कॉमर्स मंत्री पियूष गोयल ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत की रेडलाइन्स साफ़ कीं – इथेनॉल ब्लेंडिंग और तंबाकू इंपोर्ट पर ‘नो’। किसान हित, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आत्मनिर्भर भारत क्यों प्राथमिकता। डेयरी फ्रूट्स लैबोर ड्यूटीज़, अमेरिकी टैरिफ़्स, टेक्सटाइल डंपिंग और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का पूरा बैकग्राउंड।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में ‘नो गो’ लिस्ट: गोयल ने इथेनॉल तंबाकू के अलावा क्या रखा रिज़र्व
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: इथेनॉल और तंबाकू पर गोयल की सख्त रेडलाइन्स
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातें लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन अब कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्री पियूष गोयल ने साफ़ लकीर खींच दी है। उन्होंने हाल ही में कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी और तंबाकू इंपोर्ट जैसे क्षेत्रों पर भारत किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा। ये रेडलाइन्स भारत के किसानों, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आत्मनिर्भर भारत की नीतियों की रक्षा के लिए हैं। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका भारत से बड़े व्यापारिक रियायतें मांग रहा है, लेकिन गोयल ने साफ़ किया कि कुछ क्षेत्र बिल्कुल नॉन-नेगोशिएबल हैं। ये बयान दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया जब पत्रकारों ने US FTA की प्रोग्रेस पर सवाल किया। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 190 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है लेकिन ट्रेड डेफिसिट अभी भी भारत के पक्ष में नहीं है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग पर भारत का सख्त रुख़: किसानों की आय का सवाल
इथेनॉल ब्लेंडिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय दोगुनी करने की महत्वाकांक्षी योजना का अहम हिस्सा है। सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है जो किसानों को गन्ना और अन्य फसलों से इथेनॉल उत्पादन के ज़रिए अतिरिक्त आय देता है। पियूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका चाहे जो दबाव डाले, भारत इस नीति पर पीछे नहीं हटेगा क्योंकि ये किसानों के हितों से सीधे जुड़ी है। अमेरिका इथेनॉल को अपने बड़े एग्री-बिज़नेस हितों के तहत भारत के मार्केट में घुसेड़ना चाहता है लेकिन गोयल ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ये आत्मनिर्भर भारत के ख़िलाफ़ होगा। इथेनॉल से किसानों को सालाना 30,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है और ये पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। अमेरिकी कंपनियाँ सस्ते कॉर्न बेस्ड इथेनॉल के ज़रिए भारतीय मार्केट हथियाना चाहती हैं लेकिन भारत गन्ना किसानों को प्राथमिकता देगा।
तंबाकू इंपोर्ट पर ‘नो’: सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता
दूसरा बड़ा नॉन-नेगोशिएबल क्षेत्र तंबाकू इंपोर्ट है। गोयल ने कहा कि भारत में तंबाकू उत्पादों पर सख्त नियंत्रण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है और अमेरिकी दबाव के बावजूद हम इंपोर्ट ड्यूटी कम नहीं करेंगे। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उपभोक्ता देश है जहाँ कैंसर और फेफड़े के रोगों से सालाना लाखों मौतें होती हैं। सरकार ने GST, हाई एक्साइज़ और पैकेजिंग नियमों से तंबाकू को महंगा रखा है ताकि युवाओं को दूर रखा जाए। अमेरिका अपने तंबाकू एक्सपोर्टर्स के हित में भारत के मार्केट को खोलना चाहता है लेकिन गोयल ने साफ़ मना कर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार तंबाकू से भारत को सालाना 1.7 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है। ये रुख़ WHO की गाइडलाइन्स और भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मेल खाता है।
डेयरी फ्रूट्स और लेबर ड्यूटीज़: और भी रेडलाइन्स
गोयल ने डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्रूट्स और लेबर ड्यूटीज़ को भी नॉन-नेगोशिएबल बताया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और डेयरी किसानों को अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स के सस्ते इंपोर्ट से बचाना ज़रूरी है। इसी तरह फ्रूट्स सेक्टर में फ्लोरिडा ऑरेंज जैसे अमेरिकी प्रोडक्ट्स भारतीय किसानों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। लेबर ड्यूटीज़ पर भी भारत अपने श्रम कानूनों को प्रोटेक्ट करेगा। ये क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार हैं जहाँ करोड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। गोयल ने कहा कि ट्रेड डील में भारत कुछ क्षेत्रों में रियायत दे सकता है लेकिन ये लाल रेखाएँ पार नहीं होंगी। अमेरिका भारत के टेक्सटाइल और फार्मा एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ़्स कम करने की मांग कर रहा है।
भारत-अमेरिका ट्रेड टॉक्स का बैकग्राउंड और वर्तमान स्थिति
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते 1940 के दशक से हैं लेकिन असली गति 2000 के बाद आई। 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार 190 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया लेकिन भारत का ट्रेड डेफिसिट 30 बिलियन के आसपास है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों देशों ने मिनी ट्रेड डील की कोशिश की लेकिन इथेनॉल और डेयरी पर मतभेद बने रहे। बाइडेन के समय IPEF फ्रेमवर्क बना लेकिन बाइंडिंग नहीं। अब ट्रंप 2.0 के आने से ट्रेड डील तेज़ी पकड़ रही। भारत आत्मनिर्भर भारत PLI स्कीम्स को प्रोटेक्ट करना चाहता है। अमेरिका भारत को चीन के टेक्सटाइल डंपिंग का विकल्प बनाना चाहता है। गोयल ने कहा कि डील में भारत IT सर्विसेज फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स के एक्सपोर्ट्स बढ़ाने पर फोकस करेगा। वार्ताएँ दिल्ली और वाशिंगटन में चल रही हैं।
चीन टेक्सटाइल डंपिंग से भारत को मौक़ा लेकिन सावधानी ज़रूरी
अमेरिका पर चीन का टेक्सटाइल डंपिंग बढ़ रहा है जिससे भारत को मौक़ा मिल सकता है। भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को US मार्केट में बेहतर एक्सेस चाहिए। लेकिन गोयल ने चेतावनी दी कि डंपिंग रोकने के लिए भारत सावधान रहेगा। आत्मनिर्भर टेक्सटाइल मिशन के तहत भारत 100 बिलियन डॉलर एक्सपोर्ट टारगेट पर है। US टैरिफ़्स कम करने से फायदा होगा लेकिन इंपोर्ट्स पर कंट्रोल रहेगा। ये बैलेंस डील का आधार बनेगा।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या बाइलेटरल डील: भारत की स्ट्रेटेजी
भारत US के साथ फुल FTA से बच रहा क्योंकि ये कृषि और डेयरी को खतरे में डाल सकता है। इसके बजाय बाइलेटरल एग्रीमेंट्स पर फोकस। गोयल ने कहा कि डील पारदर्शी और पारस्परिक फायदे वाली होगी। भारत PLI स्कीम्स को शील्ड करेगा। अमेरिका भारत को USMCA जैसी डील का हिस्सा बनाना चाहता लेकिन भारत सॉवरेन रूल्स प्रोटेक्ट करेगा। वार्ताएँ 2026 में तेज़ होंगी।
इस रेडलाइन्स का मतलब: किसानों से लेकर उद्योग तक सुरक्षा
गोयल की ये रेडलाइन्स सिर्फ़ ट्रेड पॉलिसी नहीं बल्कि भारत की आर्थिक संप्रभुता का प्रतीक हैं। इथेनॉल से किसान तंबाकू से स्वास्थ्य डेयरी फ्रूट्स से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सब प्रोटेक्टेड। अमेरिका के साथ डील से भारत को टेक्सटाइल फार्मा सर्विसेज में फायदा होगा। लेकिन रेडलाइन्स पार नहीं होंगी। ये बयान ट्रंप टीम को संदेश है कि भारत समझौता करेगा लेकिन अपनी कोर इंटरेस्ट्स नहीं छोड़ेगा।
5 FAQs
प्रश्न 1: पियूष गोयल ने US ट्रेड डील में कौन से क्षेत्र नॉन-नेगोशिएबल बताए?
उत्तर: गोयल ने इथेनॉल ब्लेंडिंग, तंबाकू इंपोर्ट, डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्रूट्स और लेबर ड्यूटीज़ को नॉन-नेगोशिएबल बताया। कहा ये किसानों, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता से जुड़े हैं। अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत झुकेगा नहीं।
प्रश्न 2: इथेनॉल ब्लेंडिंग पर भारत का रुख़ क्यों सख्त है?
उत्तर: इथेनॉल पॉलिसी किसानों को गन्ना बेचकर अतिरिक्त आय देती है। 20% ब्लेंडिंग से सालाना 30,000 करोड़ का लाभ। अमेरिकी कॉर्न इथेनॉल भारतीय किसानों को नुकसान पहुँचाएगा। आत्मनिर्भर ऊर्जा के लिए ये ज़रूरी।
प्रश्न 3: तंबाकू इंपोर्ट पर भारत क्यों मना कर रहा?
उत्तर: तंबाकू से भारत में कैंसर फेफड़े रोग बढ़ रहे। सालाना 1.7 लाख करोड़ नुकसान। GST एक्साइज़ से महंगा रखा। अमेरिकी इंपोर्ट युवाओं को खतरा। स्वास्थ्य प्राथमिकता।
प्रश्न 4: भारत-अमेरिका ट्रेड टॉक्स की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: द्विपक्षीय व्यापार 190 बिलियन डॉलर। डेफिसिट भारत के खिलाफ़। IPEF से आगे बाइलेटरल डील पर फोकस। टेक्सटाइल फार्मा सर्विसेज में भारत को फायदा। ट्रंप 2.0 से तेज़ी।
प्रश्न 5: गोयल की रेडलाइन्स का राजनीतिक मतलब क्या?
उत्तर: ये आत्मनिर्भर भारत PLI की रक्षा। किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रोटेक्ट। अमेरिका को संदेश – पारस्परिक फायदा या कोई डील नहीं। चीन डंपिंग से भारत को मौक़ा।
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