कर्नाटक CM सिद्धरमैया ने केंद्र पर हमला बोला- BJP ने महात्मा गांधी के नाम से एलर्जी के चलते MGNREGA खत्म किया। नई VB-G RAM G योजना में गोडसे का नाम, मजदूर अधिकार छीने। बचाओ आंदोलन शुरू।
गांधी नाम हटाकर गोडसे RAM लाए: सिद्धरमैया ने खोला BJP का राज, 12 करोड़ मजदूरों का क्या होगा?
MGNREGA खत्म, BJP को गांधी जी के नाम से एलर्जी: कर्नाटक CM सिद्धरमैया का केंद्र पर तीखा प्रहार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को बीजेपी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को खत्म करने की असली वजह BJP को गांधी जी के नाम से एलर्जी है। बेंगलुरु में कांग्रेस की ‘महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना बचाओ संग्राम’ की तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए CM ने कहा कि नई योजना VB-G RAM G में RAM का मतलब भगवान राम नहीं, बल्कि नाथूराम गोडसे है, जिसने गांधी जी को मारा था। उन्होंने पूरे देश में जन आंदोलन चलाने का ऐलान किया जब तक MGNREGA बहाल न हो और नई योजना वापस न ली जाए।
सिद्धरमैया ने याद दिलाया कि MGNREGA 2005 में यूपीए सरकार ने लाया था, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। ये ग्रामीण गरीबों को काम का कानूनी अधिकार देता था। 20 सालों में देशभर में 12.16 करोड़ मजदूरों को रोजगार मिला, जिसमें 6.21 करोड़ महिलाएं शामिल रहीं। पहले ग्रामीण 365 दिनों तक अपने गांव में काम मांग सकते थे, मना करने पर कोर्ट जा सकते थे। लेकिन नई विकसित भारत- गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना में केंद्र नोटिफिकेशन से तय करेगा कि काम कहां होगा। मजदूरों के अधिकार कमजोर हो गए।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्र अब गांवों के बजाय खुद काम तय करेगा। पंचायतों को Rs 1-2 करोड़ के काम गंवाने पड़ेंगे। कोई राज्य सरकार ये स्वीकार नहीं करेगी, यहां तक कि बीजेपी शासित राज्य भी नहीं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू का हवाला दिया कि नई योजना ठीक से लागू नहीं हो पाएगी। ग्रामीण विकास मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि BJP को गांधी जी से इतनी नफरत है कि उन्होंने कानून खत्म कर ग्रामीण गरीबों की रोजी-रोटी छीन ली। उन्होंने नई योजना को VB-ग्राम G कहा, नाम से ज्यादा आजीविका महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस नेता बोले कि अगर केंद्र को नाम बदलना था तो गांधी जी का नाम क्यों हटाया? ये राम दशरथ राम या सीता राम नहीं, नाथूराम है। सिद्धरमैया ने किसान आंदोलनों का उदाहरण दिया कि लंबा संघर्ष ही कानून बदलवाएगा। AICC कार्यकारिणी बैठक में भी इस मुद्दे को गंभीर बताया गया। कर्नाटक को नई योजना से Rs 2500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ, क्योंकि राज्य को 40% खर्च वहन करना पड़ेगा। पहले केंद्र 100% फंडिंग करता था।
MGNREGA ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। कोविड महामारी में ये ग्रामीणों का सहारा बनी। आंकड़ों के मुताबिक, योजना से सालाना 5-6 करोड़ परिवारों को फायदा। महिलाओं की भागीदारी 50% के करीब। ये न सिर्फ रोजगार देती, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे- तालाब, सड़क, पानी के काम भी कराती। RTI, RTE, NFSA, फॉरेस्ट राइट्स जैसे कानूनों के साथ ये UPA का ऐतिहासिक पैकेज था। BJP ने इसे ‘गड्ढा खोदने की योजना’ कहकर हमेशा कमजोर करने की कोशिश की।
नई VB-G RAM G योजना PM गति शक्ति मास्टर प्लान से जोड़ी गई। इसमें 125 दिन का काम गारंटी है, लेकिन स्वयंसेवी आधार पर। केंद्र 60% फंड देगा, राज्य 40%। विपक्ष का आरोप है कि ये कानूनी अधिकार को दान-पत्री में बदल दिया। ग्रामीण अमीर और जमींदार हमेशा MGNREGA के खिलाफ रहे। BJP का ये कदम वर्ग चरित्र दिखाता है।
राज्य स्तर पर विरोध तेज। कुरुक्षेत्र में कांग्रेस MLA अशोक अरोड़ा ने कहा कि BJP ने MGNREGA की आत्मा मार दी। नाम हटाकर, ढांचा बदलकर। हरियाणा, कर्नाटक समेत कई जगह MGNREGA बचाओ अभियान। राहुल गांधी ने भी कहा कि मोदी एकल सरकार चला रहे, बिना चर्चा योजना बदली।
MGNREGA बनाम VB-G RAM G: मुख्य अंतर
| बिंदु | पुरानी MGNREGA | नई VB-G RAM G |
|---|---|---|
| नाम | महात्मा गांधी | विकसित भारत RAM G |
| काम के दिन | 100 (मांग पर) | 125 (स्वैच्छिक) |
| फंडिंग | केंद्र 100% | केंद्र 60%, राज्य 40% |
| काम चुनना | ग्रामीण मांग | केंद्र नोटिफिकेशन |
| अधिकार | कानूनी, कोर्ट जा सकते | कमजोर |
| लागू | 2005 से | 2025 से |
MGNREGA के 20 साल के आंकड़े
- कुल मजदूर: 12.16 करोड़
- महिलाएं: 6.21 करोड़
- परिवार कवर: 5-6 करोड़ सालाना
- कोविड में: करोड़ों को सहारा
- काम प्रकार: जल संरक्षण, सड़क, वन
राजनीतिक टिप्पणियां
- सिद्धरमैया: गांधी एलर्जी, गोडसे RAM
- शिवकुमार: पंचायतें कमजोर
- खरगे: नाम से ज्यादा आजीविका
- राहुल: एक व्यक्ति शो
क्या होगा आगे?
कांग्रेस गांव-राज्य स्तर पर आंदोलन चला रही। बीजेपी शासित राज्यों में भी अस्वीकृति। नायडू जैसे सहयोगी असहज। अगर मजदूर सड़कों पर आए तो कानून बदलना पड़ सकता। ग्रामीण भारत की 70% आबादी प्रभावित।
ऐसे विवादों से सीख
- नीतियां नाम से ऊपर
- मजदूर अधिकार मजबूत रखें
- राज्य-केंद्र संतुलन जरूरी
- जन आंदोलन ही बदलाव लाता
MGNREGA विवाद ने फिर गांधी-गोडसे बहस छेड़ दी। क्या BJP नाम से ज्यादा सुधार चाहती या राजनीति? ग्रामीण मजदूर इंतजार कर रहे। आंदोलन की सफलता तय करेगी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- MGNREGA को क्यों खत्म किया गया?
केंद्र ने VB-G RAM G लाकर रिपील किया। विपक्ष का दावा- गांधी नाम से एलर्जी। - नई योजना में क्या बदलाव?
125 दिन काम, लेकिन केंद्र कंट्रोल। राज्य 40% खर्च। अधिकार कमजोर। - कितने मजदूर प्रभावित?
12.16 करोड़, 6.21 करोड़ महिलाएं। 20 सालों का डेटा। - कांग्रेस क्या कर रही?
MGNREGA बचाओ संग्राम, जन आंदोलन। गांव से राज्य स्तर। - बीजेपी शासित राज्य मानेंगे?
शिवकुमार बोले- नहीं। नायडू ने भी अस्वीकृति जताई।
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