अलीगढ़ में मुस्लिम महिला नेत्री ने गणपति को घर में किया स्थापित, हर रोज होती है घर में पूजा
अलीगढ़ में मुस्लिम महिला नेत्री के घर गूंजी गणेश भक्ति की घंटियां, नौ दिनों तक होगा पूजन, दसवें दिन नरोरा घाट पर विसर्जन
अलीगढ़ : धार्मिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए अलीगढ़ की जानी-मानी मुस्लिम महिला नेत्री रूबी आसिफ खान ने एक बार फिर गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने घर में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की है। रोरावर थाना क्षेत्र स्थित उनके घर में जब से गणेश प्रतिमा की स्थापना हुई है, तब से लगातार घंटियों की गूंज और भजन-कीर्तन की ध्वनियां वातावरण में पवित्रता का संचार कर रही हैं। रूबी आसिफ खान का यह कदम न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुस्लिम समाज से होने के बावजूद वह वर्षों से हिन्दू त्योहारों जैसे गणेश चतुर्थी, नवरात्रे, दीपावली और रक्षाबंधन में पूरे आस्था और उत्साह के साथ भाग लेती रही हैं। उनका मानना है कि पूजा-पाठ और त्योहारों का मकसद समाज में भाईचारा और एकता कायम करना है।
नौ दिनों तक चलेगा विधिवत पूजन
गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के बाद परिवार के सदस्य और आसपास के श्रद्धालु हर दिन आरती और पूजा में शामिल हो रहे हैं। रूबी आसिफ खान ने बताया कि प्रतिमा स्थापना के बाद से ही घर का माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भर गया है। सुबह और शाम दोनों समय आरती, भजन और शंख-घंटी की आवाजें पूरे इलाके में गूंज रही हैं।उन्होंने कहा कि गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, और यही कारण है कि प्रतिमा स्थापना के बाद हर कोई आशीर्वाद लेने आता है। उनका परिवार और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मना रहे हैं।
दसवें दिन होगा नरोरा घाट पर विसर्जन
पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस गणेश महोत्सव का समापन दसवें दिन प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा। रूबी आसिफ खान ने बताया कि वह और उनका परिवार परंपरा के अनुसार नरोरा घाट पहुंचकर गणपति बप्पा का विधिवत विसर्जन करेंगे। इससे पहले पूरे मोहल्ले में भजन-कीर्तन और शोभायात्रा का आयोजन भी किया जाएगा।
वर्षों से निभा रही हैं परंपरा
रूबी आसिफ खान के घर में यह पहला अवसर नहीं है जब गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। पिछले कई वर्षों से वह गणेश पूजा, नवरात्रे, दीपावली और अन्य हिन्दू त्योहारों को अपने परिवार के साथ धूमधाम से मनाती आ रही हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाज निभाना ही नहीं बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।उनके मुताबिक, त्योहार समाज को जोड़ने का काम करते हैं, न कि बांटने का। इसलिए वह हर धर्म और संस्कृति को बराबर सम्मान देती हैं।
गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश
अलीगढ़ हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है, जहां हिन्दू और मुस्लिम समाज मिल-जुलकर रहते हैं। रूबी आसिफ खान का यह कदम उसी तहजीब की एक जीवंत मिसाल है। उन्होंने कहा कि उनके घर में पूजा-पाठ को लेकर कभी भी किसी ने एतराज नहीं जताया। बल्कि, उनके हिन्दू मित्र और पड़ोसी उनके उत्सव में शामिल होकर उन्हें और भी विशेष बना देते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की पहल से समाज में धार्मिक सहिष्णुता और आपसी भाईचारे का संदेश जाता है।
15 दिन तक नही बनता घर मे मास मीट, अंडा मछली,
रूबी आसिफ खान के द्वारा बताया गया कि भगवान गणेश की स्थापना से लेकर उनके विसर्जन तक उनके घर में मांस मीट अंडा मछली का सेवन नहीं किया जाता है। विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। किसी भी तरह की मांस मीट से संबंधित कोई भी आहार उनके यहां घर में नहीं बनाया जाता है।
कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती है रूबी आसिफ खान
रूबी आसिफ खान के द्वारा बताया गया कि जिस तरह से उनके द्वारा तमाम तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। उसको लेकर हमेशा वह कट्टरपंथियों के निशाने पर रहती है। कई बार उन्हें जान से मारने की कोशिश भी की गई है। साथ ही उनके घर में खून से लिखा हुआ पत्र भी भेजा गया। लेकिन वह आज तक नहीं डरी और उनके द्वारा लगातार पूजा अर्चना में हिस्सा लिया जाता है। कल भी गणेशजी की स्थापना को लेकर उनके घर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। लेकिन जिस तरह से पहले 9 दिन तक पुलिसकर्मी तैनात रहते अबकी बार ऐसा कुछ नहीं हुआ है। उन्हें ईश्वर पर भरोसा है।वह आगे भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।
Leave a comment