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कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस: भारत का जलवा, पाकिस्तान-बांग्लादेश बहिष्कार का राज क्या?

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Commonwealth Speakers Conference, CSPOC 2026 India, PM Modi inauguration
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पीएम मोदी 15 जनवरी को 28वें CSPOC का उद्घाटन करेंगे। 42 देशों के 61 स्पीकर आएंगे, रिकॉर्ड भागीदारी। पाकिस्तान-बांग्लादेश अनुपस्थित। AI-सोशल मीडिया पर चर्चा। समविधान सदन में 14-16 जनवरी।

AI से संसद तक: कॉमनवेल्थ सम्मेलन में क्या चर्चा? पाक-बांग्ला क्यों नहीं आ रहे

पीएम मोदी का स्वागत: 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस में रिकॉर्ड 42 देश, पाक-बांग्लादेश गायब

नई दिल्ली के समविधान सदन में 14 से 16 जनवरी तक होने वाला 28वां कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) भारत की मेजबानी में इतिहास रचेगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि 56 सदस्य देशों में से 42 के प्रतिनिधि आ रहे हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जनवरी को इसका उद्घाटन करेंगे। कुल 61 स्पीकर और प्रेसिडिंग ऑफिसर भाग लेंगे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके जैसे बड़े देश शामिल हैं।​

पाकिस्तान और बांग्लादेश की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी। बांग्लादेश में संसद निलंबित है, इसलिए कोई प्रतिनिधि नहीं आ रहा। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद अंतरिम व्यवस्था चल रही, हिंसा और अस्थिरता बनी हुई। पाकिस्तान ने भी भाग लेने की पुष्टि नहीं की। भारत-पाक रिश्ते पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे निचले पायदान पर हैं। अधिकारियों ने कहा, इनकी गैरमौजूदगी आयोजन के महत्व को कम नहीं करती।​

ओम बिरला ने कहा, ‘भारत के लिए गर्व की बात है। पेपरलेस इवेंट है, सब ऑनलाइन। स्पेशल ऐप बनाया गया कोऑर्डिनेशन, फैसिलिटेशन और जानकारी के लिए।’ 13 जनवरी को रेड फोर्ट पर CSPOC स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग बिरला की चेयरमैनशिप में होगी। कनाडा का सेक्रेटेरिएट सपोर्ट करता है। CSPOC का मकसद संसदीय मूल्यों को मजबूत करना, लोकतंत्र को बढ़ावा देना।​

सम्मेलन के वर्कशॉप सेशन रोचक। पहला: ‘AI इन पार्लियामेंट: इनोवेशन, ओवरसाइट एंड अडैप्टेशन बैलेंसिंग’। दूसरा: ‘सोशल मीडिया का संसद सदस्यों पर इंपैक्ट’। तीसरा: ‘पब्लिक अंडरस्टैंडिंग एंड सिटिजन पार्टिसिपेशन बियॉन्ड वोटिंग’। चौथा: ‘सांसदों और स्टाफ की सिक्योरिटी, हेल्थ, वेलबीइंग’। ये टॉपिक्स आज की चुनौतियां हैं।

CSPOC का इतिहास 1969 से शुरू, कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स स्पीकर लुसियन लैमoureux की पहल। भारत पहली बार होस्ट कर रहा। 27वीं एडिशन युगांडा में जनवरी 2024 में हुआ, वहां राज्यसभा डेप्युटी चेयरमैन हरिवंश ने अगले होस्ट का बैटन लिया। अब भारत ने कमाल कर दिया।​

सदस्य देशों की भागीदारी

देश समूहसंख्याउदाहरण
कुल राष्ट्र56
भाग ले रहे42ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, UK
अनुपस्थित14पाकिस्तान, बांग्लादेश
स्पीकर/ऑफिसर61रिकॉर्ड 

CSPOC के उद्देश्य

  • स्पीकर्स में निष्पक्षता और न्याय।
  • संसदीय लोकतंत्र का ज्ञान बढ़ाना।
  • संस्थागत सहयोग।
  • डेमोक्रेटिक गवर्नेंस।

पड़ोसी अनुपस्थिति के कारण

  • बांग्लादेश: संसद सस्पेंड, हिंसा जारी। अल्पसंख्यक हिंदूओं पर अत्याचार।
  • पाकिस्तान: कूटनीतिक तनाव, ऑपरेशन सिंदूर प्रभाव।
    दक्षिण एशिया में हालात दिखाते हैं।

भारत की तैयारियां

  • पेपरलेस: पर्यावरण दोस्त।
  • डेडिकेटेड ऐप: आसान मैनेजमेंट।
  • रेड फोर्ट मीटिंग: प्रतीकात्मक।
  • समविधान सदन: लोकतंत्र का प्रतीक।​

पिछले आयोजन

  • 27वां: युगांडा 2024।
  • हरिवंश ने होस्टिंग अधिकार लिया।
  • अब भारत का रिकॉर्ड।

वर्कशॉप टॉपिक्स का महत्व
AI: संसद में टेक रोल, गोपनीयता बैलेंस। सोशल मीडिया: ट्रोलिंग, फेक न्यूज चैलेंज। सिटिजन पार्टिसिपेशन: वोटिंग से आगे। हेल्थ-सिक्योरिटी: सांसदों का कल्याण।

वैश्विक प्रभाव
42 देशों की मौजूदगी भारत की डिप्लोमेसी की जीत। मोदी का उद्घाटन हाइलाइट। संसदीय सहयोग बढ़ेगा।

कॉमनवेल्थ का महत्व
56 देश, 2.5 अरब लोग। ब्रिटिश कनेक्शन से लोकतंत्र प्लेटफॉर्म। भारत दूसरा सबसे बड़ा सदस्य।

ऐसे सम्मेलनों से फायदा

  • बेस्ट प्रैक्टिस शेयर।
  • चुनौतियां सॉल्व।
  • संस्थाएं मजबूत।
    भारत लीडरशिप दिखा रहा।

CSPOC 2026 भारत के लिए मील का पत्थर। पाक-बांग्ला गायबगी दक्षिण एशिया की सच्चाई दिखाती। लेकिन 61 स्पीकर्स का जमावड़ा लोकतंत्र की ताकत। मोदी का संबोधन देखने लायक।

5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. CSPOC सम्मेलन कब और कहां?
    14-16 जनवरी, नई दिल्ली समविधान सदन। मोदी 15 को उद्घाटन।
  2. कितने देश भाग ले रहे?
    42 में से 56 राष्ट्रों के 61 स्पीकर। रिकॉर्ड भागीदारी।​
  3. पाकिस्तान-बांग्लादेश क्यों नहीं आ रहे?
    बांग्लादेश संसद सस्पेंड। पाकिस्तान कूटनीतिक तनाव।​
  4. सम्मेलन के मुख्य टॉपिक्स?
    AI इन पार्लियामेंट, सोशल मीडिया इंपैक्ट, सिटिजन पार्टिसिपेशन, सांसद वेलबीइंग।
  5. CSPOC का मकसद क्या?
    संसदीय मूल्य, लोकतंत्र, संस्थागत सहयोग बढ़ाना। 1969 से चल रहा।

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