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गांधीनगर से मजबूत संदेश: मोदी और मर्झ ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का लिया संकल्प

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India Germany terrorism, Modi Merz joint press meet
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पीएम नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्झ के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और जर्मनी आतंकवाद को मानवता के लिए खतरा मानते हैं और मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।

भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में बड़ा फोकस: आतंकी नेटवर्क, फंडिंग और सेफ हेवन पर संयुक्त वार

भारत और जर्मनी ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी संयुक्त लड़ाई को एक बार फिर बेहद स्पष्ट संदेश के साथ दुनिया के सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्झ के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि भारत और जर्मनी इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है और दोनों देश मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।​

मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं और आज की मुलाकात ने इस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि बातचीत में रक्षा और सुरक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, हरित ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और वैश्विक आतंकवाद जैसे मुद्दे केंद्र में रहे, लेकिन दोनों नेताओं ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए जरूरी है।​

मोदी-मर्झ की मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी हमले, चरमपंथ और हिंसक उग्रवाद की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। संयुक्त बयान में भारत और जर्मनी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 2025 के आतंकी हमले और दिल्ली में नवंबर 2025 की आतंकी घटना का कठोर शब्दों में जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरी दुनिया के लिए चेतावनी हैं और इनके खिलाफ सामूहिक एवं समन्वित कार्रवाई की जरूरत है।​

दोनों देशों ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि वे आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हैं, चाहे वह किसी भी कारण, विचारधारा, धर्म या क्षेत्र के नाम पर किया गया हो। भारत और जर्मनी ने यह भी दोहराया कि सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism) सहित किसी भी प्रकार के आतंकी कृत्य को किसी भी तरह का औचित्य नहीं दिया जा सकता और न ही उसे राजनीतिक या कूटनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।​

संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी न सिर्फ राजनीतिक स्तर पर बल्कि संस्थागत स्तर पर भी आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और गहरा करेंगे। दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह ऑन काउंटर-टेररिज्म (Joint Working Group on Counter-Terrorism) की प्रगति का स्वागत किया, जिसके माध्यम से लंबे समय से आतंकी नेटवर्क, फंडिंग चैनल, ऑनलाइन रैडिकलाइजेशन और सीमा पार आतंकी गतिविधियों पर जानकारी और अनुभव साझा किए जा रहे हैं।​

भारत और जर्मनी ने यह भी दोहराया कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आतंकवाद के खिलाफ व्यापक, संतुलित और समन्वित वैश्विक प्रयासों का समर्थन करते हैं। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध आतंकी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया और कहा कि सभी देशों को ऐसे तत्वों के खिलाफ बिना किसी दोहरे मानदंड के कार्रवाई करनी चाहिए।​

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि भारत और जर्मनी आतंकवादी संगठनों को मिलने वाले वित्तीय समर्थन, हवाला नेटवर्क, फंडिंग चैनलों और साइबर माध्यम से होने वाले फंड कलेक्शन पर रोक लगाने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके लिए दोनों देश अपने-अपने वित्तीय खुफिया इकाइयों (Financial Intelligence Units), गृह मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ाएंगे, ताकि संदिग्ध लेनदेन, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली फंडिंग और नकली चैरिटी संगठनों के नेटवर्क पर प्रभावी हमला किया जा सके।​

भारत और जर्मनी के बीच सुरक्षा सहयोग का दायरा सिर्फ आतंकवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा साझेदारी, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और हाई-टेक डिफेंस प्लेटफॉर्म्स पर सहयोग भी शामिल है। दोनों देशों ने हाल ही में रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप को आगे बढ़ाने, पनडुब्बी सहयोग, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और उन्नत तकनीक पर मिलकर काम करने की दिशा में महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे आतंकवाद और अवैध गतिविधियों के खिलाफ क्षमता निर्माण भी मजबूत होगा।​

मोदी और मर्झ ने इस बात पर भी सहमति जताई कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए वैचारिक मोर्चा (ideological front) भी उतना ही जरूरी है जितना सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मोर्चा। दोनों नेताओं ने ज़ोर दिया कि युवाओं को रैडिकल विचारधाराओं से बचाने, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चलने वाले नफरती अभियान और ऑनलाइन प्रोपेगेंडा को रोकने के लिए शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और काउंटर-नैरेटिव तैयार करने में भी भारत और जर्मनी मिलकर काम करेंगे।​

भारत की ओर से यह भी संदेश दिया गया कि देश लगातार इस सिद्धांत पर कायम है कि किसी भी समस्या का दीर्घकालिक समाधान शांतिपूर्ण और संवाद-आधारित तरीकों से ही संभव है। मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा कि भारत हमेशा से सभी मुद्दों और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की पैरवी करता आया है और वैश्विक शांति, कानून के शासन और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए मिलकर काम करना आज की दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत है।​

भारत और जर्मनी दोनों ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए दीर्घकाल से प्रयासरत हैं और दोनों देशों ने फिर से यह दोहराया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों, खासकर आतंकवाद और उग्रवाद से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में व्यापक सुधार आवश्यक हैं। संयुक्त बयान में सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार और टेक्स्ट-आधारित वार्ताओं को आगे बढ़ाने की अपील की गई।​

नीचे दी गई तालिका में भारत–जर्मनी आतंकवाद-विरोधी सहयोग के कुछ प्रमुख बिंदुओं को संक्षेप में दिखाया गया है:

भारत–जर्मनी आतंकवाद-विरोधी सहयोग: प्रमुख बिंदु

पहल/क्षेत्रमुख्य बिंदु
राजनीतिक प्रतिबद्धतादोनों देशों द्वारा आतंकवाद को “पूरी मानवता के लिए खतरा” माना जाना और सभी रूपों में उसकी कड़ी निंदा। ​
संयुक्त कार्य समूह (JWG-CT)काउंटर-टेररिज्म पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से नियमित बातचीत, जानकारी साझा करना और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान। ​
UN 1267 समिति सहयोगUN 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, फंडिंग और सेफ हेवन खत्म करने का संकल्प। ​
हाल के आतंकी हमलों की निंदापहलगाम (जम्मू-कश्मीर) और दिल्ली की हालिया आतंकी घटनाओं की संयुक्त निंदा और पीड़ितों के प्रति संवेदना। ​
रक्षा और सुरक्षा सहयोगरक्षा औद्योगिक रोडमैप, पनडुब्बी, काउंटर-ड्रोन और उन्नत तकनीक में सहयोग के जरिए समग्र सुरक्षा क्षमता में वृद्धि। ​

मोदी-मर्झ की इस मुलाकात ने साफ संकेत दिया है कि भारत और जर्मनी आने वाले वर्षों में आतंकवाद-विरोधी सहयोग को अपनी रणनीतिक साझेदारी का एक केंद्रीय स्तंभ बनाना चाहते हैं। दोनों देशों ने न सिर्फ दोतरफा स्तर पर बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर भी संयुक्त रूप से काम करने, आतंकी संगठनों पर दबाव बढ़ाने और ऐसी ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े रहने की प्रतिबद्धता दोहराई है।​

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

  1. पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ आतंकवाद पर क्या मुख्य बात कही?
    पीएम मोदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और जर्मनी इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है और दोनों देश मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।​
  2. भारत और जर्मनी का आतंकवाद-विरोधी सहयोग किन स्तरों पर चल रहा है?
    दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्य समूह ऑन काउंटर-टेररिज्म, खुफिया और कानूनी सहयोग, UN 1267 समिति के तहत प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और हाल के आतंकी हमलों की संयुक्त निंदा जैसे कई स्तरों पर सहयोग हो रहा है।​
  3. संयुक्त बयान में किन आतंकी हमलों का जिक्र किया गया?
    संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 2025 के आतंकी हमले और 2025 में दिल्ली में हुई आतंकी घटना का जिक्र करते हुए उनकी कड़ी निंदा की गई और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई।​
  4. UN 1267 प्रतिबंध समिति के संदर्भ में भारत–जर्मनी ने क्या कहा?
    दोनों देशों ने कहा कि वे संयुक्त रूप से UN 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल आतंकी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए काम करेंगे और सभी देशों से ऐसे तत्वों के सेफ हेवन, फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर खत्म करने की अपील की।​
  5. आतंकवाद के अलावा सुरक्षा सहयोग के और कौन से क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं?
    भारत और जर्मनी रक्षा औद्योगिक सहयोग, पनडुब्बियों, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल संवाद और उन्नत रक्षा तकनीक में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे कुल मिलाकर दोनों देशों की सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी।
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