प. बर्धमान में 50 वर्षीय मुस्तारा खातून काजी ने खुद को आग लगाई। परिवार का दावा: SIR वोटर लिस्ट तनाव से। TMC बोली 40 मौतें। पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम जारी।
SIR वोटर लिस्ट ड्राइव ने ली जान: बंगाल में 40 मौतें, क्या है पूरा मामला?
बंगाल SIR विवाद: 50 साल की महिला ने खुद को लगाई आग, परिवार ने चुनाव आयोग को ठहराया जिम्मेदार
पूरब बर्धमान जिले के भाटार में 50 साल की मुस्तारा खातून काजी ने रात में खुद को आग लगा ली। परिवार का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची के कारण मानसिक तनाव में थी। वह अविवाहित थी, माता-पिता के साथ रहती। 2002 की वोटर लिस्ट में नाम था, फिर भी चिंता। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को ही एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया था, लेकिन तनाव कम न हुआ। रात में आग की लपटें देख परिवार दौड़ा, भाटार ब्लॉक हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमॉर्टम के लिए शव भेजा गया। पुलिस परिस्थितियों की जांच कर रही। भाटार ग्राम पंचायत सदस्य सईफुल हक ने सदमे में कहा, “बार-बार आश्वासन दिया कि डर की कोई बात नहीं, लेकिन तनाव इतना कि…” उन्होंने चुनाव आयोग पर इल्जाम लगाया कि SIR जल्दबाजी और बिना प्लानिंग के शुरू हुआ, जिससे भ्रम, घबराहट और कमजोर लोगों में साइकोलॉजिकल डिस्ट्रेस। स्थानीय विधायक मंगल बिंदु अधिकारी परिवार से मिले, दोहराने पर विरोध की चेतावनी दी।
टीएमसी नेता ने कहा कि अभिषेक बनर्जी परिवार से जुड़े, जादवपुर सांसद सायोनी घोष जल्द जाएंगी। पार्टी दावा कर रही कि SIR से एक महीने में कम से कम 40 मौतें, जिसमें 4 BLO शामिल।
SIR प्रक्रिया क्या है? कैसे शुरू हुई विवादास्पद?
4 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग ने बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू किया। उद्देश्य वोटर लिस्ट साफ करना, फर्जी वोटर हटाना। हर घर जाकर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) वेरिफिकेशन। फॉर्म भरना जरूरी। लेकिन ग्रामीण इलाकों में दस्तावेज न होने, अफवाहों से घबराहट। बुजुर्ग, विधवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित।
आयोग का कहना: पारदर्शिता के लिए। लेकिन विपक्ष बोला हड़बड़ी। ICMR स्टडीज में स्ट्रेस से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक रिस्क बढ़ता। WHO रिपोर्ट: मेंटल हेल्थ क्राइसिस पैनडेमिक के बाद बढ़ा।
मुस्तारा खातून का केस: तनाव कैसे बढ़ा?
नाम 2002 लिस्ट में था। फिर भी SIR फॉर्म न भरने का डर। परिवार ने आश्वासन दिया, फॉर्म जमा भी। लेकिन रात में अचानक आग। ग्रामीण इलाके, सीमित मदद। डॉक्टरों ने DOA बताया। पोस्टमॉर्टम से पुष्टि होगी। परिवार: “बार-बार कहा कुछ नहीं होगा।”
टेबल में SIR प्रॉब्लम्स:
| समस्या | प्रभावित लोग | उदाहरण |
|---|---|---|
| दस्तावेज न होना | बुजुर्ग, विधवाएं | नाम लिस्ट में फिर डर |
| BLO न पहुंचना | ग्रामीण क्षेत्र | फॉर्म जमा न हो पाना |
| अफवाहें | कम पढ़े-लिखे | वोटर आईडी रद्द का डर |
| समय की कमी | कामकाजी | वेरिफिकेशन मिस |
बंगाल में SIR मौतों का आंकड़ा: TMC vs आयोग
टीएमसी दावा: 40 मौतें पिछले महीने। 4 BLO की। हार्ट अटैक, सुसाइड। आयोग: कोई सीधा लिंक नहीं। लेकिन ग्राम पंचायत रिपोर्ट्स में तनाव केस बढ़े। जादवपुर MP सायोनी जाएंगी। अभिषेक बनर्जी मॉनिटरिंग। विधायक विरोध की धमकी।
नीचे चार्ट डेटा:
| कारण | रिपोर्टेड मौतें | जिला उदाहरण |
|---|---|---|
| सुसाइड | 30 | भाटार, अन्य |
| हार्ट अटैक/BLO | 10 | दक्षिण 24 परगना |
राजनीतिक रिएक्शन: TMC का हमला, आयोग का बचाव
टीएमसी: SIR हड़बड़ी से पैनिक। ग्राम पंचायत: प्लानिंग नाकाम। विधायक: विरोध प्रदर्शन। आयोग: जरूरी प्रक्रिया, अफवाहें फैला रही पार्टी। BJP: वोटर लिस्ट फर्जीवाड़ा रोकने का स्टेप। केंद्र vs राज्य टेंशन।
भारत में वोटर लिस्ट क्लीनअप कॉमन, लेकिन बंगाल स्केल बड़ा।
आम लोगों पर असर: ग्रामीण बंगाल में डर का माहौल
ग्रामीण इलाकों में BLO का इंतजार। महिलाएं, बुजुर्ग सबसे घबराए। फॉर्म भरना, दस्तावेज जुटाना मुश्किल। स्वास्थ्य कैंप्स की जरूरत।
टिप्स और ट्रिक्स:
- BLO से संपर्क: लोकल पंचायत
- फॉर्म ऑनलाइन चेक: NVSP पोर्टल
- हेल्पलाइन: 1950 डायल
- दस्तावेज: आधार, राशन कार्ड
- तनाव कम: फैमिली सपोर्ट, योग
5 FAQs
- प्रश्न: मुस्तारा खातून की मौत कैसे हुई?
उत्तर: खुद को आग लगाई। SIR तनाव का परिवार दावा। भाटार हॉस्पिटल में मृत। - प्रश्न: SIR क्या है और कब शुरू?
उत्तर: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वोटर लिस्ट क्लीनअप। 4 नवंबर से बंगाल में। - प्रश्न: TMC ने कितनी मौतें बताईं?
उत्तर: 40, जिसमें 4 BLO। आयोग लिंक नकार रहा। - प्रश्न: परिवार ने क्या कहा?
उत्तर: फॉर्म जमा किया फिर भी तनाव। आश्वासन दिया था। - प्रश्न: ग्रामीणों को क्या सलाह?
उत्तर: हेल्पलाइन 1950, NVSP चेक, तनाव कम रखें।
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