – सलवा जुडूम लाकर 700 गांव जलवाए, सैकड़ों मारे, महिलाओं पर अत्याचार। कर्मा पहले नक्सली आंदोलन से जुड़े थे, फिर राजनीति में चले गए।
हमले के बाद पार्टी में बहस हुई। जनता ने सराहना की, लेकिन कुछ नेताओं ने कहा कि इतना बड़ा नरसंहार नहीं होना चाहिए था।
कबीर का सफर: 14 साल की उम्र से 30 साल नक्सली जिंदगी
सुक्मा (बस्तर) के मूल निवासी सोड़ी सोमा 14 साल की उम्र में नक्सल आंदोलन में शामिल हुए। बस्तर कमांडर बने। 2024 में सेंट्रल कमेटी ने महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन का कमांडर बनाया। हिड़मा जैसे टॉप कमांडरों के साथ काम किया।
नक्सल संगठन पर कबीर के खुलासे
– कमजोरी: 2024-25 में सिक्योरिटी ऑपरेशंस से CC मेंबर्स मारे/भागे, कई सरेंडर। गोरिल्ला बेस कमजोर, हथियार जब्त।
– फंडिंग: पहले तेंदू पत्ता लेवी से, लेकिन 20 सालों में पैसा–हथियार का फ्लो सूखा।
– पैरलल एडमिन: गांवों में मीटिंग्स, जन अदालतें, जादू-टोना/शराबबंदी। लेकिन स्कूल–अस्पताल–सड़कें उड़ाना गलती मानते हैं।
सरेंडर की वजह: पत्नी की हत्या, बेटी का भविष्य
कबीर ने बताया कि 2023 में बालाघाट में उनकी लाइफ पार्टनर क्रांति की आंखों के सामने हत्या हो गई। बेटी (अब 14 साल, 10वीं में) को भाई के पास छोड़ा। “उसे पढ़ाना चाहता हूं। सरकार पर भरोसा कर सिस्टम में लौटना चाहता हूं।”
सलवा जुडूम और “नक्सल जन्म”: चेतावनी
कबीर ने चेतावनी दी, “कर्मा जैसे नेता नक्सल पैदा करते हैं।” संविधान पर भरोसा, लेकिन “जल-जंगल-जमीन” की समस्याएं बरकरार।
झीरम घाटी 2013: यादें ताजा
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के सुकमा में कांग्रेस परिवर्तन यात्रा पर नक्सली हमला। 29 लोग मारे गए – महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल (पूर्व CM), विद्या चरण शुक्ला सहित। 19 वांछितों में कबीर पहला सरेंडर करने वाला। ₹22 लाख इनाम।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 25 मई 2013 |
| जगह | झीरम घाटी, सुकमा |
| मौतें | 29 (कांग्रेस नेता+सुरक्षाकर्मी) |
| टारगेट | पुलिस कन्वॉय, कर्मा |
| सरेंडर | कबीर (पहला 19 में से) |
5 FAQs
- कबीर कौन है?
झीरम घाटी के 19 सबसे वांछित नक्सलियों में बस्तर कमांडर, MMC जोन हेड। 17 दिसंबर 2025 को बालाघाट सरेंडर। - झीरम हमले पर कबीर ने क्या कहा?
टारगेट पुलिस कन्वॉय था, कर्मा को जन अदालत में मारना था। CC का आदेश। कर्मा पर गर्व, बाकी कोलेटरल। - कर्मा को क्यों निशाना बनाया?
सलवा जुडूम से 700 गांव जलाए, अत्याचार। पहले नक्सली थे। - नक्सल संगठन क्यों कमजोर?
ऑपरेशंस से CC कमजोर, फंडिंग–हथियार सूखे। - सरेंडर क्यों?
पत्नी की हत्या, बेटी का भविष्य, सरकार पर भरोसा।
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