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नेशनल हेराल्ड केस में बढ़ी मां-बेटे की मुश्किलें, दिल्ली HC ने नोटिस भेजकर मांगा जवाब

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नई दिल्ली। सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड केस में नोटिस जारी कर कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य से जवाब मांगा है। ने याचिका पर सोनिया-राहुल के अलावा ऑस्कर फर्नाडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया को नोटिस जारी कर 12 अप्रैल तक जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

दरअसल, निचली अदालत में अतिरिक्त दस्तावेज और सुबूतों को पेश करने की अनुमति देने की मांग करते हुए राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने याचिका पर सोनिया-राहुल के अलावा ऑस्कर फर्नाडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया को नोटिस जारी कर 12 अप्रैल तक जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। बता दें कि इस पूरे मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. मोती लाल वोहरा के खिलाफ कार्रवाई उनके निधन के बाद समाप्त हो गई है।

स्वामी ने अधिवक्ता सत्य सबरवाल के माध्यम से याचिका दायर कर अतिरिक्त दस्तावेज व सुबूतों को पेश करने की अनुमति देने से इनकार करने के निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। स्वामी ने एक निजी आपराधिक शिकायत में सोनिया गांधी और अन्य लोगों पर धन की हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि यंग इंडियन (वाईआई) प्राइवेट लिमिटेड ने एसोसिएटेड पत्रिकाओं के 90.25 करोड़ रुपये की वसूली का अधिकार प्राप्त किया, जबकि इस अधिकार को पाने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। यंग इंडियन कंपनी गांधी परिवार की होने की बात कही गई है। हालांकि, कंपनी ने अदालत में सभी आरोप खारिज किए हैं।

क्या है पूरा मामला?

भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर अदालत की कार्यवाही में देरी करने का आरोप लगाया है। पिछली सुनवाई में कांग्रेस नेताओं ने सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा कोर्ट में दायर आवेदन का विरोध करते हुए कहा था कि यह उचित प्रावधानों के तहत दायर नहीं किया है। यह पूरी तरह अस्पष्ट है। इसे जानबूझकर देरी करने के इरादे से दायर किया गया है। ऐसे में इसे रद किया जाना चाहिए। उधर, पिछली सुनवाई में अतिरिक्त चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सचिन गुप्ता के समक्ष सोनिया व राहुल के वकील ने कहा, मौजूदा अर्जी पूरी तरह से अस्पष्ट व केस में देरी करने वाली प्रकृति के होने के नाते खारिज की जानी चाहिए।

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