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चीन का AGIBOT A2 ने रचा इतिहास: 100 किमी पैदल चलकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड!

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AGIBOT A2
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चीन का AGIBOT A2 रॉबोट ने 100 किमी (सुझाऊ से शंघाई) पैदल तय कर गिनीज रिकॉर्ड बनाया। 56 घंटे nonstop, विंकिंग, राहगीरों से इंटरैक्शन। स्पेक्स, टेक, फायदे और रोबोटिक्स फ्यूचर की पूरी स्टोरी। 

चीन का AGIBOT A2: दुनिया का सबसे लंबा रोबोट पैदल सफर, 100 किमी का कमाल

दोस्तों, साइंस फिक्शन फिल्मों में रॉबोट्स इंसानों जैसा चलते-फिरते दिखते हैं ना? अब वो हकीकत बन गया। चीन की कंपनी AgiBot Innovation ने अपना ह्यूमनॉइड रॉबोट AGIBOT A2 100 किलोमीटर पैदल चलवाया – सुझाऊ के जिनजी लेक से शंघाई के आइकॉनिक बंड तक। कुल 56 घंटे, 7 मिनट और 49 सेकंड लगे। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे ‘लॉन्गेस्ट जर्नी बाय अ ह्यूमनॉइड रोबोट’ सर्टिफाई किया। रास्ते में सैकड़ों लोग देखते रहे, ये विंक करता, बातें करता चला गया।

ये कोई रिमोट कंट्रोल नहीं था – फुली ऑटोनॉमस। सेंसर और AI से रास्ता समझा, ऑब्स्टेकल्स अवॉइड किए। इस आर्टिकल में पूरा डिटेल – जर्नी की स्टोरी, टेक्नोलॉजी, स्पेसिफिकेशन्स, बिजनेस इंप्लिकेशन्स, ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स का फ्यूचर। चाइनीज रोबोटिक्स कंपनियों की रिपोर्ट्स और गिनीज डेटा से फैक्ट्स। अगर टेक लवर हो, तो मिस मत करना। चलिए शुरू करते हैं ये रोबोटिक एडवेंचर।

AGIBOT A2 का ऐतिहासिक सफर: सुझाऊ से शंघाई तक 4 दिनों की दास्तान

जर्नी 17 अगस्त 2025 को टेस्ट से शुरू हुई। पहले 24 घंटे 40 डिग्री गर्मी में वॉक – लाइव स्ट्रीम्ड। फिर मेन चैलेंज: 10 नवंबर जिनजी लेक से स्टार्ट। रोड्स, पैदल पाथ्स, शहर की भीड़ पार की। 13 नवंबर बंड पहुंचा। कुल 106.286 किमी – लास वेगास स्ट्रिप से 16 गुना लंबा।

राहगीर हैरान। साइकिलिस्ट्स रुक गए, ड्राइवर्स हॉर्न बजाए। AGIBOT A2 ने डिजिटल फेस पर विंक किया, इंटरैक्ट किया। कोई गिरावट नहीं, परफेक्ट बैलेंस। AgiBot के सीनियर VP वांग चुआंग: “ये कमर्शियल रेडीनेस प्रूव करता है।”

AGIBOT A2 की टेक्नोलॉजी: इंसानों जैसा चलना कैसे संभव?

हाइट 169 cm, वेट 69 kg – एवरेज ह्यूमन साइज। 40 डिग्री ऑफ फ्रीडम (DoF): हेड/नेक 2, आर्म्स 7-7, लेग्स 6-6, हैंड्स 6 DoF। वॉकिंग स्पीड 0.8 m/s (करीब 5.8 km/h)। टर्निंग रेडियस 60 cm – टाइट स्पेस में भी मुड़ सकता।

बैटरी: 14.4 Ah लिथियम, हॉट-स्वैपेबल (बिना रुके चेंज)। स्टैंडिंग 3 घंटे, वॉकिंग 1.5 घंटे। चार्जिंग 2 घंटे। सेंसर्स: 3D LiDAR, RGB-D कैमरा, फिशआई, इंफ्रारेड। AI से एनवायरनमेंट मैपिंग, ऑब्जेक्ट रिकग्निशन।

डिजिटल स्क्रीन फेस: इमोशन्स दिखाता – स्माइल, विंक। ह्यूमन गेट मिमिक – नी चेस्ट स्विंग, आर्म मूवमेंट। सैफ्टी: प्रॉक्सिमिटी सेंसर्स, इमरजेंसी स्टॉप।

स्पेसिफिकेशन्स टेबल: AGIBOT A2 vs दूसरे ह्यूमनॉइड्स

फीचरAGIBOT A2Boston Dynamics AtlasTesla Optimus
हाइट/वेट169cm/69kg 150cm/89kg173cm/57kg
DoF402840
स्पीड0.8 m/s2.5 m/s0.6 m/s
बैटरी रनटाइम1.5 hr वॉकिंग1 hr2 hr
पेलोड3kg/आर्म11kg20kg
प्राइस~$100k N/AN/A

तैयारी का राज: सैकड़ों घंटे टेस्टिंग

इंजीनियर्स ने हंड्रेड्स ऑफ अवर्स टेस्ट किए। 40°C हीट, अनईवन सरफेस, क्राउड सिनेरियोज। फॉल प्रिवेंशन पर फोकस। कोई रिमोट कंट्रोल नहीं – प्योर AI। GPS ड्यूल मॉड्यूल + LiDAR से नेविगेशन।

ह्यूमन लाइक इंटरैक्शन: विंक और बातचीत का जादू

डिजिटल फेस से इमोशन्स। राहगीरों को “हाय” बोला, विंक मारा। न्यूरल नेटवर्क्स से रियल-टाइम रिस्पॉन्स। इंडस्ट्री में कोलैबोरेशन के लिए परफेक्ट।

चीन की रोबोटिक्स क्रांति: AGIBOT का बिजनेस इंपैक्ट

AgiBot (शंघाई) ने A2, A2 Max, सर्विस रोबोट्स लॉन्च किए। 2026 में ग्लोबल मार्केट $210 बिलियन (Statista)। चीन 40% शेयर। ये वॉक लॉजिस्टिक्स, पब्लिक स्पेस, डिलीवरी प्रूव करता।

वांग चुआंग: “इंसानों के लिए चैलेंजिंग, रोबोट ने कर दिखाया।” कमर्शियल यूनिट यूज – कोई मॉडिफिकेशन नहीं।

ह्यूमनॉइड रोबोट्स का फ्यूचर: एप्लीकेशन्स और चैलेंजेस

  • लॉजिस्टिक्स: वेयरहाउस, डिलीवरी।
  • हेल्थकेयर: पेशेंट असिस्ट।
  • डिसास्टर रिलीफ: खतरनाक एरिया।
  • होम असिस्ट: एल्डर्ली केयर।

चैलेंजेस: बैटरी लाइफ, कॉस्ट, सेफ्टी। लेकिन AGIBOT ने स्टैमिना शो किया।

इंडिया कनेक्ट: ISRO और रोबोटिक्स

भारत में Tata, DRDO ह्यूमनॉइड्स पर काम। AGIBOT से इंस्पिरेशन। गगनयान में रोबोटिक आर्म्स।

प्रैक्टिकल टिप्स: घर पर रोबोटिक्स एक्सपेरिमेंट

Arduino से स्टार्ट। Raspberry Pi + LiDAR प्रोजेक्ट्स।

5 FAQs

Q1: AGIBOT A2 ने कितनी दूरी तय की?
A: 106.286 किमी, 56 घंटे 7 मिनट में।

Q2: क्या ये फुली ऑटोनॉमस था?
A: हां, कोई रिमोट कंट्रोल नहीं। AI + सेंसर्स।

Q3: स्पीड कितनी थी?
A: एवरेज 0.8 m/s, टर्निंग 60 cm रेडियस।

Q4: बैटरी कैसे मैनेज की?
A: हॉट-स्वैपेबल, बिना रुके चेंज।

Q5: भारत में कब आएंगे ऐसे रोबोट्स?
A: 2-3 साल में, Tata-DRDO प्रोजेक्ट्स से।

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