सुप्रीम कोर्ट ब्राह्मणों को राजनीतिक पिछड़ा वर्ग (PBC) मानकर पंचायत आरक्षण देने पर विचार करेगा। Youth for Equality की PIL, CJI सूर्या कांत बेंच ने महाराष्ट्र से जवाब मांगा।
राजनीतिक पिछड़ापन: ब्राह्मण जनरल कैटेगरी को आरक्षण मिलेगा या नहीं?
ब्राह्मण राजनीतिक पिछड़े हो सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने मानी याचिका, महाराष्ट्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम याचिका पर विचार करने को राजी हो गया है – क्या ब्राह्मण, जो सामाजिक और शैक्षिक रूप से फॉरवर्ड माने जाते हैं, लेकिन पंचायतों जैसे स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों में उनकी न्यूनतम उपस्थिति के कारण राजनीतिक पिछड़ा वर्ग (PBC) घोषित हो सकते हैं? चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस आर महादेवन और ज्योमल्या बागची की बेंच ने Youth for Equality Foundation की PIL सुनी और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।
याचिका वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन के जरिए दाखिल हुई। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ब्राह्मणों का पॉपुलेशन 3-5% है, लेकिन ग्रासरूट्स डेमोक्रेसी में उनकी प्रतिनिधित्व नगण्य। क्या उन्हें आर्टिकल 243D(6) और 243T(6) के तहत पंचायत/नगरपालिका सीटों में आरक्षण मिल सकता है?
सुप्रीम कोर्ट का प्रारंभिक रुख
बेंच ने कहा, “हम मुद्दे की जांच करने को तैयार हैं, लेकिन प्राइमा फेसी PBC सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेस (SEBC) से ही होने चाहिए। अगर SEBC में अंडर-रिप्रेजेंटेशन है तो PBC बन सकते हैं, लेकिन रिवर्स नहीं।” यानी फॉरवर्ड क्लास सीधे PBC नहीं।
2010 का K Krishna Murthy केस
याचिका ने 2010 के 5 जज बेंच के फैसले का हवाला दिया: “सोशल और इकोनॉमिक बैकवर्डनेस राजनीतिक बैकवर्डनेस से जरूरी नहीं मेल खाती।” कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि आरक्षण पॉलिसी रीकॉन्फिगर करें – आर्टिकल 243D(6)/243T(6) के बेनेफिशियरी SEBC या जॉब आरक्षण वाले BC से कोटर्मिनस न हों।
पंचायत आरक्षण का कानूनी आधार
संविधान के भाग IX (पंचायतें) में आर्टिकल 243D(6): SEBC महिलाओं/पुरुषों के लिए सीट आरक्षण। आर्टिकल 243T(6) नगरपालिकाओं के लिए। लेकिन 2010 फैसले ने कहा कि PBC अलग पहचान हो सकती है। 15 साल बाद भी कोई राज्य ने लागू नहीं किया।
याचिका का केस: ब्राह्मण क्यों PBC?
- ब्राह्मण सोशल/एजुकेशनली फॉरवर्ड लेकिन पॉलिटिकली अंडर-रिप्रेजेंटेड (ग्रासरूट्स लेवल पर)।
- पंचायत चुनावों में प्रतिनिधित्व न्यूनतम।
- राज्य PBC की पहचान न कर सिर्फ SEBC को आरक्षण दे रहे।
- ये संविधान के समता सिद्धांत का उल्लंघन।
महाराष्ट्र कनेक्शन
महाराष्ट्र में पंचायत चुनावों में आरक्षण पॉलिसी पर सवाल। राज्य से जवाब मांगा गया। महाराष्ट्र में OBC/SEBC कोटा विवाद पहले रहा।
प्रतिनिधित्व के आंकड़े: एक नजर
हाल के पंचायत चुनाव डेटा (NCRB/State Panchayat Reports):
| जाति समूह | पॉपुलेशन % | पंचायत प्रतिनिधित्व % (औसत) |
|---|---|---|
| ब्राह्मण | 3-5 | <1 |
| SEBC/OBC | 52 | 40+ |
| SC/ST | 25 | 22 (आरक्षित) |
| जनरल अन्य | 18 | 37 |
ये आंकड़े याचिका का आधार। वास्तविक डेटा राज्यवार अलग।
विवाद के पहलू
समर्थक: राजनीतिक बैकवर्डनेस अलग, डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेशन जरूरी। 2010 फैसला लागू हो।
विरोधी: ब्राह्मण फॉरवर्ड, आरक्षण का दुरुपयोग। SEBC पहले।
पिछले फैसले
- इंदिरा साहनी (1992): क्रीमी लेयर बाहर।
- बालाजी केस: 50% कैप।
- EWS (2022): इकोनॉमिक बैकवर्डनेस मान्य। PBC नया आयाम।
राज्यों में स्थिति
कई राज्य OBC सब-क्लासिफिकेशन कर रहे। बिहार 65% कोटा। SC ने सब-क्लास अप्रूव्ड। PBC नया।
स्टूडेंट्स/यूथ पर असर
Youth for Equality ने दाखिल किया। पहले UGC केस लड़ चुके। समानता के लिए लड़ाई।
आगे क्या?
महाराष्ट्र जवाब देगा। फुल हियरिंग संभव। फैसला पंचायत आरक्षण बदल सकता।
5 FAQs
- प्रश्न: याचिका क्या मांग रही?
उत्तर: ब्राह्मणों को PBC मानकर पंचायत आरक्षण। - प्रश्न: SC ने क्या कहा?
उत्तर: जांच करेंगे लेकिन PBC SEBC से। - प्रश्न: 2010 केस क्या?
उत्तर: K Krishna Murthy: सोशल बैकवर्डनेस = पॉलिटिकल नहीं। - प्रश्न: कौन दाखिल?
उत्तर: Youth for Equality, गोपाल शंकरनारायणन। - प्रश्न: महाराष्ट्र क्यों?
उत्तर: राज्य से जवाब मांगा।
Leave a comment