विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग में कहा कि दुनिया की वोलेटिलिटी में “डि-रिस्किंग” काफी नहीं, भारत-EU करीब आ रहे हैं। 2026 में यूरोप से रिश्ते ऊंचाई पर, FTA एडवांस स्टेज में। डिजिटल इंफ्रा, स्पेस, एक्सपोर्ट पर फोकस।
जयशंकर का यूरोप विजन: डिजिटल इंफ्रा, स्पेस, एक्सपोर्ट पर फोकस – 2026 में रिश्ते ऊंचाई पर
जयशंकर का 2026 प्रेडिक्शन: “डि-रिस्किंग काफी नहीं, भारत-EU गहरे दोस्ती की ओर बढ़ रहे”
लक्जमबर्ग में भारतीय समुदाय से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया की अस्थिरता और अनिश्चितता के बीच भारत और यूरोप के रिश्ते 2026 में तेजी से नजदीक आएंगे। उन्होंने “डि-रिस्किंग” (जोखिम कम करने) को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि देश अब “गहरी दोस्ती और मजबूत साझेदारी” की तलाश कर रहे हैं।
जयशंकर ने “बेहद आत्मविश्वास के साथ” भविष्यवाणी की कि 2026 यूरोप के साथ भारत के रिश्तों में उछाल लाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से यूरोप पर समय, ऊर्जा और ध्यान का निवेश बढ़ेगा। यह बयान लक्जमबर्ग दौरे के दौरान आया, जहां उन्होंने PM लुक फ्रीडन, FM जेवियर बेटेल और ग्रैंड ड्यूक गिलॉम V से मुलाकात की।
“डि-रिस्किंग” से आगे: गहरी साझेदारी की जरूरत
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में हर देश और क्षेत्र अपने हितों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। पहले जोखिम कम करने (de-risking) पर फोकस था, अब सवाल उठ रहा है कि किन देशों–रिश्तों पर ज्यादा भरोसा किया जा सकता है। “आज का कॉमन सेंस भारत और EU को बहुत करीब ला रहा है।”
उन्होंने लक्जमबर्ग को EU के साथ भारत के रिश्ते बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया। ब्रुसेल्स में सामूहिक निर्णय लेने में लक्जमबर्ग का प्रभाव बड़ा है और वहां से पूर्ण आश्वासन मिला कि भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) एडवांस स्टेज में है।
लक्जमबर्ग दौरा: राजनीतिक, बिजनेस, टेक्नोलॉजी पर फोकस
जयशंकर ने X पर पोस्ट कर कहा कि लक्जमबर्ग के साथ राजनीतिक, बिजनेस और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में साझेदारी गहरी हो रही है। भारतीय डायस्पोरा का योगदान सराहनीय। उन्होंने भारतीय समुदाय को धन्यवाद दिया और कहा कि लक्जमबर्ग में सभी बैठकों में भारतीयों की तारीफ सुनने को मिली।
भारत के बदलते चेहरे पर चर्चा: डिजिटल, स्पेस, एक्सपोर्ट
जयशंकर ने कहा कि भारत अब “बहुत ज्यादा और बहुत अलग” तरीके से काम कर रहा है। चर्चाओं में भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेस इंडस्ट्री का उछाल प्रमुख रहे। लक्जमबर्ग के अपने सैटेलाइट क्षमताओं का सम्मान करते हुए जयशंकर ने कहा कि वे भारत की प्रगति को ट्रैक कर रहे हैं।
FTA चुनौतियां: टैरिफ से आगे स्टैंडर्ड्स और पेपरवर्क
FTA पर सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि टैरिफ तो एक हिस्सा हैं, लेकिन स्टैंडर्ड्स (जैसे चावल में रेसिड्यू), पेपरवर्क और नियम–कानून बड़ी दीवार हैं। “कभी टैरिफ बाधा, कभी ये रूल्स और रेगुलेशंस।”
उन्होंने कहा कि ये डील्स जटिलताओं की वजह से लंबे समय लेती हैं – पिछले 10-20 साल के एक्सपीरियंस देखे जाते हैं। भारत अब एक्सपोर्ट को पुश कर रहा है और 2025 की टैरिफ अस्थिरता के बावजूद निर्यात बेहतर रहा। हाल ही में ओमान और न्यूजीलैंड के साथ FTA साइन/फाइनलाइज किए। “हर छोटा समझौता भी कुछ न कुछ जोड़ता है।”
भारतीय समुदाय की ताकत
जयशंकर ने लक्जमबर्ग में भारतीय समुदाय की छवि और योगदान पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि आपकी वजह से ही रिश्ते मजबूत हो रहे हैं और आगे ले जाएंगे। “शायद आपको मुझे सलाह भी देनी पड़े।”
लक्जमबर्ग यात्रा: पहले दिन की उपलब्धियां
– PM लुक फ्रीडन से विस्तृत चर्चा।
– FM जेवियर बेटेल से लंबी बात।
– ग्रैंड ड्यूक गिलॉम V से मुलाकात।
– “बहुत प्रोडक्टिव और संतुष्टिदायक दिन।”
भारत-EU रिश्ते: 2026 में उछाल क्यों?
जयशंकर के अनुसार:
– डिजिटल इंफ्रा और स्पेस में भारत की तेज प्रगति।
– FTA जैसे ट्रेड डील्स एडवांस स्टेज।
– वोलेटाइल वर्ल्ड में “ट्रस्टेड पार्टनर्स” की तलाश।
– लक्जमबर्ग जैसे देशों का EU में प्रभाव।
FTA चुनौतियों की तालिका
| चुनौती | विवरण | जयशंकर का समाधान |
|---|---|---|
| टैरिफ | उच्च दरें | नेगोशिएशन |
| स्टैंडर्ड्स | रेसिड्यू, क्वालिटी | अनुभव आधारित सुधार |
| पेपरवर्क | जटिल फॉर्म्स | प्रोसेस सरलीकरण |
| रेगुलेशंस | अनुपालन बाधाएं | लॉन्ग-टर्म डेटा रिव्यू |
भारत के हालिया FTA
– ओमान: पिछले महीने साइन।
– न्यूजीलैंड: फाइनलाइज।
– EU: एडवांस स्टेज।
– निर्यात 2025 में उम्मीद से बेहतर।
5 FAQs
- जयशंकर ने 2026 के लिए क्या भविष्यवाणी की?
2026 में भारत-यूरोप रिश्ते में उछाल आएगा, भारत की ओर से ज्यादा समय-ऊर्जा लगेगी। - “डि-रिस्किंग” से आगे क्या जरूरी?
जयशंकर के अनुसार, दुनिया में जोखिम कम करने से आगे बढ़कर “गहरी दोस्ती और मजबूत साझेदारी” बनानी चाहिए। - भारत-EU FTA की स्थिति क्या है?
एडवांस स्टेज में, लक्जमबर्ग ने ब्रुसेल्स में समर्थन का पूर्ण आश्वासन दिया। - लक्जमबर्ग यात्रा में क्या हुआ?
PM फ्रीडन, FM बेटेल, ग्रैंड ड्यूक से मुलाकातें; डिजिटल, स्पेस, ट्रेड पर चर्चा। - FTA में मुख्य बाधाएं क्या हैं?
टैरिफ के अलावा स्टैंडर्ड्स (रेसिड्यू), पेपरवर्क और रेगुलेशंस, जिन्हें अनुभव से हल करना पड़ता है।
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