Home देश जयशंकर का अमेरिका दौरा: क्रिटिकल मिनरल गेम में भारत की कितनी बड़ी चाल?
देश

जयशंकर का अमेरिका दौरा: क्रिटिकल मिनरल गेम में भारत की कितनी बड़ी चाल?

Share
S Jaishankar US visit,
Share

विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते अमेरिका जाएंगे, जहां वे 4 फरवरी को US के क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल में शामिल होकर सप्लाई चेन, डिफेंस और नई साझेदारी पर अहम बातचीत करेंगे।

क्रिटिकल मिनरल्स से डिफेंस फ्रेमवर्क तक: जयशंकर का US मिशन भारत के लिए कितना अहम?

एस. जयशंकर का अमेरिका दौरा: क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस फ्रेमवर्क और भारत–अमेरिका रिश्तों की नई दिशा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन सिक्योरिटी और डिफेंस साझेदारी को लेकर बड़ी हलचल दिख रही है। वॉशिंगटन DC में होने वाली US की पहली Critical Minerals Ministerial में भारत की मौजूदगी सिर्फ एक डिप्लोमैटिक इवेंट नहीं, बल्कि आने वाले सालों की आर्थिक और रणनीतिक दिशा को संकेत दे रही है।

जयशंकर का अमेरिका दौरा – मुख्य एजेंडा क्या है?

सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे और 4 फरवरी को US Secretary of State मार्को रुबियो द्वारा आयोजित पहले Critical Minerals Ministerial में हिस्सा लेंगे। यह बैठक US स्टेट डिपार्टमेंट में होगी, जहां दुनिया के कई प्रमुख देश क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने पर चर्चा करेंगे। US स्टेट डिपार्टमेंट ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि 4 फरवरी को रुबियो दुनिया भर के पार्टनर्स का स्वागत करेंगे और फोकस विश्वसनीय, लचीली क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन पर होगा, जो अमेरिका की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, टेक्नोलॉजिकल लीडरशिप और ऊर्जा बदलाव के लिए जरूरी है।

क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्ट्रियल क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

Critical Minerals Ministerial मूल रूप से एक उच्चस्तरीय वैश्विक बैठक है, जिसमें वे देश हिस्सा लेते हैं जो बैटरी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल, विंड एनर्जी, सेमीकंडक्टर, और एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स जैसी टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी खनिजों पर निर्भर हैं। इन क्रिटिकल मिनरल्स में मुख्य रूप से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर-अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन वर्तमान में US Geological Survey द्वारा सूचीबद्ध 30 क्रिटिकल मिनरल्स में अग्रणी उत्पादक है और रेयर अर्थ प्रोसेसिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा उसके पास है। ऐसे में भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश सप्लाई चेन को विविध बनाने और चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

US स्टेट डिपार्टमेंट ने साफ कहा है कि क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करना अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, टेक्नोलॉजिकल लीडरशिप और ऊर्जा ट्रांजिशन के लिए बेहद अहम है। यही एजेंडा भारत के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले वर्षों में भारत की EV, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और सोलर मिशन प्लान बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं।

स्कॉट बेसेन्ट की फाइनेंस मिनिस्ट्रियल और पहले की तैयारी

कुछ ही दिनों पहले US Treasury Secretary स्कॉट बेसेन्ट ने वॉशिंगटन में एक हाई-लेवल Finance Ministerial आयोजित की थी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया और UK जैसे देशों के वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस मीटिंग का फोकस भी क्रिटिकल मिनरल्स के सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने और खास तौर पर रेयर-अर्थ एलिमेंट्स से जुड़ी कमजोरियों को दूर करने पर था। भारत की तरफ से रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रतिनिधित्व किया, जो इस बात का संकेत है कि सरकार क्रिटिकल मिनरल्स को केवल विदेश नीति नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी रणनीति के बड़े हिस्से के रूप में देख रही है।

भारत–अमेरिका क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी में भारत की भूमिका

भारत के पास कुछ क्रिटिकल मिनरल्स के सीमित लेकिन महत्वपूर्ण भंडार हैं, जैसे लिथियम के नए रिजर्व जम्मू-कश्मीर में खोजे गए हैं। दूसरी ओर, भारत खुद एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है – मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और सोलर मैन्युफैक्चरिंग में। ऐसे में भारत के लिए दोहरी रणनीति बनती है:

  • विदेशी स्रोतों से विश्वसनीय और विविध सप्लाई की व्यवस्था करना
  • अपने घरेलू रिजर्व का सुरक्षित और पर्यावरण-संतुलित दोहन करना

अमेरिका के नजरिए से भारत एक भरोसेमंद डेमोक्रेटिक पार्टनर है, जो Indo-Pacific में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसीलिए Critical Minerals Ministerial में भारत की मौजूदगी सिर्फ खनिजों की चर्चा नहीं, बल्कि एक बड़े स्ट्रैटेजिक मेसेज की तरह है।

जैशंकर–रुबियो समीकरण और स्ट्रेन्ड टाईज़ की मरम्मत

रिपोर्ट्स के अनुसार, जेईएम जयशंकर और US Secretary of State मार्को रुबियो के बीच 13 जनवरी को फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें फरवरी में संभावित बैठक को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद औपचारिक निमंत्रण भेजा गया। कई विश्लेषकों के मुताबिक, यह केवल एक मल्टीलेटरल मीटिंग नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच हाल के तनावों को पिघलाने का मौका भी है, जिसमें ट्रेड टैरिफ, मानवाधिकार, और रूस संबंधी मुद्दे शामिल रहे हैं।

US Ambassador सर्जियो गोर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि भारत को Pax Silica नामक US-नेतृत्व वाले स्ट्रेटेजिक इनिशिएटिव में शामिल करने की योजना है, जो सिलिका और अन्य क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन को लेकर काम कर सकता है। इस तरह जयशंकर–रुबियो मीटिंग में मिनरल्स के अलावा ट्रेड, न्यूक्लियर, डिफेंस और इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की संभावना है।

10 साल की मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क एग्रीमेंट का संदर्भ

हाल ही में भारत और अमेरिका ने “Framework for the US–India Major Defence Partnership” नाम से 10 साल का डिफेंस फ्रेमवर्क समझौता साइन किया है। यह समझौता 31 अक्टूबर 2025 को कुआलालंपुर में हुई मीटिंग के दौरान फाइनल हुआ, जिसमें भारत के रक्षा मंत्री और उनके अमेरिकी समकक्ष ने हिस्सेदारी की। इस फ्रेमवर्क का मकसद अगले दशक तक डिफेंस संबंधों को नीति स्तर पर स्थिर दिशा देना, टेक्नोलॉजी शेयरिंग बढ़ाना और जॉइंट ऑपरेशन्स व एक्सरसाइज़ को मजबूत करना है।

इसी एग्रीमेंट के संदर्भ में 27 जनवरी को US Congressional Delegation, जिसकी अगुवाई House Armed Services Committee के चेयरमैन माइक रॉजर्स कर रहे थे, ने दिल्ली में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। उनके साथ US राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद थे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने 10 साल की डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत डिफेंस इंडस्ट्री कोऑपरेशन और मिलिट्री टाईज़ को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।

भारत–अमेरिका डिफेंस संबंधों की पृष्ठभूमि

पिछले एक दशक में भारत–अमेरिका डिफेंस रिलेशन बहुत तेजी से आगे बढ़े हैं। LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement), COMCASA, BECA जैसे महत्वपूर्ण समझौते पहले ही दोनों देशों के बीच हो चुके हैं। US ने भारत को Major Defence Partner और Strategic Trade Authorization (STA-1) जैसा स्टेटस दिया है। अब नया 10 साल का फ्रेमवर्क इन सभी पिलर्स को एक लंबे समय की स्ट्रेटेजिक दिशा देता है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, जॉइंट एक्सरसाइज़, और डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन इंटीग्रेशन में तेजी आने की उम्मीद है।

जयशंकर के दौरे का डिफेंस एंगल

भले ही आधिकारिक रूप से जयशंकर का दौरा Critical Minerals Ministerial के लिए है, परंतु डिफेंस और सिक्योरिटी एजेंडा इससे अलग नहीं रहेगा। हाल के हफ्तों में:

  • 10 साल की डिफेंस फ्रेमवर्क डील साइन हुई,
  • US Congress डेलिगेशन ने दिल्ली में डिफेंस इंडस्ट्री सहयोग पर चर्चा की,
  • और US की तरफ से Indo-Pacific में चीन की बढ़ती सक्रियता पर चिंता जताई गई।

ऐसे में संभावना है कि जयशंकर और रुबियो के बीच मीटिंग में डिफेंस कोऑपरेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और जॉइंट प्रोजेक्ट्स जैसे फाइटर जेट इंजन, नेवल प्लेटफॉर्म या डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी बात आगे बढ़ सकती है।

क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस – कनेक्शन क्या है?

क्रिटिकल मिनरल्स सिर्फ EV बैटरी या सोलर पैनल के लिए नहीं, बल्कि डिफेंस सिस्टम्स के लिए भी उतने ही जरूरी हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • रेयर-अर्थ एलिमेंट्स मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, जेट इंजन और रडार में इस्तेमाल होते हैं।
  • लिथियम और निकेल हाई-एनर्जी बैटरियों के लिए अनिवार्य हैं, जो सबमरीन, ड्रोन और कम्युनिकेशन इक्विपमेंट में काम आते हैं।
  • कोबाल्ट और अन्य मिनरल्स एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सेंसर में उपयोग होते हैं।

इसलिए जब US और भारत क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन पर साथ काम करने की बात करते हैं, तो उसके पीछे साफ रक्षा-सुरक्षा का एंगल भी मौजूद होता है।

वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की भूमिका और भारत–US रणनीति

आज की स्थिति यह है कि चीन दुनिया के अधिकांश रेयर-अर्थ मिनरल्स की माइनिंग और प्रोसेसिंग दोनों में डॉमिनेंट है – कई विश्लेषणों के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत माइनिंग और 90 प्रतिशत से अधिक प्रोसेसिंग चीन के नियंत्रण में है। इससे EV, सोलर, विंड, हाई-टेक और डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ी जोखिम पैदा होती है, क्योंकि किसी भी भू-राजनीतिक तनाव में सप्लाई कट सकती है।

इसी जोखिम को देखते हुए US, EU, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देश मिलकर वैकल्पिक सप्लाई चेन बना रहे हैं। इसमें:

  • नए खनिज स्रोतों की खोज (ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, भारत),
  • प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग क्षमता का डाइवर्सिफिकेशन,
  • और रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी पर जोर शामिल है।

भारत के लिए यह मौका है कि वह सिर्फ रॉ मटीरियल सप्लायर न रहे, बल्कि वैल्यू-चेन में आगे, यानी प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में भी भूमिका निभाए।

भारत के लिए संभावित फायदे

  1. आर्थिक लाभ
  • क्रिटिकल मिनरल्स वैल्यू चेन में भारत की भागीदारी बढ़ने से नई इंडस्ट्री, निवेश और जॉब्स पैदा हो सकते हैं।
  • EV, बैटरी और ग्रीन टेक्नोलॉजी में भारत “मैन्युफैक्चरिंग हब” के रूप में उभर सकता है, अगर सप्लाई चेन स्थिर और सस्ती रहे।
  1. रणनीतिक और सुरक्षा लाभ
  • डिफेंस फ्रेमवर्क के तहत एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और जॉइंट प्रोजेक्ट्स की संभावना बढ़ेगी।
  • Indo-Pacific में चीन की आक्रामकता के बीच भारत–US मिलकर समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत कर सकते हैं।
  1. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
  • क्रिटिकल मिनरल्स के रिसाइक्लिंग, प्रोसेसिंग और क्लीन माइनिंग टेक्नोलॉजी में सहयोग से भारत की टेक क्षमता बढ़ सकती है।
  • सेमीकंडक्टर, सोलर, और स्टोरेज टेक्नोलॉजी पर जॉइंट R&D प्रोजेक्ट्स के रास्ते खुल सकते हैं।

संभावित चुनौतियां

  • भारत को संतुलन बनाना होगा – रूस, US, EU, चीन जैसे सभी बड़े पार्टनर्स के साथ।
  • पर्यावरणीय मानकों और लोकल समुदाय के हितों को ध्यान में रखकर खनन और प्रोसेसिंग करनी होगी।
  • घरेलू नीति और रेगुलेशन ऐसे होने चाहिए कि विदेशी निवेश आये लेकिन स्ट्रेटेजिक एसेट्स पर भारत का कंट्रोल बना रहे।

जयशंकर के दौरे से क्या उम्मीद की जा सकती है?

हालांकि आधिकारिक एजेंडा Critical Minerals Ministerial है, लेकिन डिप्लोमैटिक भाषा में ऐसे दौरों का महत्व अक्सर “स्टेटमेंट्स” से ज्यादा “संकेतों” में छिपा होता है। संभावित रूप से:

  • भारत–US क्रिटिकल मिनरल्स वर्किंग ग्रुप को औपचारिक रूप मिल सकता है।
  • सप्लाई चेन पर MoU या जॉइंट स्टेटमेंट सामने आ सकती है।
  • डिफेंस फ्रेमवर्क को ऑपरेशनलाइज़ करने के लिए कुछ ठोस प्रोजेक्ट या इंडस्ट्री-टू-इंडस्ट्री टाईअप का ऐलान हो सकता है।
  • ट्रेड डील और टैरिफ पर भी बैक-चैनल बातचीत आगे बढ़ सकती है, खासकर तब जब आर्थिक और सिक्योरिटी एजेंडा एक-दूसरे से सीधे जुड़ चुके हैं।

भारत–US रिश्तों का बड़ा चित्र

अगर पिछले दो साल देखें तो एक तरफ टैरिफ, ट्रेड और कुछ पॉलिसी मतभेदों ने तनाव पैदा किया, वहीं दूसरी तरफ डिफेंस, टेक्नोलॉजी, स्पेस और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग बढ़ा है। इससे यह साफ दिखता है कि दोनों देश “मैनेज्ड कॉम्पिटिशन” और “स्ट्रेटेजिक कनवर्जेंस” के कॉम्बिनेशन में काम कर रहे हैं – यानी जहां हित टकराते हैं, वहां नेगोशिएशन; और जहां हित मिलते हैं, वहां तेज सहयोग। जयशंकर का ये दौरा इसी बड़े पैटर्न का हिस्सा है।

FAQs (5 सामान्य प्रश्न)

  1. प्रश्न: एस. जयशंकर किस मकसद से US जा रहे हैं?
    उत्तर: वे अमेरिका में 4 फरवरी को होने वाली पहली Critical Minerals Ministerial में हिस्सा लेने जा रहे हैं, जिसे US Secretary of State मार्को रुबियो होस्ट कर रहे हैं। यहां क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित और लचीला बनाने पर चर्चा होगी।
  2. प्रश्न: Critical Minerals Ministerial में कौन-कौन से मिनरल्स पर फोकस होगा?
    उत्तर: लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर-अर्थ एलिमेंट्स जैसे मिनरल्स मुख्य फोकस हैं, जो EV बैटरियों, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस इक्विपमेंट के लिए जरूरी हैं।
  3. प्रश्न: हाल ही में हुई US Treasury की मीटिंग में भारत की क्या भूमिका थी?
    उत्तर: US Treasury Secretary स्कॉट बेसेन्ट की अगुवाई में हुई हाई-लेवल Finance Ministerial में भारत की तरफ से अश्विनी वैष्णव ने हिस्सा लिया और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने पर चर्चा की।
  4. प्रश्न: 10 साल के मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क एग्रीमेंट का क्या महत्व है?
    उत्तर: यह एग्रीमेंट अगले दशक तक भारत–US डिफेंस रिलेशन को स्पष्ट नीति दिशा देता है, टेक्नोलॉजी शेयरिंग, जॉइंट एक्सरसाइज़, डिफेंस इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन को बढ़ावा देता है।
  5. प्रश्न: US Congressional Delegation और भारतीय रक्षा सचिव की मीटिंग में क्या चर्चा हुई?
    उत्तर: माइक रॉजर्स के नेतृत्व में आए US डेलिगेशन ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मिलकर 10 साल के डिफेंस फ्रेमवर्क के तहत डिफेंस इंडस्ट्री सहयोग, मेजर डिफेंस पार्टनरशिप और मिलिट्री टाईज़ को आगे बढ़ाने पर विस्तृत बातचीत की।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

आर्थिक सर्वे 2025-26: 6.8-7.2% ग्रोथ अनुमान, विकसित भारत का रोडमैप- पीएम मोदी

आर्थिक सर्वे 2025-26 पेश। पीएम मोदी बोले- चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में स्थिर...

अजित पवार की दर्दनाक मौत: बारामती प्लेन क्रैश का ब्लैक बॉक्स रिकवर, फडणवीस ने मांगी पूरी जांच!

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार मुंबई से बारामती जाते विमान हादसे में...

सीजेआई सूर्या कांत का बड़ा बयान: ट्रेड यूनियन ने देश की इंडस्ट्री बंद कराई, नौकरियां छीनी!

सीजेआई सूर्या कांत ने ट्रेड यूनियनों को इंडस्ट्री बंद करने का जिम्मेदार...

शशि थरूर की राहुल-खड़गे से बंद कमरे की बातचीत: कांग्रेस में दरारें भरने का राज क्या?

शशि थरूर ने राहुल गांधी-मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की, बोले ‘सब एक...