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Yoga से सुधारें अपनी सांस

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फेफड़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए योग एक कारगर उपाय है। जानें कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने वाले 5 आसनों की विधि व फायदे। Yoga for lungs in Hindi.

फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए 5 Yoga Asanas

सांस लेने की क्षमता बढ़ाएं और रहें स्वस्थ

आज के प्रदूषण भरे माहौल और तेज रफ्तार जीवनशैली में हमारे फेफड़ों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ रहा है। छोटी-छोटी सांसें, सीढ़ियां चढ़ते ही हांफ जाना, या फिर थोड़ा सा दौड़ने पर सांस फूलना… ये सभी लक्षण दर्शाते हैं कि हमारे फेफड़े अपना काम पूरी क्षमता से नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं, क्योंकि हज़ारों साल पुरानी विज्ञान-आधारित योग क्रिया हमारे फेफड़ों को फिर से मजबूत और स्वस्थ बना सकती है।

योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे आंतरिक अंगों, खासकर श्वसन तंत्र को मजबूत करने में भी बहुत कारगर है। आज हम आपको ऐसे ही 5 आसान योगासनों और प्राणायाम के बारे में बताएंगे, जिन्हें रोजाना करके आप अपने फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Capacity) बढ़ा सकते हैं और तरोताजा महसूस कर सकते हैं।

योग फेफड़ों के लिए क्यों है फायदेमंद?

योगासन और प्राणायाम हमारे श्वसन तंत्र पर इस तरह काम करते हैं:

  • फेफड़ों का विस्तार: कई आसन छाती (Chest Cavity) को खोलते हैं, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए ज्यादा जगह मिलती है।
  • श्वसन मांसपेशियों को मजबूती: डायाफ्राम और इंटरकॉस्टल मसल्स मजबूत होती हैं, जिससे सांस लेने की प्रक्रिया आसान और efficient हो जाती है।
  • ऑक्सीजन का बेहतर उपयोग: गहरी और लंबी सांस लेने का अभ्यास शरीर को ऑक्सीजन का बेहतर इस्तेमाल करना सिखाता है।
  • तनाव कम करना: तनाव सांसों को उथला और तेज बना देता है। योग तनाव कम करके सांसों को गहरा और शांत करता है।

सांसों को मजबूत बनाने वाले 5 योगासन और प्राणायाम

1. कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayama) – श्वसन तंत्र की सफाई

कपालभाति एक ऐसी शक्तिशाली सांस लेने की तकनीक है जो फेफड़ों को डिटॉक्सीफाई करने और उन्हें मजबूत बनाने का काम करती है।

विधि:

  1. सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  2. एक गहरी सांस अंदर लें।
  3. अब सांस को तेजी से नाक के जरिए बाहर छोड़ें, और पेट को अंदर की ओर खींचे।
  4. सांस अंदर अपने आप आने दें (Passive Inhalation)।
  5. इस प्रक्रिया को लगातार तेज गति से दोहराएं। शुरुआत में 30-50 बार करें, फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ाएं।

फायदे:

  • फेफड़ों में जमा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।
  • श्वसन मार्ग साफ होता है।
  • फेफड़ों और डायाफ्राम की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

2. भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika Pranayama) – फेफड़ों की ब्लैकस्मिथ

भस्त्रिका का अर्थ होता है ‘धौंकनी’। यह प्राणायाम धौंकनी की तरह तेज गति से सांस लेने-छोड़ने का अभ्यास है।

विधि:

  1. सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।
  2. एक तेज और जोरदार सांस नाक से अंदर लें और उतनी ही तेजी से सांस बाहर छोड़ें।
  3. सांस लेने और छोड़ने दोनों में बल लगाएं।
  4. इसे लगातार 10 बार करें, फिर एक गहरी सांस लें और आराम करें। ऐसे 3-5 राउंड करें।

फायदे:

  • फेफड़ों की क्षमता में तेजी से वृद्धि होती है।
  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है।
  • पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

3. भुजंगासन (Bhujangasana – Cobra Pose) – छाती का विस्तार

यह आसन छाती को पूरी तरह से खोलता है, जिससे फेफड़ों को फैलने का पूरा मौका मिलता है।

विधि:

  1. पेट के बल लेट जाएं। पैर सीधे और पंजे फर्श की ओर हों।
  2. हथेलियों को छाती के बगल में जमीन पर रखें।
  3. सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं। नाभि तक का हिस्सा जमीन से उठेगा।
  4. कोहनियां थोड़ी मुड़ी रहेंगी और कंधे कानों से दूर।
  5. 15-30 सेकंड तक इस मुद्रा में रुकें, गहरी सांसें लेते रहें।
  6. सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं।

फायदे:

  • छाती पूरी तरह खुलती है, फेफड़ों का विस्तार होता है।
  • अस्थमा जैसी समस्या में लाभकारी।
  • पोश्चर सुधरता है।

4. उष्ट्रासन (Ustrasana – Camel Pose) – फेफड़ों को दें जगह

उष्ट्रासन यानी ऊंट की मुद्रा, शरीर के अगले हिस्से को पूरी तरह से खोल देती है।

विधि:

  1. घुटनों के बल खड़े हो जाएं। घुटने कंधों की चौड़ाई जितने खुले हों।
  2. हथेलियों को कमर पर रखें।
  3. सांस लेते हुए कमर को पीछे की ओर झुकाएं और हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।
  4. सिर को पीछे झुका लें, गर्दन लंबी रखें।
  5. 20-30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें, गहरी सांसें लेते रहें।
  6. सांस छोड़ते हुए वापस आएं।

फायदे:

  • छाती और फेफड़ों को अधिकतम विस्तार मिलता है।
  • सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है।
  • तनाव दूर होता है।

5. अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom – Alternate Nostril Breathing) – श्वसन तंत्र का संतुलन

यह प्राणायाम श्वसन तंत्र को संतुलित करने और दिमाग को शांत करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।

विधि:

  1. आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं।
  2. दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नाक बंद करें और बाईं नाक से सांस अंदर लें।
  3. फिर दाएं हाथ की अनामिका (Ring Finger) से बाईं नाक बंद कर दें और अंगूठा हटाकर दाईं नाक से सांस बाहर छोड़ें।
  4. अब दाईं नाक से ही सांस अंदर लें।
  5. फिर दाईं नाक बंद करके बाईं नाक से सांस बाहर छोड़ें।
  6. यह एक चक्र हुआ। इसे 5-10 मिनट तक जारी रखें।

फायदे:

  • फेफड़े मजबूत होते हैं।
  • दिमाग शांत होता है और तनाव कम होता है।
  • शरीर के सभी नाड़ियों का संतुलन ठीक रहता है।

नियमित अभ्यास है जरूरी

इन आसनों और प्राणायाम का लाभ तभी मिलेगा जब आप इन्हें नियमित रूप से करेंगे। रोजाना सिर्फ 15-20 मिनट का समय निकालकर आप अपने फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। शुरुआत में किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में इन आसनों को सीखें। ध्यान रखें, अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो इन आसनों को करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अपनी सांसों पर ध्यान दें, क्योंकि एक गहरी सांस ही आपके स्वस्थ जीवन की नींव है।


FAQs

1. क्या अस्थमा के मरीज ये आसन कर सकते हैं?
हां, लेकिन सावधानी के साथ। प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम और भुजंगासन अस्थमा में फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, अटैक के दौरान इन्हें न करें और शुरुआत किसी एक्सपर्ट की निगरानी में ही करें।

2. इन आसनों का असर दिखने में कितना समय लगता है?
नियमित अभ्यास से 2-3 हफ्तों में ही आपको सांस लेने में आसानी और अधिक ऊर्जा महसूस होने लगेगी। फेफड़ों की क्षमता में स्थायी सुधार के लिए कम से कम 2-3 महीने का नियमित अभ्यास जरूरी है।

3. क्या ये आसन बुजुर्ग भी कर सकते हैं?
हां, बुजुर्ग भी इनमें से अधिकतर आसन कर सकते हैं, खासकर प्राणायाम। लेकिन उन्हें शरीर के लचीलेपन के अनुसार ही आसन करने चाहिए और ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए। भुजंगासन और उष्ट्रासन में विशेष सावधानी बरतें।

4. इन आसनों को करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
इन आसनों को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का है, जब पेट खाली हो। साफ-सुथरी और खुली जगह पर बैठकर करें तो ज्यादा फायदा मिलेगा।

5. क्या प्रेग्नेंसी में ये आसन सुरक्षित हैं?
प्रेग्नेंसी में प्राणायाम (बिना सांस रोके) फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन आसनों को करने से पहले डॉक्टर और योग एक्सपर्�्ट की सलाह जरूर लें। गर्भावस्था के दौरान पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसन नहीं करने चाहिए।

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