लंदन के ईरानी दूतावास पर प्रदर्शनकारी ने बालकनी चढ़कर वर्तमान झंडा उतार दिया और 1979 से पहले का शेर-सूरज चढ़ा दिया। ईरान में महंगाई विरोधी आंदोलन तेज, 72 मरे, 2300 गिरफ्तार। ट्रंप ने दी चेतावनी।
ईरान के खिलाफ वैश्विक आग: लंदन में दूतावास पर धावा, प्री-1979 झंडा लहराया, वीडियो वायरल
लंदन में ईरानी दूतावास पर सनसनीखेज प्रदर्शन: झंडा बदलकर प्री-1979 चिन्ह लहराया
लंदन के केंसिंगटन इलाके में स्थित ईरानी दूतावास के सामने शुक्रवार को जो नजारा हुआ, वो पूरी दुनिया में वायरल हो गया। सैकड़ों एंटी-रिजीम प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच एक साहसी शख्स दूतावास की बालकनी पर चढ़ गया। उसने इस्लामिक रिपब्लिक का आधिकारिक झंडा खींचकर नीचे फेंक दिया और उसकी जगह ईरान का पुराना ‘शेर और सूरज’ वाला प्री-1979 इम्ब्लम चढ़ा दिया। भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की- ‘डाउन विद इस्लामिक रिपब्लिक!’ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर दो लोगों को गिरफ्तार किया। एक को एग्रिवेटेड ट्रेसपास और इमरजेंसी वर्कर पर हमले के संदेह में, दूसरे को सिर्फ ट्रेसपास के लिए। पुलिस तीसरे व्यक्ति की तलाश में है। ये साफ नहीं कि झंडा बदलने वाला पकड़ा गया या नहीं। दूतावास ने बाद में अपने X अकाउंट पर फोटो पोस्ट कर दिखाया कि उनका झंडा वापस लगा दिया गया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, कोई बड़ा हंगामा नहीं।
ये घटना ईरान में दिसंबर 2025 के आखिर से चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा है। महंगाई, आर्थिक संकट और बेरोजगारी से शुरू हुए आंदोलन अब सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती दे रहे। यूएस-बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, 28 दिसंबर से अब तक 72 से ज्यादा लोग मारे गए, 2300 से अधिक गिरफ्तार। कुछ रिपोर्टों में मौतें 100 के पार बताई जा रही। ईरान ने पूरे देश में इंटरनेट काट दिया।
ईरान में प्रदर्शनों का बैकग्राउंड
ईरान की अर्थव्यवस्था सालों से संकट में है। अमेरिकी प्रतिबंध, तेल कीमतों में गिरावट, महंगाई दर 40% से ऊपर और युवा बेरोजगारी ने लोगों को सड़कों पर उतार दिया। तेहरान, इस्फहान, मशहद जैसे शहरों में प्रदर्शनकारी ‘इस्लामिक रिपब्लिक को मौत’ जैसे नारे लगा रहे। कुछ खुलेआम पूर्व राजशाही के बहाली की मांग कर रहे, शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के बेटे रेजा पहलवी का नाम ले रहे। रेजा ने विदेश से अपील की- ‘प्रदर्शन जारी रखो।’
सरकार ने सख्ती बढ़ा दी। अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाhedi आजाद ने कहा- प्रदर्शनकारी ‘खुदा के दुश्मन’, मौत की सजा हो सकती। इंटरनेट ब्लैकआउट से सूचना कंट्रोल करने की कोशिश। ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स ने निंदा की। ये 2009 ग्रीन मूवमेंट या 2022 माहसा अमिनी आंदोलनों से बड़ा चैलेंज लग रहा।
दुनिया भर में एकजुटता प्रदर्शन
लंदन की ये घटना अकेली नहीं। पेरिस, बर्लिन में सॉलिडैरिटी रैलियां हुईं। वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर प्रदर्शन। ब्रिटिश-ईरानी पत्रकार पोटकिन अजारमेहर ने फॉक्स न्यूज से कहा- ‘ओबामा के जमाने में ईरानी चिल्लाते थे- तुम हमारे साथ हो या उनके? अब ट्रंप का सपोर्ट साफ है।’ वेस्टर्न एक्टिविस्ट्स की चुप्पी पर सवाल उठे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी- ‘ईरान मुश्किल में है। लोग शहर कब्जा कर रहे। अगर रिजीम मास वायलेंस करेगी तो हम जोरदार जवाब देंगे- बूट्स ऑन ग्राउंड नहीं, लेकिन जहां दर्द हो वहां मारेंगे।’ ट्रुथ सोशल पर पोस्ट- ‘ईरान कभी न देखी आजादी की ओर। अमेरिका मदद को तैयार!’
शेर और सूरज इम्ब्लम का महत्व
1979 इस्लामिक रिवॉल्यूशन से पहले ईरान का ये झंडा इस्तेमाल होता था। शेर ताकत, सूरज रोशनी और आजादी का प्रतीक। पahlavi王朝 से जुड़ा। प्रदर्शनकारियों के लिए ये रिजीम के खिलाफ विद्रोह का सिंबल। लंदन में इसे चढ़ाने से अंदरूनी आंदोलन को बूस्ट मिला।
ईरानी दूतावास ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन झंडा बहाल करने की फोटो पोस्ट की। ब्रिटेन पुलिस ने कहा- ऑर्डर बनाए रखा।
ईरान प्रदर्शनों के प्रमुख आंकड़े
| विवरण | आंकड़े | स्रोत |
|---|---|---|
| मौतें | 72+ | HRANA |
| गिरफ्तारियां | 2,300+ | HRANA |
| शुरूआत | 28 दिसंबर 2025 | सभी स्रोत |
| प्रभावित शहर | तेहरान, इस्फहान, मशहद +20 | |
| इंटरनेट | पूर्ण ब्लैकआउट | |
वैश्विक प्रभाव और ट्रंप की भूमिका
ट्रंप का बयान ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ा सपोर्ट। खामेनेई ने क्लैंपडाउन का संकेत दिया। तेहरान पर प्रेशर बढ़ रहा। यूरोप में सॉलिडैरिटी से अंदरूनी हौसला। लंदन इवेंट ने सोशल मीडिया पर #IranRevolution ट्रेंड कराया।
ब्रिटिश-ईरानी कम्युनिटी एक्टिव। पोटकिन ने कहा- ग्लोबल अटेंशन जरूरी, लेकिन वेस्टर्न एक्टिविस्ट्स कहां? ईरान में महिलाएं, युवा आगे।
प्रदर्शनों की समयरेखा
- 28 दिसंबर 2025: महंगाई विरोधी रैलियां शुरू।
- जनवरी 2026: पूरे देश फैले, राजशाही समर्थन।
- 10 जनवरी: लंदन दूतावास पर झंडा बदला।
- ट्रंप चेतावनी: सख्त कार्रवाई की धमकी।
- ईरान: इंटरनेट कट, गिरफ्तारियां तेज।
भविष्य क्या?
ईरान की सत्ता को अब तक का सबसे बड़ा चैलेंज। आर्थिक दबाव, युवा गुस्सा, ग्लोबल सपोर्ट। क्या रिजीम टूटेगी? या खूनखराबा होगा? ट्रंप की ‘हार्ड हिट’ वाली धमकी ने तनाव बढ़ाया। लंदन जैसी घटनाएं अंदरूनी विद्रोह को हवा देंगी।
ईरानी डायस्पोरा एकजुट। शेर-सूरज फिर लहराएगा या नहीं, वक्त बताएगा। लेकिन आजादी की चिंगारी जल चुकी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- लंदन ईरानी दूतावास पर क्या हुआ?
प्रदर्शनकारी बालकनी चढ़ा, रिजीम झंडा उतारा, प्री-1979 शेर-सूरज चढ़ाया। पुलिस ने 2 गिरफ्तार किए। - ईरान प्रदर्शन क्यों शुरू हुए?
महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक संकट से। अब रिजीम के खिलाफ। 28 दिसंबर से चल रहे। - कितने मारे गए ईरान आंदोलन में?
HRANA के अनुसार 72+, 2300 गिरफ्तार। इंटरनेट ब्लैकआउट। - ट्रंप ने ईरान पर क्या कहा?
‘रिजीम को जोरदार मारेंगे जहां दर्द हो। अमेरिका मदद को तैयार।’ - शेर-सूरज झंडा क्या दर्शाता?
1979 रिवॉल्यूशन से पहले का प्रतीक, राजशाही से जुड़ा। आजादी का सिंबल।
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