भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर नमन किया। शोषित वर्गों के उत्थान के लिए जीवन समर्पित। बिहार में रिजर्वेशन क्रांति लाए। सादगी की मिसाल। पूरी जीवनी और योगदान।
कर्पूरी ठाकुर: रिजर्वेशन के जनक जिन्होंने महिलाओं-EBC को पहली बार कोटा दिया, विरासत क्या?
कर्पूरी ठाकुर जयंती विशेष: भारत रत्न जननायक को पीएम मोदी का नमन, शोषितों के उत्थान के योद्धा की पूरी कहानी
शनिवार को पूरे बिहार में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, ‘बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों का उत्थान हमेशा उनकी राजनीति के केंद्र में रहा। अपनी सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण भाव को लेकर वे सदैव स्मरणीय एवं अनुकरणीय रहेंगे।’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नमन किया। बिहार में जेडीयू, आरजेडी समेत सभी पार्टियां कार्यक्रम आयोजित कीं। पटना, खगड़िया, समस्तीपुर में सभाएं हुईं। अलीगढ़ में भी सम्मान दिवस मनाया। ठाकुर को ‘जननायक’ कहा जाता, क्योंकि उन्होंने गरीबों, पिछड़ों के लिए लड़ाई लड़ी। 2024 में मोदी सरकार ने मरणोपरांत भारत रत्न दिया।
कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया गांव में हुआ। नाई समुदाय से थे, जो अति पिछड़ा वर्ग (EBC)। चाय बेची, रेलवे में क्लर्क रहे। क्विट इंडिया मूवमेंट में जेल गए। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से प्रभावित। 1942 से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय। 1952 से विधायक बने। 1967-68 में बिहार के डिप्टी सीएम पहले EBC नेता के रूप में। 1970 में पहली बार सीएम बने, फिर 1977-79।
उनकी सबसे बड़ी देन रिजर्वेशन। 1970 में बिहार बैकवर्ड क्लास कमीशन बनाया। 1978 में मुनगेरी लाल कमीशन की सिफारिशें लागू कीं। 26% कोटा- 12% अति पिछड़ों (EBC), 8% पिछड़ों (BC), 3% महिलाओं, 3% आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को। आजादी के बाद पहली बार महिलाओं और EWS को कोटा। ये ‘कर्पूरी फॉर्मूला’ मंडल कमीशन को प्रभावित किया। OBC में सब-कटेगरी का आधार बना। रोहिणी कमीशन इसी से प्रेरित।
सादगी की मिसाल। धोती-कुर्ता पहनते, साइकिल चलाते। सीएम रहते चपरासी से काम करवाते। शिक्षा में सुधार- फ्री यूनिफॉर्म, किताबें। तंबाकू, शराब विरोधी। हिंदी को बढ़ावा। लेकिन कोटा फैसले से ऊंची जातियों का विरोध, दंगे हुए। कोयरी-यादव नाराज। छोटे कार्यकाल के बावजूद विरासत अमर।
राजनीतिक सफर की झलक
- 1952: पहली बार विधायक।
- 1967: शिक्षा मंत्री।
- 1968-69: डिप्टी सीएम।
- 1970-71: पहला सीएम कार्यकाल।
- 1977-79: दूसरा, रिफॉर्म्स का दौर।
- 1980: लोकसभा सांसद।
- 1988: निधन।
कर्पूरी ठाकुर के प्रमुख सुधार
| सुधार | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| रिजर्वेशन | 12% EBC, 8% BC, 3% महिलाएं, 3% EWS | OBC सब-कटेगरी का आधार |
| शिक्षा | फ्री किताबें, यूनिफॉर्म | गरीब बच्चों को मदद |
| नशा मुक्ति | तंबाकू-शराब पर रोक | स्वस्थ समाज |
| हिंदी प्रचार | आधिकारिक भाषा | स्थानीय सशक्तिकरण |
बिहार राजनीति पर असर। ठाकुर ने EBC को एकजुट किया। जेडीयू, लोजपा आज उनकी विरासत। नीतीश कुमार खुद को उनका अनुयायी बताते। 2024 भारत रत्न से विवाद भी, लेकिन सम्मान। पुत्र राम नाथ ठाकुर केंद्रीय मंत्री। बेटी अनुराधा यादव।
2026 जयंती पर कार्यक्रम
- पटना: जेडीयू मुख्यालय में सभा।
- खगड़िया: विवाह भवन में धूम।
- अलीगढ़: सम्मान दिवस।
- देशभर कार्यक्रम।
मोदी वीडियो में बोले- ‘मां भारती का रत्न।’
विरासत आज। EBC वोट बैंक मजबूत। बिहार चुनावों में फैक्टर। मोदी सरकार ने OBC सब-क्लासिफिकेशन किया। ठाकुर की सोच जीवित। सादगी सिखाती- पद से ऊपर सेवा।
ठाकुर की प्रसिद्ध उक्ति: ‘सत्ता सेवा का माध्यम है, स्वार्थ का नहीं।’ उनकी जिंदगी इसका प्रमाण। जयंती पर बिहार ठप्पा लगाता- जननायक अमर रहें।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- कर्पूरी ठाकुर कौन थे?
बिहार के दो बार सीएम, समाजवादी नेता। EBC से, रिजर्वेशन क्रांति लाए। 2024 में भारत रत्न। - उनका मुख्य योगदान क्या?
1978 रिजर्वेशन फॉर्मूला- EBC, BC, महिलाएं, EWS को कोटा। मंडल का आधार। - पीएम मोदी ने क्यों नमन किया?
शोषित उत्थान, सादगी, जनसेवा के लिए। एक्स पर पोस्ट शेयर। - जयंती कब मनाई जाती?
24 जनवरी। 2026 में 102वीं। बिहार-UP में सभाएं। - परिवार में कौन सक्रिय?
Leave a comment