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गढ़चिरोली में सड़क न होने से 9 महीने की गर्भवती महिला की मौत: 6 किमी जंगल पार कर गई थी अस्पताल

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Gadchiroli pregnant woman death
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गढ़चिरोली के एटापल्ली तहसील के आलदंडी टोला गांव में सड़क न होने से 9 महीने की गर्भवती आशा संतोष किरंगा ने 6 किमी जंगल पार किया। भाई के घर पहुंची, लेकिन 2 जनवरी को लेबर पेन से हेडरी अस्पताल ले जाते समय मां-बच्चे की मौत हो गई। जिला स्वास्थ्य अधिकारी जांच के आदेश दिए।

गर्भवती महिला का दर्दनाक सफर: गढ़चिरोली जंगल में 6 किमी ट्रेक के बाद डिलीवरी में मां-बच्चे की मौत

गढ़चिरोली का दर्दनाक हादसा: सड़क न होने से 9 महीने की गर्भवती महिला ने 6 किमी जंगल पार किया, मां-बच्चे दोनों की मौत

महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। 24 साल की आशा संतोष किरंगा, जो नौ महीने की गर्भवती थीं, अपने गांव आलदंडी टोला से सड़क न होने के कारण 6 किलोमीटर जंगल के रास्ते पैदल चलीं। 1 जनवरी को पति के साथ बहन के घर पेठा पहुंचीं, लेकिन 2 जनवरी को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हेडरी के काली अम्मल अस्पताल ले जाते समय बच्चा गर्भ में ही मर गया और आशा की भी मौत हो गई।

गांव की दुर्दशा: कोई सड़क, कोई डिलीवरी सेंटर

आलदंडी टोला एक आदिवासी बहुल गांव है, जो मुख्य सड़क से कटा हुआ है। यहां डिलीवरी या बेसिक मेडिकल सुविधा का नामोनिशान नहीं। आशा ने समय पर मदद की उम्मीद में पति के साथ जंगल पार किया। भारी पेट लिए 6 किमी का सफर उनके शरीर पर भारी पड़ा। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने पुष्टि की कि आशा आशा वर्कर के जरिए रजिस्टर्ड थीं, लेकिन पैदल चलने से जटिलताएं बढ़ीं।

अस्पताल पहुंचे, लेकिन बहुत देर हो चुकी

2 जनवरी सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। एम्बुलेंस से हेडरी के काली अम्मल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने सी-सेक्शन का फैसला लिया, लेकिन तब तक बच्चा गर्भ में मर चुका था। आशा का ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ा और वे भी चल बसीं। डॉ. शिंदे ने कहा कि डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन बचाना संभव न हुआ। तहसील स्वास्थ्य अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

गढ़चिरोली: आदिवासी इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

गढ़चिरोली महाराष्ट्र का सबसे पिछड़ा जिला माना जाता है। 80% से ज्यादा आबादी आदिवासी (गोंड, माडिया), जंगल घने। यहां सड़कें कम, बिजली-मोबाइल नेटवर्क भी सीमित। स्वास्थ्य सुविधाएं:

  • PHC दूर, सब-सेंटर कई गांवों से 10+ किमी।
  • डिलीवरी सेंटर न के बराबर।
  • एम्बुलेंस पहुंचने में घंटों लगते।

NITI आयोग रिपोर्ट: गढ़चिरोली में MMR (मातृ मृत्यु दर) राज्य औसत से दोगुनी।

इंडिकेटरमहाराष्ट्र औसतगढ़चिरोलीराष्ट्रीय औसत
MMR (प्रति लाख जीवित जन्म)4998+97
संस्थागत प्रसव (%)926578
सड़क कनेक्टिविटी (गांवों में %)987285
PHC प्रति 30,000 आबादीउपलब्धकमी

मातृ मृत्यु के प्रमुख कारण आदिवासी इलाकों में

  1. सड़क न होना: एमर्जेंसी में देरी।
  2. प्रसव पूर्व जांच की कमी: 40% महिलाएं रजिस्टर्ड लेकिन फॉलो-अप कम।
  3. पोषण अभाव: एनीमिया 70%।
  4. जटिलताएं: हाई BP, हेमरेज।

सरकार की योजनाएं: जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, 108 एम्बुलेंस, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंप्लीमेंटेशन कमजोर।

गढ़चिरोली में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत

  • जिला अस्पताल: 300 बेड, लेकिन स्पेशलिस्ट कम।
  • PHC: 40+, लेकिन स्टाफ शॉर्टेज।
  • मोबाइल मेडिकल यूनिट: चल रही, लेकिन मौसम बाधा।
  • आशा वर्कर्स: 1,500+, लेकिन ट्रेनिंग–किट की कमी।

पिछले साल 20+ मातृ मौतें। COVID के बाद सुधार, लेकिन सड़कें न बनने से समस्या बरकरार।

सरकारी प्रतिक्रिया और जांच

डॉ. शिंदे ने कहा कि रिपोर्ट आने पर जिम्मेदारी तय होगी। संभवत: तहसील स्तर पर लापरवाही। CMO ने उच्चाधिकारियों को सूचित किया। महाराष्ट्र सरकार ने आदिवासी इलाकों के लिए ‘महा आरोग्य’ योजना शुरू की, लेकिन ग्राउंड पर असर कम।

क्या बदलाव जरूरी?

  • सड़कें: PMGSY के तहत प्राथमिकता।
  • मोबाइल डिलीवरी यूनिट: जंगल में 24×7।
  • हेली सर्विस: दूर गांवों के लिए।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: प्रेग्नेंट महिलाओं का ऐप-बेस्ड मॉनिटरिंग।

NITI रिपोर्ट: 2030 तक MMR शून्य का लक्ष्य, लेकिन गढ़चिरोली जैसे इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर पहला कदम।

आशा की मौत: सिस्टम की नाकामी का आईना

आशा आशा वर्कर रजिस्टर्ड थीं, फिर भी मदद न पहुंची। ये हजारों अनाम महिलाओं की कहानी दोहराती है। गढ़चिरोली में 50% प्रसव घर पर, जोखिम भरा। सरकार को तुरंत एक्शन लेना होगा।

5 FAQs

  1. आशा संतोष किरंगा की मौत कैसे हुई?
    9 महीने गर्भवती आशा ने सड़क न होने से 6 किमी जंगल पार किया। प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सी-सेक्शन से पहले बच्चा मर गया और उनका भी।
  2. आलदंडी टोला गांव की क्या समस्या?
    मुख्य सड़क से कटा, कोई डिलीवरी सेंटर नहीं। जंगल के रास्ते ही पहुंच।
  3. जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने क्या कहा?
    आशा रजिस्टर्ड थीं, पैदल चलने से जटिलताएं बढ़ीं। तहसील अधिकारी से रिपोर्ट मांगी, जांच होगी।
  4. गढ़चिरोली में मातृ मृत्यु दर क्यों ऊंची?
    सड़क न होना, PHC दूर, पोषण कमी, स्टाफ शॉर्टेज। MMR राज्य औसत से दोगुनी।
  5. क्या सुधार हो रहे हैं?
    आशा वर्कर्स, 108 एम्बुलेंस, लेकिन इंफ्रा गैप बरकरार। PMGSY सड़कें प्राथमिकता जरूरी।

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