जादवपुर यूनिवर्सिटी में परीक्षा के दौरान दो छात्राओं से हिजाब हटाने पर इंग्लिश डिपार्टमेंट की HOD को जनवरी अंत तक लीव पर भेजा गया। बीजेपी ने इसे ममता सरकार का “सबसे निचला तुष्टिकरण” बताया, वोटबैंक पॉलिटिक्स का आरोप लगाया।
परीक्षा में हिजाब हटाने पर प्रोफेसर को लीव: बीजेपी बोली ‘ममता का वोटबैंक राज’, जादवपुर विवाद गरमाया
जादवपुर यूनिवर्सिटी हिजाब विवाद: प्रोफेसर को लीव, बीजेपी ने ममता सरकार पर तुष्टिकरण का तीखा हमला
जादवपुर यूनिवर्सिटी में 22 दिसंबर को हुई एक घटना ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इंग्लिश डिपार्टमेंट की हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) प्रोफेसर सासवती हालदार को परीक्षा के दौरान दो छात्राओं से हिजाब हटाने को कहा था, जिसके बाद उन्हें जनवरी अंत तक लीव पर भेज दिया गया। बीजेपी ने इसे ममता बनर्जी सरकार का “सबसे निचला तुष्टिकरण” बताते हुए तीखा हमला बोला।
घटना का पूरा विवरण
22 दिसंबर को इंग्लिश डिपार्टमेंट की परीक्षा के दौरान प्रोफेसर सासवती हालदार ने दो हिजाब पहने छात्राओं को संदेह होने पर पहचान सत्यापित करने के लिए हिजाब थोड़ी देर के लिए हटाने को कहा। यह परीक्षा हॉल में चीटिंग रोकने के लिए स्टैंडर्ड प्रक्रिया मानी जाती है।
इसके बाद छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन शुरू कर दिया। कुछ ने इसे “इस्लामोफोबिया” का मामला बताते हुए प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यूनिवर्सिटी ने 5 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाई, जिसकी सिफारिश पर प्रोफेसर हालदार को जनवरी अंत तक लीव पर भेज दिया गया। यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह लीव उन्होंने खुद पर्सनल कारणों से ली है, लेकिन सोर्सेज बताते हैं कि छात्र प्रदर्शनों के दबाव में यह कदम उठाया गया।
बीजेपी का तीखा हमला: “तुष्टिकरण का सबसे निचला स्तर”
बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर ममता सरकार पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी का तुष्टिकरण अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। जादवपुर यूनिवर्सिटी की इंग्लिश प्रोफेसर को ड्यूटी निभाने के लिए लीव पर भेज दिया गया। उनकी गलती? परीक्षा के दौरान पहचान चेक करने के लिए छात्रा से हिजाब हटाने को कहना – जो परीक्षा हॉल की स्टैंडर्ड प्रक्रिया है।”
मालवीय ने आगे कहा, “संस्थागत नियमों, अकादमिक अखंडता और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा के बजाय ममता सरकार ने वोटबैंक पॉलिटिक्स चुना। यह धर्मनिरपेक्षता नहीं, बल्कि सामान्य बुद्धि और यूनिवर्सिटी स्वायत्तता का समर्पण है। पहचान सत्यापन को ‘आपत्तिजनक’ बनाना और शिक्षकों को नियम पालन के लिए सजा देना – संदेश साफ है: तुष्टिकरण पहले, शिक्षा और निष्पक्षता बाद में।”
बीजेपी का तर्क: परीक्षा नियमों का पालन
बीजेपी नेताओं का कहना है कि परीक्षा हॉल में पहचान सत्यापित करना हर यूनिवर्सिटी और परीक्षा केंद्र का नियम है। यह सुरक्षा और चीटिंग रोकने के लिए जरूरी है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार ने छात्र प्रदर्शनों के दबाव में यूनिवर्सिटी ऑटोनॉमी को कुर्बान कर दिया।
TMC का रुख: अभी चुप्पी, लेकिन संभावित बचाव
तृणमूल कांग्रेस ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन पार्टी के समर्थक इसे “छात्र अधिकारों” और “धार्मिक संवेदनशीलता” का मामला बता रहे हैं। ममता सरकार पहले भी यूनिवर्सिटी मामलों में छात्र आंदोलनों के प्रति सहानुभूति दिखा चुकी है।
जादवपुर यूनिवर्सिटी का बैकग्राउंड
जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था है, जो अक्सर राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहती है। 2023-24 में UGC नियमों और गवर्नर बनाम वीसी विवाद में भी चर्चा में रही। हिजाब जैसे मुद्दे कर्नाटक और अन्य राज्यों के बाद अब बंगाल पहुंचे।
विवाद के केंद्र में प्रोफेसर सासवती हालदार
प्रोफेसर हालदार इंग्लिश डिपार्टमेंट की HOD हैं। उनका कहना है कि उन्होंने स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल फॉलो किया था। लेकिन छात्रों ने इसे “धार्मिक भेदभाव” का मामला बना दिया। फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने दोनों पक्ष सुने और लीव की सिफारिश की।
| पक्ष | दावा |
|---|---|
| प्रोफेसर/यूनी | ID वेरिफिकेशन स्टैंडर्ड प्रक्रिया, चीटिंग रोकना। |
| छात्र | हिजाब हटाना अपमानजनक, इस्लामोफोबिया। |
| बीजेपी | तुष्टिकरण, वोटबैंक पॉलिटिक्स। |
| TMC (अनुमानित) | छात्र अधिकार, संवेदनशीलता। |
राजनीतिक कोण: 2026 चुनाव से पहले सियासत
यह विवाद 2026 बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। बीजेपी इसे ममता सरकार के “मुस्लिम तुष्टिकरण” का मुद्दा बना रही है। TMC इसे “शिक्षा स्वायत्तता” या “छात्र अधिकार” के रूप में पेश कर सकती है। हिजाब विवाद कर्नाटक (2022) के बाद अब बंगाल में।
कानूनी और सामाजिक सवाल
– क्या परीक्षा में हिजाब हटाना संविधानिक है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा/पहचान के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
– यूनिवर्सिटी ऑटोनॉमी vs राज्य दखल: UGC नियमों के तहत राज्य हस्तक्षेप सीमित।
– छात्र प्रदर्शन: जादवपुर का इतिहास आंदोलनों का रहा है।
5 FAQs
- जादवपुर विवाद कैसे शुरू हुआ?
22 दिसंबर को इंग्लिश एग्जाम में प्रोफेसर ने दो हिजाब पहने छात्राओं से पहचान चेक के लिए हिजाब हटाने को कहा, जिसे चीटिंग संदेह बताया। - प्रोफेसर सासवती हालदार को क्या हुआ?
फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी की सिफारिश पर जनवरी अंत तक लीव पर भेज दिया गया; यूनिवर्सिटी का कहना है खुद लीव ली। - बीजेपी ने क्या आरोप लगाया?
BJP IT हेड अमित मालवीय ने इसे ममता सरकार का “सबसे निचला तुष्टिकरण” बताया, वोटबैंक पॉलिटिक्स और अकादमिक अखंडता पर हमला कहा। - छात्रों का पक्ष क्या है?
छात्रों ने प्रदर्शन कर प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई मांगी, इसे “इस्लामोफोबिया” और अपमान बताया। - परीक्षा में हिजाब हटाना वैध है?
हां, परीक्षा हॉल में ID वेरिफिकेशन स्टैंडर्ड प्रक्रिया है, चीटिंग रोकने के लिए; कोर्ट ने सुरक्षा के लिए प्रतिबंधों को मंजूर किया है।
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