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‘ग़ज़नी–लोदी विदेशी नहीं थे’ विवाद: BJP का हमला, क्या इतिहास पर फिर शुरू हुई वैचारिक जंग?

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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के ‘ग़ज़नी और लोदी विदेशी नहीं, भारतीय लुटेरे थे’ बयान पर BJP भड़क गई। सोमनाथ ध्वंस, औरंगज़ेब, कांग्रेस ईकोसिस्टम और इतिहास की व्याख्या को लेकर नया राजनीतिक संग्राम छिड़ा। बयान का पूरा संदर्भ, BJP का हमला, कांग्रेस पर आरोप और इस बहस की राजनीतिक पृष्ठभूमि जानिए विस्तार से।

क्या महमूद ग़ज़नी को महिमामंडित कर रही है कांग्रेस ईकोसिस्टम? हामिद अंसारी के बयान से उठा नया तूफ़ान

हामिद अंसारी के ‘ग़ज़नी–लोदी भारतीय लुटेरे थे’ बयान पर BJP का हमला: इतिहास से राजनीति तक की पूरी कहानी

भारत की राजनीति में इतिहास कभी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहता। कौन आक्रांता था, कौन शासक था, कौन “विदेशी” था और कौन “अपना” – ये सवाल आज भी वोटबैंक, वैचारिक लड़ाई और टीवी डिबेट का ईंधन बने रहते हैं। ताज़ा विवाद इसी कड़ी की एक और कड़ी है, जिसमें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और पूरे “कांग्रेस ईकोसिस्टम” पर तीखा हमला बोला है।

एक इंटरैक्शन के दौरान हामिद अंसारी ने महमूद ग़ज़नी और लोदी जैसे मध्यकालीन शासकों को लेकर कहा कि ये “भारतीय लुटेरे थे, बाहर से आए विदेशी नहीं” और “उन्हें विदेशी कहना राजनीतिक सुविधा के लिए है, वास्तविकता नहीं।” इसी बयान को आधार बनाकर बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोग लगातार इतिहास को “रीराइट” कर रहे हैं, इस्लामी आक्रांताओं को महिमामंडित कर रहे हैं और हिंदू भावनाओं को चोट पहुँचा रहे हैं।

आइए, इस पूरे विवाद को आसान भाषा में समझें – हामिद अंसारी ने क्या कहा, बीजेपी क्यों भड़की, “कांग्रेस ईकोसिस्टम” से क्या मतलब है, सोमनाथ और औरंगज़ेब जैसे नाम इसमें कैसे खींच लाए गए, और ये बहस असल में किस गहरी राजनीतिक–वैचारिक खाई को दिखाती है।

हामिद अंसारी का बयान क्या था?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक हालिया इंटरैक्शन/चर्चा के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से मध्यकालीन इतिहास और “फॉरेन इनवेडर्स” के नैरेटिव पर सवाल किया गया। इसी संदर्भ में उन्होंने महमूद ग़ज़नी और लोदी शासकों (जिनमें लोधी वंश के सुल्तान शामिल हैं) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि:

  • “लोदी और ग़ज़नी भारतीय लुटेरे थे, बाहर से आए विदेशी नहीं थे।”
  • “उन्हें विदेशी कहना राजनीतिक सुविधा के लिए हो सकता है, लेकिन वे वास्तव में विदेशी नहीं थे।”

मतलब, अंसारी का broadly आशय यह बताया जा रहा है कि समय के साथ ये शासक भारत में बस गए, यहीं की सत्ता–संरचना का हिस्सा बने, और इसलिए उन्हें हमेशा “विदेशी आक्रमणकारी” कहकर पेश करना इतिहास को oversimplify करना है।

हालाँकि, महमूद ग़ज़नी के मामले में यह तर्क काफी विवादित है, क्योंकि इतिहासकारों की बड़ी संख्या मानती है कि ग़ज़नी मूलतः अफ़गानिस्तान क्षेत्र से आने वाला शासक था, जिसने भारत पर कई बार लूटमार और मंदिर विध्वंस के लिए हमले किए और यहां स्थायी राज नहीं जमाया, बल्कि अपनी राजधानी गज़नी से ही शासन चलाता रहा।

यहीं से विवाद की शुरुआत होती है – क्या ग़ज़नी को “भारतीय लुटेरा” कह देना ऐतिहासिक रूप से गलत और राजनीतिक रूप से खतरनाक बयान है, या फिर ये एक वैकल्पिक/बहस योग्य दृष्टिकोण है?

BJP की प्रतिक्रिया: “कांग्रेस ईकोसिस्टम ग़ज़नी का महिमामंडन कर रहा है”

जैसे ही मीडिया में यह बयान आया, बीजेपी ने इसे तुरंत लपक लिया। पार्टी के प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में हामिद अंसारी और कांग्रेस दोनों पर जमकर वार किया।

उनका broadly तर्क कुछ इस तरह था:

  • यह कोई isolated स्टेटमेंट नहीं, बल्कि कांग्रेस और उससे जुड़ी “ईकोसिस्टम” की लगातार वही लाइन है जो इतिहास को “sanitize” करना चाहती है।
  • हामिद अंसारी पहले भी ऐसे बयानों और पोज़िशन्स से जुड़े रहे हैं, जिन्हें BJP “Hindu विरोधी” या “राष्ट्र–विरोधी narrative” कहती रही है।
  • महमूद ग़ज़नी वही शासक है जिसने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा, लूटा और उसकी पवित्रता को रौंदा। ऐसे व्यक्ति को “Indian looter” कहकर उसकी विदेशी आक्रांता वाली पहचान को dilute करना, BJP की नज़र में उसके अपराधों को कमतर दिखाने जैसा है।

शहज़ाद पूनावाला ने अपने पोस्ट में लिखा कि:

  • “Congress ecosystem eulogises Mahmud of Ghazni…”
  • “वे Somnath Swabhiman Parv का विरोध करते हैं…”
  • “वे औरंगज़ेब जैसे शासकों के अपराधों को whitewash करते हैं, जिन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार किए…”
  • “उन्हें भारत और हिंदू सभ्यता से नफ़रत है।”

यानी बीजेपी का narrative यह है कि हामिद अंसारी का बयान कोई neutral अकादमिक टिप्पणी नहीं, बल्कि कांग्रेस से जुड़े उस बड़े ideological pattern का हिस्सा है, जिसमें:

  • इस्लामी आक्रांताओं की छवि को नरम या “Indian” दिखाने की कोशिश
  • मंदिर विध्वंस, जज़िया टैक्स और धार्मिक अत्याचार जैसे मुद्दों को कम महत्व देना
  • और इसके बदले “साझा संस्कृति” और “गंगा–जमुनी तहज़ीब” की बात ज़्यादा जोर से करना

कांग्रेस ईकोसिस्टम शब्द का मतलब क्या है?

बीजेपी और उससे जुड़े कई समर्थक अक्सर “कांग्रेस ईकोसिस्टम” या “अर्बन नक्सल–लुटियंस गैंग” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इनका broadly मतलब है:

  • कांग्रेस के आधिकारिक नेता
  • उससे जुड़ी विचारधारा को सपोर्ट करने वाले कुछ पत्रकार, लेखक, अकादमिक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट
  • वो एनजीओ, थिंक–टैंक और opinion–makers जो बीजेपी–RSS की वैचारिक लाइन के विरोध में खड़े हैं

जब शहज़ाद पूनावाला कहते हैं कि “Congress ecosystem eulogises Ghazni”, तो उनका इशारा सिर्फ हामिद अंसारी तक नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों की तरफ़ है जो:

  • इतिहास में महमूद ग़ज़नी, लोधी, मुग़लों जैसे शासकों को सिर्फ “सुल्तान” या “सम्राट” के रूप में दिखाते हैं
  • मंदिरों के विध्वंस, जबरन धर्मांतरण या जज़िया जैसे मुद्दों को या तो कम करके दिखाते हैं या उन्हें “राजनैतिक” और “आर्थिक” कारणों से जोड़ देते हैं
  • और दूसरी तरफ़ हिंदू राजाओं या आधुनिक हिंदू पॉलिटिकल मूवमेंट्स के खामियों पर ज्यादा फोकस करते हैं

सोमनाथ मंदिर और ग़ज़नी: BJP क्यों बार–बार याद दिलाती है?

महमूद ग़ज़नी की सबसे चर्चित और भावनात्मक रूप से संवेदनशील कार्रवाई सोमनाथ मंदिर पर उसका हमला है। ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक:

  • ग़ज़नी ने 11वीं सदी में कई बार भारत पर हमले किए
  • उसने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया, छह महीने की लड़ाई के बाद मंदिर को तोड़ दिया
  • सोने–चांदी और बहुमूल्य जेवरात लूटकर अफ़गानिस्तान लौटा
  • हिंदू समुदाय के लिए यह घटना एक गहरी ऐतिहासिक–धार्मिक पीड़ा का प्रतीक बन गई

BJP और उससे जुड़े संगठन दशकों से सोमनाथ के पुनर्निर्माण, “स्वाभिमान पर्व” और इससे जुड़ी प्रतीकात्मक राजनीति को अपने ideological नैरेटिव का हिस्सा बनाते रहे हैं।

ऐसे में अगर कोई बड़ा सार्वजनिक चेहरा – और वो भी देश के पूर्व उपराष्ट्रपति – ग़ज़नी की “विदेशी आक्रांता” वाली पहचान को dilute करते हुए उसे “भारतीय लुटेरा” कहें, तो बीजेपी के लिए यह सीधा–सीधा ‘हिंदू sentiment के खिलाफ़ चलने वाला’ बयान बन जाता है, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहती।

औरंगज़ेब, शर्जील इमाम, उमर ख़ालिद: बीजेपी के बड़े नैरेटिव से कनेक्शन

शहज़ाद पूनावाला ने अपने बयान में सिर्फ ग़ज़नी और लोदी का ज़िक्र नहीं किया, बल्कि उन्होंने कहा कि:

  • कांग्रेस ईकोसिस्टम पहले शर्जील इमाम और उमर ख़ालिद जैसे लोगों को “युवा नेता” कहकर पेश करता है
  • अब वही लोग ग़ज़नी जैसे शासक को लेकर सफाई और महिमामंडन कर रहे हैं
  • ये सब एक ही pattern का हिस्सा है, जिसमें “हिंदू विरोध” और “भारत विरोध” दोनों झलकते हैं

यानी, बीजेपी इस विवाद को सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं रखना चाहती। वह इसे एक बड़े narrative में फिट कर रही है, जिसमें:

  • नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA), शाहीन बाग, जेएनयू और जामिया के प्रोटेस्ट्स
  • शर्जील इमाम और उमर ख़ालिद जैसे चेहरों पर लगे गंभीर आरोप
  • और अब medieval rulers की इमेज पर बहस

इन सबको जोड़कर यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस और उससे जुड़े विचार–समूह लगातार ऐसे लोगों, प्रतीकों और विचारों को बढ़ावा देते हैं, जो भाजपा के शब्दों में “देश, धर्म और majority sentiment के खिलाफ़” खड़े दिखते हैं।

हामिद अंसारी के पुराने विवाद: BJP क्यों उन्हें soft target मानती है?

हामिद अंसारी का नाम पहले भी कई राजनीतिक विवादों में आ चुका है। उदाहरण के लिए:

  • उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ मौक़ों पर भारतीय मुसलमानों की सुरक्षा और असुरक्षा की बात उठाई, जिसे बीजेपी ने “एकतरफ़ा” और “ओवरस्टेटेड” कहा।
  • कुछ इंटरव्यूज़ में उन्होंने “growing intolerance” और “majoritarian mindset” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे BJP ने भारत को बदनाम करने वाला narrative बताया।
  • 2018 में गणतंत्र दिवस के एक कार्यक्रम में “राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देने और राष्ट्रीय गीत के दौरान खड़े न होने” जैसे प्रतीकों को लेकर भी अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ, जिसमें सोशल मीडिया पर उनको टारगेट बनाया गया।

इस पृष्ठभूमि में, बीजेपी और उससे जुड़े समर्थकों के लिए अंसारी एक ऐसा चेहरा हैं जिस पर तंज कसना उनके core voter base के बीच खूब ताली और समर्थन बटोरता है।

कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या है?

इस विवाद पर फिलहाल कांग्रेस की तीखी आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसी कोई बात सामने नहीं आई, लेकिन broadly कांग्रेस और उससे जुड़े नेता अक्सर ऐसे मामलों में दो–तीन तरह की लाइन लेते हैं:

  • वे कहते हैं कि इतिहास पर अलग–अलग व्याख्या होना कोई अपराध नहीं, यह अकादमिक बहस का हिस्सा है
  • बीजेपी पर आरोप लगाते हैं कि वह हर बयान को सांप्रदायिक चश्मे से देखती है और इससे असली मुद्दों – बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की दिक्कतें – से ध्यान भटकाती है
  • साथ ही, हिंदू भावनाओं को चोट पहुँचाने के आरोप को वे खारिज करते हुए कहते हैं कि कांग्रेस की विचारधारा inclusive है और वह किसी धर्म के खिलाफ़ नहीं है

संभावना यही है कि पार्टी इस मुद्दे को ज़्यादा हवा नहीं देना चाहेगी, क्योंकि जितनी लंबी बहस चलेगी, उतना ही बीजेपी को polarisation का मौका मिलेगा।

इतिहास vs राजनीति – असली बहस कहाँ है?

अगर पूरे मामले को थोड़ा शांत दिमाग से देखें, तो दो parallel बहसें चल रही हैं:

पहली – अकादमिक और ऐतिहासिक बहस
यहां सवाल ये है कि:

  • क्या हर मध्यकालीन मुस्लिम शासक को सिर्फ “विदेशी आक्रांता” कहना सही है?
  • क्या कोई शासक जो पहले बाहर से आया, लेकिन बाद में यहीं बस गया, यहां की राजव्यवस्था का हिस्सा बना, उसे हमेशा सिर्फ “आयातित” कहकर देखना ठीक है?
  • ग़ज़नी जैसे केस में, जहां वह मुख्य रूप से बाहर से आया और बार–बार हमले और लूट के लिए ही लौटा, क्या उसे “भारतीय लुटेरा” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं है?

ये वो प्रश्न हैं जिन पर इतिहासकार और शोधकर्ता बहस कर सकते हैं – डेटा, स्रोतों और तथ्यों से।

दूसरी – राजनीतिक और वैचारिक बहस
यहां सवाल यह है कि:

  • क्या आज के भारत में ऐसे बयान केवल अकादमिक नोट्स रह जाते हैं, या फिर उनका इस्तेमाल तुरंत पॉलिटिकल पॉइंट स्कोरिंग और polarisation के लिए होता है?
  • क्या किसी भी तरह की nuanced व्याख्या की गुंजाइश बचती है, या फिर हर शख्स को या तो “राष्ट्रवादी हीरो” या “हिंदू–विरोधी विलेन” की कैटेगरी में डाल दिया जाता है?

हामिद अंसारी के बयान पर बीजेपी के हमले को दूसरे खांचे में रखना ज़्यादा तार्किक है, क्योंकि यहाँ पार्टी अपने कोर वोटर बेस – खासकर उन लोगों के लिए जो मध्यकालीन इस्लामी शासकों को मुख्य रूप से “मंदिर तोड़ने वाले” और “हिंदू पर अत्याचार करने वाले” के रूप में देखते हैं – के लिए एक साफ संदेश देना चाहती है कि:

“देखिए, कांग्रेस और उसके लोग अभी भी ग़ज़नी जैसे लोगों की इमेज साफ करने में लगे हैं, जबकि हम सोमनाथ स्वाभिमान और हिंदू गौरव की बात करते हैं।”

मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका

ऐसे विवादों में टीवी डिबेट्स, पोर्टल हेडलाइंस और सोशल मीडिया पोस्ट्स का रोल बहुत बड़ा होता है।

  • किसी भी बयान की एक–दो लाइन वायरल होती है
  • उसके कॉन्टेक्स्ट, पूरा इंटरव्यू या असली आशय पर कम चर्चा होती है
  • उसके बाद ट्रोल वार, हैशटैग कैंपेन और कट–पेस्ट वीडियो क्लिप्स से narrative बनता है

हामिद अंसारी के इस बयान के साथ भी कुछ ऐसा ही होता हुआ दिख रहा है। जिन लोगों ने पूरा इंटरैक्शन सुना नहीं, वे केवल दो लाइनें पढ़कर राय बना रहे हैं – और वही दो लाइनें राजनीति के लिए काफ़ी हैं।

क्या ये विवाद आगे भी चलेगा?

भारतीय राजनीति के मौजूदा माहौल में, जहां चुनावी सालों में हर दिन कोई न कोई symbolic मुद्दा उभर आता है, यह कहना मुश्किल है कि किसी एक विवाद की उम्र कितनी होगी।

संभव है कि:

  • आने वाले दिनों में बीजेपी के कुछ और नेता इस मुद्दे को भाषणों और टीवी डिबेट्स में उठाएँ
  • कांग्रेस इस पर डिफेंसिव नज़र आए और मुद्दा धीरे–धीरे किसी नए विवाद से रिप्लेस हो जाए
  • या फिर, अगर हामिद अंसारी खुद कोई स्पष्टीकरण या विस्तार से बयान दें, तो बहस का रुख थोड़ा बदल जाए

पर bigger picture में देखें, तो यह विवाद उस लंबी वैचारिक लड़ाई का हिस्सा है जो भारत में इतिहास, पहचान, धर्म और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर चल रही है।

निष्कर्ष: इतिहास की व्याख्या या पहचान की राजनीति?

हामिद अंसारी के “ग़ज़नी और लोदी भारतीय लुटेरे थे, विदेशी नहीं” वाले बयान पर बीजेपी का गुस्सा केवल शब्दों पर नहीं, बल्कि उस पूरे ideological conflict पर है जिसमें:

  • एक पक्ष चाहता है कि महमूद ग़ज़नी, औरंगज़ेब, लोधियों जैसे नाम हमेशा “विदेशी आक्रांता”, “मंदिर तोड़ने वाले” और “हिंदू–विरोधी” के रूप में याद किए जाएँ
  • दूसरा पक्ष इतिहास को थोड़ा ज़्यादा जटिल, layered और context–based तरीके से देखने की बात करता है, और कहता है कि हर शासन, हर ruler को सिर्फ धर्म की नज़र से देखना oversimplification है

असल बहस शायद इसी के बीच कहीं है – लेकिन ज़मीनी राजनीति में यह बहस अक्सर नारे, हैशटैग और एक–लाइनर तक सिमट जाती है।

फिलहाल, इतना साफ है कि हामिद अंसारी जैसे किसी भी बड़े मुस्लिम चेहरे के द्वारा दिए गए हर बयान का इस्तेमाल बीजेपी अपने वोटबेस को mobilise करने के लिए करेगी, और कांग्रेस इसे “वैचारिक विविधता” या “इंटेलेक्चुअल बहस” कहकर डिफेंड करने की कोशिश करेगी।

आने वाले समय में चुनाव जितने नजदीक आएंगे, इस तरह की इतिहास–आधारित वैचारिक जंगें और तेज़ होने की पूरी संभावना है।


FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: हामिद अंसारी ने ग़ज़नी और लोदी के बारे में क्या कहा था?
उत्तर: एक हालिया इंटरैक्शन में हामिद अंसारी ने कहा कि महमूद ग़ज़नी और लोधी जैसे मध्यकालीन शासक “भारतीय लुटेरे” थे, वे बाहर से आए विदेशी नहीं थे। उनके मुताबिक, उन्हें विदेशी कहना राजनीतिक सुविधा के लिए हो सकता है, लेकिन वास्तविकता में वे विदेशी नहीं माने जाने चाहिए। इसी बयान को लेकर विवाद शुरू हुआ।

प्रश्न 2: बीजेपी इस बयान पर क्यों भड़क गई?
उत्तर: बीजेपी नेताओं का कहना है कि महमूद ग़ज़नी वही शासक है जिसने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा और लूटा, इसलिए उसे “भारतीय लुटेरा” कहकर उसकी विदेशी आक्रांता वाली पहचान को कमज़ोर करना उसके अपराधों को हल्का दिखाने जैसा है। शहज़ाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ईकोसिस्टम ग़ज़नी जैसे शासकों का महिमामंडन कर रही है और हिंदू भावनाओं को चोट पहुँचा रही है।

प्रश्न 3: “कांग्रेस ईकोसिस्टम” से बीजेपी का क्या मतलब होता है?
उत्तर: “कांग्रेस ईकोसिस्टम” शब्द का इस्तेमाल बीजेपी उन सभी नेताओं, पत्रकारों, लेखकों, एक्टिविस्टों और संस्थाओं के लिए करती है जो कांग्रेस की विचारधारा या लाइन के करीब माने जाते हैं। बीजेपी के अनुसार, यही समूह इतिहास में इस्लामी शासकों की छवि नरम दिखाने, औरंगज़ेब–ग़ज़नी जैसे नामों के अपराधों को कम करके पेश करने और हिंदुत्व–आधारित नैरेटिव का विरोध करने का काम करता है।

प्रश्न 4: इस विवाद में सोमनाथ मंदिर और औरंगज़ेब के नाम क्यों लाए जा रहे हैं?
उत्तर: बीजेपी महमूद ग़ज़नी के सोमनाथ मंदिर पर हमले को हिंदू स्वाभिमान पर सीधे हमले के रूप में याद करती है। इसलिए जब कोई ग़ज़नी को “विदेशी नहीं” कहता है, तो बीजेपी के लिए यह सीधा–सीधा सोमनाथ ध्वंस के इतिहास को dilute करने जैसा है। औरंगज़ेब का ज़िक्र इसलिए आता है क्योंकि बीजेपी अक्सर कहती है कि कांग्रेस और उसके समर्थक औरंगज़ेब जैसे शासकों के अत्याचारों को “whitewash” करते हैं।

प्रश्न 5: क्या हामिद अंसारी पहले भी ऐसे विवादों में रहे हैं?
उत्तर: हाँ, हामिद अंसारी पहले भी कई बार बीजेपी के निशाने पर रहे हैं। उन्होंने अलग–अलग मौक़ों पर भारतीय मुसलमानों की असुरक्षा, बढ़ती असहिष्णुता और majoritarian सोच जैसे मुद्दों पर बयान दिए हैं, जिनको बीजेपी “exaggerated” और “भारत–विरोधी narrative” कहती रही है। इसी पिछली पृष्ठभूमि की वजह से उनके किसी भी नए बयान को बीजेपी तुरंत राजनीतिक अटैक के लिए इस्तेमाल कर लेती है।

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