UP बांदा जेल से गैंगस्टर रवि काना 29 जनवरी 2026 को B-वारंट के बावजूद बिना कोर्ट ऑर्डर रिहा। जेलर विक्रम सिंह सस्पेंड, नोएडा कोर्ट ने शो-कॉज, पुलिस सर्च ऑन। गैंगस्टर एक्ट, B-वारंट क्या है, कैसे हुआ गड़बड़झाला, UP जेलों में ऐसे केस विस्तार से।
बिना कोर्ट ऑर्डर गैंगस्टर को छोड़ दिया, क्या बांदा जेल में भ्रष्टाचार चल रहा?
बांदा जेलर सस्पेंड: गैंगस्टर रवि काना की बिना कोर्ट ऑर्डर रिहाई का पूरा मामला
उत्तर प्रदेश की जेलों में गैंगस्टर्स को रखना हमेशा से सिरदर्द रहा है। लेकिन बांदा जेल से 29 जनवरी 2026 को जो हुआ, वो किसी बड़ी लापरवाही या भ्रष्टाचार का केस लगता है। स्क्रैप माफिया रवि काना, जिसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट चला था, को B-वारंट के बावजूद बिना किसी कोर्ट ऑर्डर के शाम को रिहा कर दिया गया।
अगले ही दिन नोएडा की CJM कोर्ट ने जेल अधीक्षक को शो-कॉज नोटिस जारी किया। फिर UP प्रिज़न्स डिपार्टमेंट ने तुरंत एक्शन लिया – जेलर विक्रम सिंह यादव को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू। अब DIG प्रिज़न्स प्रयागराज पूरी जांच कर रहा। पुलिस ने रवि काना को तलाशने के लिए कई टीमें लगाईं, लेकिन वो फरार है।
ये सिर्फ़ एक जेलर का केस नहीं, UP गैंगस्टर एक्ट के तहत लॉ एंड ऑर्डर सिस्टम पर बड़ा सवाल है। आइए स्टेप बाय स्टेप समझें – रवि काना कौन है, क्या हुआ था, B-वारंट क्या चीज़ है, जेल ने कैसे गड़बड़ की, और आगे क्या होगा।
रवि काना कौन है? स्क्रैप माफिया का आपराधिक साम्राज्य
रवि काना यानी रविंद्र सिंह एक स्क्रैप डीलर है, जिसने जबरन वसूली, धमकी और गुंडागर्दी से नोएडा–ग्रेटर नोएडा इलाके में अपना साम्राज्य खड़ा किया। 2024 में गौतम बुद्ध नगर के दनकौर थाने में केस दर्ज – गैंगस्टर एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत।
पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। अगस्त 2024 में एडमिनिस्ट्रेटिव रीज़न से गौतम बुद्ध नगर जेल से बांदा जेल ट्रांसफर कर दिया। उसके खिलाफ कई केस थे – एक्सटॉर्शन, कोर्सन, ऑर्गनाइज़्ड क्राइम। गैंग चार्ट बना, स्पेशल कोर्ट में केस।
स्क्रैप बिज़नेस की आड़ में वो छोटे व्यापारियों को लूटता, ज़मीन हड़पता। नोएडा जैसे इंडस्ट्रियल हब में ऐसे माफिया आम हैं, लेकिन रवि काना का नाम खासतौर पर चर्चा में रहा।
29 जनवरी का ड्रामा: VC पेशी, फिर शाम को रिहाई
29 जनवरी 2026 को नोएडा CJM कोर्ट में दनकौर केस की सुनवाई। IO ने रिमांड के लिए आवेदन दिया। लेकिन पुलिस गार्ड न मिलने से बांदा जेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रवि काना को पेश किया।
कोर्ट ने B-वारंट जारी किया था – यानी आरोपी को ज्यूडिशियल कस्टडी में रखना था। शाम करीब 7:45 बजे जेल को ईमेल से कस्टडी वारंट मिला। लेकिन तब तक जेलर ने रवि काना को रिहा कर दिया।
जेलर का बहाना: “सभी कस्टडी वारंट्स में रिलीज़ ऑर्डर मिल चुके थे। सिर्फ़ B-वारंट बाक़ी था। VC के बाद आगे डेट/वारंट न मिलने से रख नहीं सकते।” लेकिन कोर्ट ने इसे रिजेक्ट किया – B-वारंट था, रिमांड आवेदन था, रखना था।
30 जनवरी को CJM संजीव कुमार त्रिपाठी ने जेल अधीक्षक को शो-कॉज: “किन परिस्थितियों में रिहा किया? बिना नोटिस के?” 6 फरवरी तक जवाब मांगा।
जेलर सस्पेंड: डिपार्टमेंट का त्वरित एक्शन
31 जनवरी को UP प्रिज़न्स हेडक्वार्टर ने प्रीलिमिनरी रिपोर्ट पर जेलर विक्रम सिंह यादव को तत्काल सस्पेंड किया। विभागीय कार्यवाही शुरू। सस्पेंड पीरियड में जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन कोई दूसरा काम नहीं।
प्रयागराज DIG प्रिज़न्स डीटेल्ड जांच कर रहा। जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन।
पुलिस की तलाश: 5 टीमें लगीं, रेड्स जारी
नोएडा ADCP संतोष कुमार ने बताया – 5 टीमें बनीं। उसके ठिकानों पर रेड्स, लेकिन ट्रेस नहीं। फरार घोषित।
अभी वो कहाँ, किसके संरक्षण में – ये सवाल उठ रहे।
B-वारंट क्या होता है? गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रोसीजर
B-वारंट: कोर्ट आरोपी को पेश करने या कस्टडी के लिए जारी करता। जेल इसे मिलने पर रखती। B-वारंट पर रिहाई नहीं हो सकती जब तक कोर्ट स्पष्ट ऑर्डर न दे।
UP गैंगस्टर एक्ट 1986: ऑर्गनाइज़्ड क्राइम रोकने के लिए। गैंग चार्ट बनता, बेस केस चार्जशीट, स्पेशल कोर्ट। सेक्शन 19(4)(b) में बेल सख्त – प्राइमा फेसी केस, ग्रेविटी देखी जाती।
यहाँ B-वारंट था, VC पेशी हुई, रिमांड आवेदन – यानी रखना था। जेल ने गलत किया।
UP जेलों में ऐसे गड़बड़झाले: पुराने केस
UP में गैंगस्टर रिहाई के कई केस:
- 2024 में सहारनपुर गैंगस्टर डिजिटल अरेस्ट स्कैम से फरार।
- कई बार जेल स्टाफ पर ब्राइब के आरोप।
- गैंगस्टर एक्ट केस में 50+ गौतम बुद्ध नगर में।
बांदा जेल पहले भी न्यूज़ में – एडमिन ट्रांसफर के लिए यूज। लेकिन ये लापरवाही बड़ी।
कानूनी नतीजे: क्या सजा मिलेगी?
जेलर पर UP गवर्नमेंट सर्वेंट कंडक्ट रूल्स के तहत एक्शन। कोर्ट कंटेम्प्ट भी देख सकता।
रवि काना पकड़ा गया तो गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त सजा। फरारी पर IPC 229A।
UP लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल: क्या सुधार होंगे?
योगी सरकार ने गैंगस्टर एक्ट से 1000+ माफिया जेल में डाले। लेकिन जेल मैनेजमेंट में लूपहोल्स दिखते हैं।
सुधार सुझाव:
- डिजिटल वारंट ट्रैकिंग।
- VC पेशी के बाद ऑटो अलर्ट।
- स्टाफ ट्रेनिंग।
- थर्ड पार्टी ऑडिट।
अभी रवि काना फरार, जांच जारी। लेकिन ये केस UP प्रिज़न सिस्टम को आईना दिखाता।
FAQs
प्रश्न 1: रवि काना को बांदा जेल से कब रिहा किया गया?
उत्तर: 29 जनवरी 2026 को शाम को, नोएडा CJM कोर्ट में VC पेशी के बाद। B-वारंट था, लेकिन जेल ने बिना कोर्ट ऑर्डर रिहा कर दिया।
प्रश्न 2: कौन सस्पेंड हुआ और क्यों?
उत्तर: जेलर विक्रम सिंह यादव को 31 जनवरी को सस्पेंड किया। प्रीलिमिनरी जांच में लापरवाही पाई। विभागीय कार्यवाही शुरू, DIG प्रयागराज जांच कर रहा।
प्रश्न 3: B-वारंट क्या होता है?
उत्तर: कोर्ट आरोपी को पेश करने या कस्टडी के लिए जारी। जेल को इसे मिलने पर रखना होता, रिहा नहीं। गैंगस्टर एक्ट में सख्त।
प्रश्न 4: रवि काना के खिलाफ क्या केस?
उत्तर: 2024 में दनकौर थाने में गैंगस्टर एक्ट – एक्सटॉर्शन, कोर्सन। स्क्रैप माफिया, अगस्त 2024 में बांदा ट्रांसफर।
प्रश्न 5: पुलिस क्या कर रही?
उत्तर: नोएडा पुलिस ने 5 टीमें लगाईं। ठिकानों पर रेड्स, लेकिन फरार। कोर्ट ने 6 फरवरी तक जेल से रिपोर्ट मांगी।
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