सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्वाचन आयोग ने वेस्ट बंगाल SIR लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट जारी की। 1.25 करोड़ वोटरों के नाम, माता-पिता नाम मिसमैच। जिला अधिकारी पंचायतों पर चस्पा करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद EC का ऐक्शन: पंचायत भवनों पर चस्पा होंगे डुप्लिकेट वोटरों के नाम
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIR लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट जारी की: बंगाल में 1.25 करोड़ वोटरों के नाम वेबसाइट पर
शनिवार शाम को निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले वोटरों की पूरी लिस्ट अपलोड कर दी। ये सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी के सख्त आदेश के बाद हुआ। कोर्ट ने कहा था कि वेस्ट बंगाल के ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और वॉर्ड ऑफिसों पर ये नाम शनिवार तक चस्पा कर दो। राज्य में 1.25 करोड़ वोटर इस लिस्ट में हैं। अब जिला निर्वाचन अधिकारी लिस्ट डाउनलोड कर पंचायत भवनों और ब्लॉकों पर प्रदर्शित करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस ज्योमलया बागची और दीपांकर दत्ता की बेंच सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। कोर्ट बोला- इतने बड़े पैमाने पर वोटरों को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी में डालना ठीक नहीं। नाम सार्वजनिक करो ताकि वे अपनी डिटेल्स चेक कर सकें। डिलीट करने का मतलब नहीं, वेरिफिकेशन का मौका दो। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वोटर लिस्ट साफ करना जरूरी। आयोग को तकनीकी दिक्कत आई- बीएलओ को सॉफ्टवेयर शुक्रवार रात तक न मिला, लेकिन समय पर लिस्ट जारी।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी क्या है? SIR में 2002 वोटर लिस्ट से प्रोजेनी लिंकिंग चेक होती। गड़बड़ियां जैसे- माता-पिता का नाम मिसमैच, वोटर और माता-पिता के बीच उम्र अंतर 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा, एक माता-पिता के 6 से ज्यादा बच्चे, दादा-दादी से उम्र अंतर 40 साल से कम। 45 साल से ऊपर पहली बार वोटर, जेंडर डिस्क्रेपेंसी। ये अल्गोरिदम से पकड़े जाते। कुल 1.5 करोड़ नाम- 30 लाख अनमैप्ड (2002 से लिंक न होने वाले), 1.2 करोड़ डिस्क्रेपेंसी।
SIR का बैकग्राउंड। अगस्त 2025 में शुरू, 2026 बंगाल चुनाव के लिए वोटर लिस्ट अपडेट। बीएलओ घर-घर जाकर चेक। आधार से क्रॉस वेरिफिकेशन। डुप्लिकेट, अयोग्य हटाने का लक्ष्य। लेकिन संख्या चौंकाने वाली। विपक्ष ने कहा राजनीतिक साजिश, टीएमसी बोली अमानवीय प्रक्रिया- 126 मौतें। आयोग ने कहा पारदर्शिता जरूरी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्ष सुने। अब सुनवाई शुरू होगी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- SIR लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी क्या है?
वोटर डेटा में तार्किक गड़बड़ी जैसे नाम मिसमैच, उम्र अंतर गलत। डिलीट नहीं, जांच के लिए। - सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
1.25 करोड़ नाम पंचायतों पर चस्पा करो। पारदर्शिता सुनिश्चित। - लिस्ट कहां उपलब्ध?
EC वेबसाइट। जिला अधिकारी डाउनलोड कर प्रदर्शित करेंगे। - वोटर क्या करें अगर नाम लिस्ट में?
डिटेल्स चेक, दस्तावेज लेकर आपत्ति दर्ज। सुनवाई होगी। - बंगाल चुनाव पर असर?
क्लीन लिस्ट से निष्पक्षता। 2026 विधानसभा में फर्जी वोट खत्म।
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