अरिजीत सिंह ने नई प्लेबैक रिकॉर्डिंग्स छोड़ने का ऐलान कर दिया है। अब रिपोर्ट्स में दावा है कि वे राजनीति में उतरने और भविष्य में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं। वेस्ट बंगाल, फेम गुरुकुल से स्टारडम तक का सफर, प्लेबैक छोड़ने का कारण, राजनीति में एंट्री की चर्चा और फैन्स पर असर – सब कुछ विस्तार से।
बॉलीवूड के ‘रूहानी’ सिंगर अब नेता बनेंगे? अरिजीत सिंह की राजनीति में जाने की चर्चा कितनी सच
अरिजीत सिंह: प्लेबैक से ब्रेक के बाद क्या अब राजनीति की पारी शुरू होगी?
बॉलीवूड में अगर पिछले एक दशक का सबसे ज़्यादा सुना जाने वाला आवाज़ किसी एक सिंगर की रही है, तो उनमें सबसे ऊपर नाम आता है – अरिजीत सिंह। “तुम ही हो”, “चन्ना मेरेया”, “केसरिया”, “फिर ले आया दिल”, “फिर कब मिलेंगे” जैसे अनगिनत गानों ने उन्हें हर उम्र के लोगों के दिल में बसा दिया। इसी बीच, उन्होंने अचानक सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ऐलान कर दिया कि अब वे नए प्लेबैक असाइनमेंट नहीं लेंगे और प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर अपनी जर्नी को यहीं रोक रहे हैं।
इस ऐलान के कुछ ही समय बाद एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि अरिजीत सिंह अब राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे भविष्य में अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर सकते हैं और ग्रासरूट लेवल से चुनावी राजनीति की शुरुआत पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक उन्होंने खुद इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, इसलिए यह पूरा मामला अभी अनुमान और ‘सोर्स–आधारित रिपोर्ट्स’ के दायरे में ही है।
फिर भी, इतना बड़े और लोकप्रिय कलाकार के राजनीति में जाने की संभावना ने फैन्स, पॉलिटिकल ऑब्जर्वर्स और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री – सबको चौंका दिया है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम इस पूरे घटनाक्रम को ठंडे दिमाग से समझें – अरिजीत ने प्लेबैक से ब्रेक क्यों लिया, राजनीति में जाने की खबरें कहां से आईं, वेस्ट बंगाल के राजनीतिक संदर्भ में इसका क्या मतलब हो सकता है और फैन्स इस चेंज को कैसे देख रहे हैं।
अरिजीत सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट: “मैं अब नए प्लेबैक असाइनमेंट नहीं लूँगा”
सबसे पहले बात करते हैं उस पोस्ट की, जिससे पूरा मामला शुरू हुआ। नए साल के आसपास, 38 वर्षीय सिंगर अरिजीत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक छोटा लेकिन बहुत अहम मैसेज लिखा।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि वे पिछले कई सालों से सुनने वालों से जो प्यार मिला उसके लिए दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने साफ़ शब्दों में लिखा कि अब से वे प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर नए असाइनमेंट नहीं लेंगे। यानी, अब नई फिल्मों के लिए गाना रिकॉर्ड करने की उनकी जर्नी, कम से कम फिलहाल के लिए, यहीं रुक रही है।
उन्होंने इस पूरे सफर को “वंडरफुल जर्नी” कहा – यानी उन्हें खुद भी लगता है कि यह फेज़ बहुत खूबसूरत रहा, लेकिन अब वे आगे कुछ नया करना चाहते हैं। पोस्ट में कहीं भी सीधे तौर पर राजनीति या पॉलिटिकल कैरियर की बात नहीं की गई, इसलिए शुरुआत में फैन्स ने इस फैसले को या तो “ब्रेक” या “री–इमैजिनिंग करियर” के रूप में देखा।
जल्द ही सामने आई रिपोर्ट: “राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने पर विचार”
पोस्ट के कुछ समय बाद मीडिया में यह खबर चली कि NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के कुछ इनसाइडर्स ने दावा किया है कि अरिजीत सिंह अब राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि:
- वे अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं।
- शुरुआत में वे सीधे बड़े चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि पहले ग्रासरूट लेवल पर, यानी लोकल या छोटे स्तर की पॉलिटिक्स से जुड़ सकते हैं।
- 2026 के वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनावों में उनके सीधे उतरने की संभावना अभी बहुत कम है।
- उनके करीबी लोग यह बता रहे हैं कि उन्होंने अपने करियर को धीरे–धीरे राजनीतिक दिशा में मोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यानी, अगर इस रिपोर्ट को आधार मानें, तो यह कोई एकदम अचानक लिया गया इमोशनल फैसला नहीं, बल्कि सोचा–समझा, प्लांड ट्रांज़िशन हो सकता है।
हालाँकि, सबसे अहम बात यह है कि अभी तक अरिजीत सिंह ने खुद अपने मुंह से या अपनी किसी ऑफिशियल पोस्ट में राजनीति में आने या पार्टी बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए यह जानकारी अभी “रिपोर्ट्स के हवाले से आई खबर” के स्तर पर ही है, न कि पुष्ट घोषणा के रूप में।
अरिजीत सिंह: जियागंज से बॉलीवूड तक का सफर
अगर किसी शख्स के राजनीति में आने की चर्चा हो रही है, तो यह समझना भी उतना ही ज़रूरी है कि वह किस बैकग्राउंड से आता है और जनता के बीच उसकी इमेज कैसी है।
अरिजीत सिंह वेस्ट बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के जियागंज कस्बे से ताल्लुक रखते हैं। एक छोटे शहर से निकलकर उन्होंने 2005 में टीवी रियलिटी शो “फेम गुरुकुल” में हिस्सा लिया। उस वक़्त वे शो जीत नहीं पाए, बल्कि बीच में ही बाहर हो गए। लेकिन यहीं से उनकी जर्नी का दूसरा, ज़्यादा मेहनत–भरा लेकिन मजबूत फेज़ शुरू हुआ।
उन्होंने अगले कुछ साल म्यूज़िक डायरेक्टर प्रीतम और दूसरे कंपोज़र्स के लिए म्यूज़िक असिस्टेंट के तौर पर काम किया, रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बैठकर अरेंजमेंट्स, धुनें, हार्मनी और टेक्निकल चीज़ें सीखीं। 2011 के आसपास उन्होंने प्लेबैक सिंगर के रूप में एंट्री की और धीरे–धीरे उनकी आवाज़ बड़े–बड़े स्टार्स की पसंद बन गई।
अगले दशक में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, अक्षय कुमार, रणबीर कपूर जैसे लगभग हर टॉप हीरो की फिल्मों में कम से कम एक अरिजीत गाना “ज़रूर होना” जैसे फार्मूले पर इंडस्ट्री चलने लगी। उनकी आवाज़ में एक तरफ सूफियाना गहराई थी, दूसरी तरफ बेहद मॉडर्न और फ्रेश फील, जिसकी वजह से वे हर उम्र के श्रोताओं में हिट रहे।
इस पूरी जर्नी ने उन्हें न सिर्फ बॉलीवुड का टॉप सिंगर बनाया, बल्कि उस तरह का ‘इमोशनल कनेक्शन’ भी दिया, जो आगे चलकर किसी भी पब्लिक फिगर के लिए राजनीति में काम आ सकता है।
क्यों चर्चा है कि वे राजनीति में आ सकते हैं?
अब सवाल उठता है कि अरिजीत जैसे शांत, लो–प्रोफाइल और अपने काम में रहने वाले कलाकार के बारे में अचानक यह बात क्यों उठी कि वे राजनीतिक पार्टी बना सकते हैं?
कुछ संभावित कारण और संकेत इस तरह समझे जा सकते हैं:
पहला, उनका सोशल वर्क और ग्रासरूट इमेज
अरिजीत सिंह लंबे समय से अपने होमटाउन जियागंज और आसपास के इलाकों में चुपचाप समाज सेवा करते रहे हैं – स्कूलों को सपोर्ट करना, हॉस्पिटल्स को हेल्प, कोविड के दौरान लोगों की मदद, इत्यादि। वे आमतौर पर इन कामों का प्रचार खुद नहीं करते, लेकिन लोकल लेवल पर लोग इन्हें जानते हैं।
ऐसे में, अगर वे चाहें तो “स्थानीय बेटे” की इमेज के साथ राजनीति में उतर सकते हैं, जो स्थानीय मुद्दों – शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोज़गारी, सांप्रदायिक तनाव – पर बात करे।
दूसरा, वेस्ट बंगाल की बदलती राजनीति
वेस्ट बंगाल में पिछले कुछ सालों से भाजपा, तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और वामदलों के बीच एक जटिल त्रिकोण/चतुष्कोणीय संघर्ष चल रहा है। तृणमूल अभी भी सबसे बड़ी ताकत है, भाजपा उसके बाद, जबकि कांग्रेस–लेफ्ट गठबंधन कई जगह कमजोर पड़ा है।
ऐसे माहौल में कोई नया चेहरा, अगर वाकई लोकप्रिय और “क्लीन इमेज” वाला हो, तो उसे कुछ आधार मिल सकता है – खासकर युवाओं के बीच। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अरिजीत शुरू में किसी मौजूदा पार्टी से नहीं, बल्कि खुद का प्रयोग शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं, ताकि वे किसी खास विचारधारा या पुराने झगड़ों से बंधे न रहें।
तीसरा, सेलिब्रिटी से नेता बनने का ट्रेंड
भारत में इससे पहले भी कई बड़े कलाकार राजनीति में आ चुके हैं – तमिलनाडु में एमजीआर, जयललिता, कमल हासन; आंध्र और तेलंगाना में चिरंजीवी, पवन कल्याण; महाराष्ट्र में सुनील दत्त, लता मंगेशकर भले एक्टिव न रहीं लेकिन राज्यसभा गईं; बिहार और यूपी में भी फिल्मी चेहरों ने चुनाव लड़े हैं।
इन सब उदाहरणों के बीच अरिजीत को भी एक ऐसा नाम माना जा सकता है, जिसकी लोकप्रियता अगर राजनीतिक संगठन और जमीनी मेहनत से जुड़ जाए, तो असर डाल सकती है। मीडिया इसी बैकग्राउंड में उन्हें “पोटेंशियल पॉलिटिकल फिगर” के रूप में देखना शुरू कर देता है।
फैन्स की नजर से – खुश या परेशान?
अरिजीत के प्लेबैक छोड़ने की खबर आते ही सबसे पहले फैन्स के मन में जो भाव आया, वह था – “अब हमारी फेवरेट आवाज़ के नए गाने नहीं आएंगे?”
बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें दुख है, लेकिन अगर अरिजीत खुद आगे बढ़ना चाहते हैं, अपना समय अपनी शर्तों पर जीना चाहते हैं, तो वे उनके फैसले का सम्मान करते हैं।
जब राजनीति वाली रिपोर्ट आई, तो रिएक्शन दो तरह के दिखे:
- कुछ लोगों ने कहा कि अगर वे ईमानदारी से काम करेंगे, भ्रष्टाचार और नफरत की राजनीति से दूर रहेंगे, तो वे उन्हें सपोर्ट करेंगे।
- दूसरी तरफ, कई फैन्स ने ये चिंता भी जताई कि “राजनीति एक गंदी जगह है, कहीं उनकी साफ–सुथरी इमेज और शांत लाइफस्टाइल को ये दुनिया खराब न कर दे।”
यह रियलिटी भी है कि राजनीति में आने के बाद किसी भी पब्लिक फिगर को खुलकर आलोचना, विरोध, प्रोपगैंडा और पर्सनल अटैक्स झेलने पड़ते हैं। अरिजीत अभी तक ऐसे विवादों से ज़्यादातर दूर रहे हैं, इसलिए उनके लिए यह बहुत बड़ा माइंडसेट शिफ्ट होगा, अगर वे सच में यह रास्ता चुनते हैं।
क्या 2026 बंगाल चुनाव में दिखेंगे अरिजीत?
रिपोर्ट्स में साफ कहा गया है कि वे 2026 के वेस्ट बंगाल असेंबली इलेक्शन में सीधे कूदने की संभावना कम है। मतलब, अगर वे राजनीति में आने का फैसला भी लें, तो पहले लोकल लेवल पर, NGO–स्टाइल काम, छोटे चुनाव या इश्यू–बेस्ड मूवमेंट्स के ज़रिए खुद को और जनता को इस नई भूमिका के लिए तैयार कर सकते हैं।
ये भी मुमकिन है कि वे सीधे पार्टी लॉन्च करने के बजाय पहले किसी प्लेटफॉर्म या जन–आंदोलन के रूप में काम शुरू करें – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं की स्किलिंग या सांप्रदायिक सौहार्द जैसे मुद्दे।
राजनीति आसान नहीं, खासकर क्लीन इमेज लेकर
अरिजीत अगर सच में राजनीति में आते हैं, तो उनके सामने कुछ बड़े चैलेंज होंगे:
- उन्हें पूरी तरह नए सेट–अप, नए तरह के दबाव और नई भाषा में संभलकर चलना होगा।
- म्यूज़िक इंडस्ट्री में जहां टैलेंट और मेहनत से धीरे–धीरे रास्ता बनता है, राजनीति में कई बार जाति, समुदाय, ध्रुवीकरण और संगठन की ताकत ज़्यादा हावी होती है।
- बंगाल की राजनीति ज़्यादा भावुक, आइडियोलॉजिकल और कभी–कभी हिंसक भी रही है। ऐसे माहौल में सॉफ्ट–स्पोकन आर्टिस्ट को खुद को बहुत जल्दी एडजस्ट करना पड़ेगा।
लेकिन दूसरी तरफ, अगर वे सच्चे दिल से लोकल इश्यूज़ पर काम करेंगे, अपने म्यूज़िक बैकग्राउंड को पूरी तरह छोड़े बिना, तो यह भी हो सकता है कि वे राजनीति में एक बिल्कुल अलग तरह का टोन और स्टाइल लेकर आएँ – कम शोर–शराबा, ज़्यादा काम–काज पर फोकस।
फिलहाल क्या तय है और क्या नहीं?
अब तक की पक्की बातें सिर्फ इतनी हैं:
- अरिजीत ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वे नए प्लेबैक असाइनमेंट नहीं लेंगे और यह जर्नी वे यहीं रोक रहे हैं।
- रिपोर्ट्स में, “सोर्सेज” के हवाले से कहा जा रहा है कि वे भविष्य में राजनीति में आने और शायद अपनी पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं।
- उन्होंने खुद किसी भी इंटरव्यू या पोस्ट में खुलकर यह नहीं कहा कि “हाँ, मैं राजनीति में आ रहा हूँ” या “मैं पार्टी बना रहा हूँ।”
यानि, यह कहना कि “अरिजीत अब नेता बन गए” अभी बहुत जल्दीबाज़ी होगी। बल्कि ज़्यादा सटीक यही होगा कि – वे अपने करियर के अगले स्टेप पर गंभीरता से सोच रहे हैं, जिसमें राजनीति भी एक संभावित रास्ता हो सकता है।
आगे के कुछ संकेत जिन पर नज़र रहेगी
अगर अरिजीत सच में इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आने वाले महीनों–सालों में कुछ संकेत दिख सकते हैं, जैसे:
- वे किसी सोशल या पब्लिक इश्यू पर ज़्यादा नियमितता से बोले–लिखें।
- अपने होमटाउन और वेस्ट बंगाल में बड़े स्केल पर सोशल वर्क या ऑर्गनाइज़्ड कैम्पेन करें।
- किसी पार्टी, गठबंधन या स्वतंत्र प्लेटफ़ॉर्म के साथ वैचारिक नज़दीकी ज़ाहिर करें।
- लोकल बॉडी इलेक्शन, पंचायत, या किसी छोटे चुनाव में सपोर्ट या कैंडिडेचर की चर्चा सामने आए।
तब जाकर यह साफ़ तस्वीर बन पाएगी कि वे वाकई में सिर्फ़ “जाने की सोच रहे थे” या “वास्तव में राजनीति में उतर गए हैं।”
निष्कर्ष: फिलहाल संगीत से ब्रेक, राजनीति अभी भी “संभावना” की ज़मीन पर
अभी जो स्थिति है, उसमें यह साफ है कि अरिजीत सिंह ने अपने करियर का एक बड़ा मोड़ ले लिया है – वे नई फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड नहीं करेंगे। यह फैसला खुद में बहुत बड़ा है, क्योंकि वे अभी भी अपने करियर के टॉप फेज़ में थे।
जहाँ तक राजनीति का सवाल है, वहां तस्वीर अभी धुंधली है। कुछ रिपोर्ट्स, कुछ इनसाइडर क्लेम्स और बहुत सारी अटकलें – लेकिन खुद अरिजीत का आधिकारिक, साफ–साफ हाँ/ना वाला बयान अभी गायब है।
इसलिए समझदारी इसी में है कि अभी इसे एक दिलचस्प संभावना की तरह देखें, न कि पक्के सच की तरह। अगर वे सचमुच राजनीति में आते हैं, तो यह भारतीय पब्लिक लाइफ के लिए एक बड़ा और अनोखा मोमेंट होगा – जहाँ भारत का सबसे लोकप्रिय सिंगर, अपनी ही आवाज़ की तरह, राजनीति में भी कुछ नया सुर छेड़ने की कोशिश करेगा।
तब तक, फैन्स के लिए सबसे सही रवैया यही हो सकता है कि वे उनके लिए वही सम्मान, वही मोहब्बत और वही उम्मीदें रखें – चाहे वे स्टेज पर गाना गाएँ, किसी गाँव में स्कूल बनवाएँ या संसद में खड़े होकर भाषण दें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: क्या अरिजीत सिंह ने आधिकारिक रूप से राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है?
उत्तर: नहीं, अभी तक अरिजीत सिंह ने खुद किसी पोस्ट या इंटरव्यू में राजनीति में आने या पार्टी बनाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। जो भी बातें सामने आई हैं, वे मीडिया रिपोर्ट्स और “सोर्सेज के हवाले से” कही जा रही हैं।
प्रश्न 2: अरिजीत ने प्लेबैक सिंगिंग क्यों छोड़ी?
उत्तर: अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अरिजीत ने सिर्फ़ इतना कहा कि वे अब नए प्लेबैक असाइनमेंट नहीं लेंगे और इस जर्नी को यहीं खत्म कर रहे हैं। उन्होंने इसे एक “वंडरफुल जर्नी” बताया, लेकिन कोई खास नेगेटिव वजह जैसे झगड़ा, विवाद या फ्रस्ट्रेशन का जिक्र नहीं किया।
प्रश्न 3: क्या वे 2026 वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बन सकते हैं?
उत्तर: रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संभावना फिलहाल बहुत कम मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि अगर वे राजनीति में आते भी हैं, तो पहले ग्रासरूट लेवल से शुरुआत कर सकते हैं और तुरंत बड़े चुनावों में कूदने की कोई जल्दी नहीं दिखाते।
प्रश्न 4: क्या अरिजीत किसी खास पार्टी से जुड़ सकते हैं या अपनी पार्टी बनाएंगे?
उत्तर: कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन यह भी पक्का नहीं है। अभी तक न उन्होंने किसी मौजूदा पार्टी के पक्ष में खुलकर बात की है, न अपनी पार्टी के नाम या स्ट्रक्चर के बारे में कुछ कहा है। इसलिए इसे सिर्फ शुरुआती कयास ही माना जाना चाहिए।
प्रश्न 5: अगर अरिजीत राजनीति में आते हैं, तो उनकी सबसे बड़ी ताकत क्या होगी?
उत्तर: उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका साफ–सुथरा इमेज, देश–भर में फैला जबरदस्त फैन्स बेस और अपने होमटाउन वेस्ट बंगाल के लोगों के बीच उनकी भावनात्मक पकड़ होगी। वे पहले से ही चुपचाप सोशल और लोकल काम करते रहे हैं, इसलिए अगर वे उस अनुभव और भरोसे को राजनीति के साथ जोड़ते हैं, तो उन्हें अच्छा सपोर्ट मिल सकता है – बशर्ते वे ईमानदारी और पारदर्शिता से इस पथ पर चलें।
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