धनबाद । रविवार को सिजुआ के कतरास क्लब में संघ के शताब्दी वर्ष पर सामाजिक सद्भाव बैठक संपन्न हुई। जिसमें 23 स्थानों से 38 जाति बिरादरियों के 127 प्रमुखों के साथ मुस्लिम समुदाय के भी प्रतिनिधि ने भाग लिया।बैठक की शुरुआत में सभी जाति बिरादरियों के प्रमुखों से मंतव्य लिया गया कि जब समाज, राष्ट्रहित की बात हो तो हम सभी को क्या करना चाहिए? जिस विषय पर बारी -बारी से एक स्वर में सभी ने कहा कि जब हमारे सामने समाज और देश की बात आए तो जाति – धर्म से ऊपर उठकर समाज और देश के बारे में सोचना चाहिए।सभी को कदम से कदम मिलाकर इस दिशा में कार्य करना चाहिए।सभी जाति बिरादरियों के लोगों ने अपनी अपनी जाति समाज के बीच चल रहे सकारात्मक कार्य को भी बताया ताकि एक दूसरी जाति के लोगों को इससे प्रेरणा और बल मिल सके।
मौके पर बोकारो से आए मुख्य बौद्धिककर्ता नरेंद्र राय ने कहा कि कर्म के आधार पर समाज को वर्ग में बांटा गया था। हमारे समाज में कभी भी भेद नहीं रहा,पर गुलामी के कालखंड में समाज को बांटने का प्रयास किया गया। हमारे समाज के महर्षि वाल्मीकि ने भी ज्ञान प्राप्त करके सर्वव्यापी हुए।जिनके आश्रम में माता सीता को आश्रय मिला तथा उनके पुत्र का भी जन्म एवं उन्हें शिक्षा उनके आश्रम में ही मिली। ऐसे उदाहरण हमारे ग्रंथो में भरे पड़े हैं। राज परिवार की मीराबाई जो तथाकथित दलित कहे जाने वाले संत रविदास की शिष्या बनी।
बैठक के मध्य सद्भावना चाय एवं अंत में सामूहिक भोजन की भी व्यवस्था थी।बैठक का उद्देश्य जाति, भाषा, क्षेत्र से ऊपर उठकर समाज देशहित के लिए सामूहिक प्रयास जिससे देश तोड़ने वाले षड्यंत्रकारी असफल हो सके।
बैठक में विभाग बौद्धिक प्रमुख नरेंद्र राय, विभाग सह कार्यवाह पंकज सिंह, नगर के चंदन गुप्ता, सामाजिक सद्भाव के कृष्ण चौधरी, समरसता के अमरेश चौधरी, चंद्रभान प्रसाद, रविंद्र यादव, प्रकाश हाड़ी, बुधई ठाकुर, अश्वनी वर्मा सुनील शर्मा शिव प्रसाद महतो, राजू तांती सुरेश महतो, सुरेश चौहान राजू मंडल दीपेश चौहान अनिल बर्नवाल शिवप्रसाद वर्मा किशोर मोदी विनोद रजवार, कामता नोनिया संजय दुसाद, रौनक सिन्हा एवं अन्य काफी संख्या में लोग मौजूद रहें।
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