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“मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका” – शशि थरूर का सफाईनामा

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Shashi Tharoor never deviated from party line
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी लाइन से विचलन नहीं किया। अडवाणी और मोदी पर अपने बयानों, विवादित लेखों और कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने केरल के सुल्तान बथेरी में आयोजित ‘लक्ष्य 2026’ कैम्प में खुलकर सफाई दी।

केरल चुनाव से पहले शशि थरूर का संदेश: 17 साल से कांग्रेस में, अब अचानक गलतफहमी क्यों?

शशि थरूर की सफाई: “मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका” – विवादों के बीच कांग्रेस सांसद का बड़ा बयान

कांग्रेस वर्किंग कमेटी सदस्य और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने अपने हालिया बयानों और लेखों पर मचे राजनीतिक हंगामे के बीच साफ कहा है कि उन्होंने कभी पार्टी लाइन से विचलन नहीं किया। केरल के सुल्तान बथेरी में केपीसीसी द्वारा आयोजित ‘लक्ष्य 2026’ लीडरशिप कैंप के बाद पत्रकारों से बात करते हुए थरूर ने कहा कि उनके विचारों को अक्सर अधूरी पढ़ाई और सुर्खियों के आधार पर गलत समझा गया।

उन्होंने सवाल किया, “किसने कहा कि मैं पार्टी लाइन से हट गया? जब भी मैंने अलग-अलग मुद्दों पर राय रखी, ज्यादातर मामलों में पार्टी और मेरी लाइन एक ही रही है।” थरूर का कहना है कि संसद में उन्होंने जो भी सवाल मंत्रियों से पूछे, वे एक स्पष्ट दिशा के साथ थे और पार्टी को उनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है।

मीडिया, सुर्खियां और “गलतफहमी”

थरूर ने दावा किया कि विवाद अक्सर तब पैदा होते हैं जब मीडिया केवल हेडलाइन के आधार पर रिपोर्टिंग कर देता है और पूरा लेख या पूरा बयान नहीं पढ़ा जाता। उन्होंने कहा, “जब मैं लोगों से पूछता हूं कि क्या उन्होंने वास्तव में पढ़ा है कि मैंने क्या लिखा, तो ज्यादातर लोग कहते हैं कि नहीं। पूरा टेक्स्ट पढ़ने के बाद उन्हें असल मुद्दा समझ आता है।”

उनके मुताबिक, उनकी बातों का संदर्भ काटकर पेश किया गया, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर अनावश्यक गलतफहमियां बनीं। थरूर ने यह भी दोहराया कि वे पिछले 17 साल से कांग्रेस में हैं और अपने सहयोगियों के साथ उनके संबंध अच्छे हैं, इसलिए किसी अचानक ‘गलतफहमी’ की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और “डेमोक्रेटिक” पार्टी लाइन

जब उनसे पूछा गया कि क्या विवादों की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ने के बाद हुई, तो थरूर ने कहा कि पार्टी की परंपरा हमेशा लोकतांत्रिक रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी में पहले भी कई बार आंतरिक चुनाव हो चुके हैं।

थरूर ने साफ कहा, “मैंने चुनाव लड़ा और हार गया। वह अध्याय वहीं खत्म हो गया। मुझे इसमें कोई कहानी नहीं दिखती। पार्टी के इतिहास में कई चुनाव हुए हैं, कई जीते हैं, कई हारे हैं।” उनके इस बयान का संकेत यह है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर किसी ‘लगातार नाराजगी’ या ‘अलग लाइन’ की व्याख्या वे स्वीकार नहीं करते।

एल.के. अडवाणी की तारीफ पर सफाई: “संस्कार से किया सम्मान”

हाल ही में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी के 98वें जन्मदिन पर थरूर की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के भीतर भी कुछ सवाल उठे थे। थरूर ने इसे लेकर दो टूक कहा कि यह केवल शिष्टाचार का मामला था।

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति हमें बड़ों का सम्मान करना सिखाती है, और मैंने वही किया।” यानी उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेद के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को जन्मदिन पर शुभकामना देना या सम्मान दिखाना पार्टी लाइन से विचलन नहीं माना जा सकता।

मोदी पर “प्रशंसा” का विवाद: “पूरा पोस्ट पढ़िए”

थरूर के एक अन्य बयान को लेकर भी हलचल हुई थी, जिसे मीडिया और विरोधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “तारीफ” के रूप में पेश किया। इस पर थरूर ने साफ किया कि उन्होंने केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कही गई बात को उद्धृत किया था।

थरूर ने कहा, “मैंने लोगों से पूछा कि बताइए, मैंने कहां उनकी प्रशंसा की? अगर पूरा पोस्ट पढ़ा जाए, तो साफ दिखता है कि ऐसी कोई बात नहीं है।” उनका तर्क है कि संदर्भ के बिना चुनिंदा लाइनें उठाने से उनके खिलाफ गलत नैरेटिव बना।

केरल चुनाव 2026: थरूर की प्राथमिकताएं – रोजगार, निवेश, कर्ज संकट

‘लक्ष्य 2026’ कैंप का मकसद केरल विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना है। थरूर ने यहां साफ किया कि वे केरल को ज्यादा रोजगार और निवेश की दिशा में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों के लिए लिखता और बोलता हूं जो बेहतर भविष्य की तलाश में दूसरे राज्यों और देशों में जाते हैं।” थरूर के मुताबिक, केरल को ज्यादा अवसर पैदा करने के लिए निवेश के लिए अपने दरवाजे खोलने होंगे। “केरल तभी विकसित होगा जब रोजगार के अवसर होंगे,” उन्होंने कहा और जोड़ा कि हर सेक्टर का गंभीर अध्ययन जरूरी है।

केरल की वित्तीय हालत पर थरूर की चिंता

थरूर ने राज्य की वित्तीय स्थिति को “कमजोर” बताते हुए कहा कि भारी कर्ज के कारण सरकार का बड़ा हिस्सा सिर्फ ऋण चुकाने में चला जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए पैसा कम बचता है।

उन्होंने कहा, “हमारी वित्तीय स्थिति कमजोर है और भारी कर्ज है। डेब्ट सर्विसिंग बजट का बड़ा हिस्सा विकास से छीन लेती है।” थरूर का संकेत था कि भविष्य की नीति में वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देना होगा।

कांग्रेस, UDF और 100 सीटों का टारगेट

केरल में 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर थरूर ने विश्वास जताया कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सत्ता में वापस लौटेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

कांग्रेस के 100 सीटें जीतने के अनुमान पर थरूर ने कहा कि यह दावा विपक्ष के नेता ने किया है और इसे हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रतिभा की कमी नहीं है और “कई लोग इस पद के हकदार हो सकते हैं, लेकिन हमारे यहां अंतिम फैसला विधायकों से चर्चा के बाद होता है।”

क्या थरूर केरल की राजनीति में और सक्रिय होंगे?

थरूर से जब पूछा गया कि क्या वे केरल की राजनीति में पहले से ज्यादा सक्रिय रहेंगे, तो उन्होंने याद दिलाया कि 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान भी, कोविड-19 महामारी के बावजूद, उन्होंने 56 विधानसभा सीटों में प्रचार किया था।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा विधानसभा चुनावों में कैंपेन करता रहा हूं और इस बार आप मुझे और ज्यादा सक्रिय देखेंगे।” संसद की जिम्मेदारियों के बावजूद, वे केरल में पार्टी के लिए लगातार काम करने का आश्वासन देते दिखे।

अंदरूनी आलोचना पर थरूर का जवाब: “गलतफहमी की जरूरत नहीं”

थरूर के हालिया लेखों और बयानों पर कांग्रेस के कुछ राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय नेताओं ने आलोचना की थी, जिससे यह धारणा बनी कि वे पार्टी लाइन से हट रहे हैं या ‘अपना अलग रास्ता’ खोज रहे हैं।

लेकिन थरूर ने दोहराया कि वे 17 साल से पार्टी में हैं, सहयोगियों से अच्छे संबंध रखते हैं और किसी ‘अचानक गलतफहमी’ की कोई वजह नहीं देखते। उनके मुताबिक, अगर लोग पूरे संदर्भ के साथ उनकी बात पढ़ें और सुनें तो विवाद खुद ही खत्म हो जाते हैं।

5 FAQs

  1. शशि थरूर ने क्या कहा – क्या वे पार्टी लाइन से हटे हैं?
    थरूर ने साफ कहा कि उन्होंने कभी पार्टी लाइन से विचलन नहीं किया और ज्यादातर मुद्दों पर उनकी और पार्टी की लाइन एक जैसी रही है।
  2. LK अडवाणी की तारीफ पर थरूर की सफाई क्या है?
    थरूर के अनुसार, 98वें जन्मदिन पर अडवाणी की सराहना केवल शिष्टाचार और हमारे संस्कारों के मुताबिक बड़ों का सम्मान था, न कि राजनीतिक समर्थन।
  3. नरेंद्र मोदी पर “प्रशंसा” वाले विवाद पर उन्होंने क्या कहा?
    थरूर ने कहा कि उन्होंने सिर्फ सार्वजनिक कार्यक्रम में कही गई बात को उद्धृत किया, उन्होंने खुद मोदी की तारीफ नहीं की और पूरा पोस्ट पढ़ने पर यह साफ दिखता है।
  4. क्या कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से थरूर और पार्टी के रिश्ते बदले?
    थरूर ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, उन्होंने चुनाव लड़ा और हार गए, और यह अध्याय वहीं खत्म हो गया; इसे लेकर किसी खास “कहानी” की जरूरत नहीं है।
  5. केरल 2026 चुनाव को लेकर थरूर की प्राथमिकताएं क्या हैं?
    थरूर चाहते हैं कि केरल निवेश के लिए खुला हो, ज्यादा रोजगार के अवसर बने, वित्तीय कर्ज का बोझ कम हो और UDF एकजुट होकर सत्ता में लौटे; वे खुद भी राज्य में और अधिक सक्रिय रहेंगे।
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