सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल में SC/ST वकीलों को आरक्षण की PIL को खारिज कर दिया। CJI सूर्या कांत ने कहा, “चुनाव नोटिफाई हो चुके, महिलाओं जैसा तुरंत नहीं मिलेगा। पहले अथॉरिटी जाओ।”
वकीलों के लिए SC/ST कोटा याचिका पर CJI का कड़ा रुख: पहले अथॉरिटी जाओ
CJI सूर्या कांत ने SC/ST वकीलों को बार काउंसिल कोटा PIL पर लगाई क्लास: “चुनाव के बीच कोर्ट क्यों?”
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल में SC/ST वकीलों को आरक्षण देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस आर महादेवन और ज्योमल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई कि चुनाव नोटिफाई हो चुके हैं, अब हस्तक्षेप नहीं होगा। CJI ने तीखे लहजे में कहा, “तुम हर जगह हो – ज्यूडिशरी में, वकीलों में, संसद में। 1961 से बार काउंसिल है, कुछ किया नहीं। बस क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए कुछ किया तो अब प्लेट पर परोस दो!”
याचिका राम कुमार गौतम और अन्य ने दाखिल की थी, जिसमें Advocates Act 1961 में SC/ST आरक्षण जोड़ने की मांग थी। याचिकाकर्ताओं ने महिलाओं को 30% प्रतिनिधित्व (दिसंबर 2025 का SC आदेश) का हवाला दिया। लेकिन बेंच ने साफ किया कि वो रिजर्वेशन नहीं, सिर्फ रिप्रेजेंटेशन था।
बार काउंसिल चुनाव: हस्तक्षेप क्यों नहीं?
बेंच ने कहा, “चुनाव प्रक्रिया चल रही है, बीच में नई योग्यता या प्रतिनिधित्व नहीं ला सकते। अगले चुनाव के लिए आओ।” याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि पहले statutory authorities (बार काउंसिल ऑफ इंडिया, स्टेट बार काउंसिल) से संपर्क करें। अगर जवाब न मिले तो फिर कोर्ट आएँ। कोर्ट ने आशा जताई कि अथॉरिटीज़ राम कुमार PIL का ध्यान रखेंगी।
रिजर्वेशन vs रिप्रेजेंटेशन: CJI का स्पष्टीकरण
CJI ने महिलाओं वाले केस को मिसअंडरस्टैंड न करने को कहा। “हमने महिलाओं को रिजर्वेशन नहीं दिया, सिर्फ रिप्रेजेंटेशन। वो केस सालों चला, प्रयास हुए। तुम भी अथॉरिटीज़ से लड़ो।” महिलाओं का मामला दो साल चला, तब SC हस्तक्षेप कर 30% कोऑप्शन (नॉमिनेशन से कम) मांडेटरी किया। SC/ST के लिए ऐसा नहीं।
Advocates Act 1961: क्या कहता है?
Act में बार काउंसिल सदस्यों का चुनाव डायरेक्ट वोटिंग से। कोई जातिगत आरक्षण प्रावधान नहीं। राज्यवार काउंसिल में 25% राज्य सरकार नॉमिनेट करती है। महिलाओं/दिव्यांग के लिए हाल में छूट दी गई। SC/ST कोटा PIL पहली बार।
महिलाओं का 30% कोटा: दिसंबर 2025 का आदेश
SC ने कहा था कि महिलाओं का 30% प्रतिनिधित्व “नॉन‑नेगोशिएबल”। डेफिसिट कोऑप्शन से पूरा। नॉमिनेशन फीस PwD वकीलों के लिए कम। ये inclusive measures थे, न कि रिजर्वेशन।
बार काउंसिल में प्रतिनिधित्व: आंकड़े
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास 17 लाख+ वकील। स्टेट काउंसिल में SC/ST/OBC का प्रतिनिधित्व कम। 2024 चुनाव डेटा: महिलाएँ 10-15%, SC/ST 5-8% (अनुमानित)। PIL में दावा कि Act में SC/ST जोड़ना जरूरी।
CJI का तंज: “हर जगह हो, फिर अब क्यों?”
CJI ने कहा, “बार काउंसिल 1961 से है। ज्यूडिशरी, वकील, संसद में SC/ST हैं। सालों चुप रहे, अब महिलाओं के बाद दौड़े। प्लेटर पर चाहिए?” ये टिप्पणी PIL टाइमिंग पर थी – चुनाव नोटिफाई हो चुके।
आगे क्या?
- याचिकाकर्ता BCI/स्टेट अथॉरिटी को representation दें।
- अगले चुनाव (2027?) में नई PIL।
- BCI SC/ST के लिए voluntary measures ले सकता।
BCI ने महिलाओं/PwD के लिए फीस रिडक्शन किया।
वकीलों के लिए टिप्स
महत्व
ये फैसला दिखाता कि SC चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से बचता। रिजर्वेशन vs रिप्रेजेंटेशन पर स्पष्टता। बार काउंसिल में diversity बढ़ाने पर फोकस।
5 FAQs
- प्रश्न: SC ने SC/ST कोटा PIL पर क्या फैसला दिया?
उत्तर: खारिज। चुनाव चल रहे, हस्तक्षेप नहीं। अथॉरिटी पहले अप्रोच करें। - प्रश्न: CJI ने क्या कहा?
उत्तर: “हर जगह हो SC/ST, 1961 से चुप रहे। महिलाओं के बाद प्लेटर पर चाहिए?” - प्रश्न: महिलाओं को 30% क्यों मिला?
उत्तर: रिप्रेजेंटेशन, नॉन‑नेगोशिएबल। सालों चले केस के बाद। - प्रश्न: Advocates Act में कोटा?
उत्तर: कोई जातिगत आरक्षण नहीं। चुनाव डायरेक्ट। - प्रश्न: आगे क्या?
उत्तर: अथॉरिटी को representation, अगले चुनाव में PIL।
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