दिल्ली हाईकोर्ट में लैंड फॉर जॉब्स केस की सुनवाई के दौरान वकीलों में तीखी नोकझोंक। कपिल सिब्बल ने ASG राजू पर भड़कते हुए कहा- तुम जज नहीं हो! कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा। पूरी ड्रामा स्टोरी।
दिल्ली हाईकोर्ट में ड्रामा: सिब्बल बोले- ‘तुम पेटी वकील हो?’, लालू केस में गरमाई बहस
लैंड फॉर जॉब्स केस: दिल्ली हाईकोर्ट में लालू यादव की याचिका पर गरमाई बहस, वकीलों में खुलेआम ठन गई
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जो कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों जैसा लग रहा था। राष्ट्रीय जनता दल के सरगना और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की लैंड फॉर जॉब्स केस में दर्ज एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हो रही थी। जस्टिस रविंदर दुदेजा की अदालत में सीनियर वकील कपिल सिब्बल लालू की तरफ से लड़े, तो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू सीबीआई के। बहस छिड़ी संन्यासी की जरूरत पर, लेकिन जल्दी ही बातें तीखी हो गईं। आखिरकार कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
लालू की याचिका का केंद्र बिंदु है भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 17A। उनका कहना है कि रेल मंत्री रहते फैसले आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा थे, इसलिए अभियोजन से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी थी। सीबीआई ने 2022 में एफआईआर दर्ज की, फिर 2022, 2023 और 2024 में चार्जशीट दाखिल कीं। लालू चाहते हैं ये सब रद्द हो। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि सीबीआई का ही केस कहता है लालू ने मंत्रालयी हैसियत से काम किया, तो संन्यासी के बिना सब बेकार। पहले जांचें क्लोजर रिपोर्ट पर खत्म हुईं, 14 साल बाद फिर खोला गया- ये प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
सीबीआई की तरफ से एएसजी राजू ने साफ इनकार किया। उनका तर्क- रेलवे के ग्रुप डी अपॉइंटमेंट रेलवे जीएम के अधिकार क्षेत्र में थे, मंत्री के नहीं। तो ये आधिकारिक ड्यूटी नहीं, संन्यासी की जरूरत नहीं पड़ेगी। जबलपुर के वेस्ट सेंट्रल जोन में 2004-09 के दौरान लालू के कार्यकाल में नौकरियां जमाई गईं, बदले में जमीनें लालू परिवार या करीबियों को ट्रांसफर हुईं। आरोपी लालू, पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियां, अज्ञात अधिकारी और प्राइवेट लोग। राजू ने कहा प्रक्रिया सही है।
लेकिन असली तमाशा तब शुरू हुआ जब संन्यासी पर बहस तेज हुई। सिब्बल बोले, ‘संन्यासी लो, ये उनके खुद के केस के खिलाफ कैसे आर्ग्यू कर रहे?’ राजू भड़के, ‘सिब्बल नया पॉइंट उठा रहे, कानून गलत बता रहे। गुमराह कर रहे हैं, बोलने नहीं दे रहे।’ सिब्बल फायर हो गए- ‘तुम्हें ईमानदारी तक नहीं कि कहो मैंने कभी कोर्ट गुमराह नहीं किया। जिंदगी में कभी नहीं। हिम्मत मत करना ऐसा बोलने की। तुम एएसजी हो, जज थोड़े न हो!’ राजू पीछे नहीं हटे, ‘हां, गुमराह किया है, बताता हूं कैसे।’
सिब्बल और आगे बढ़े, ‘तुम एएसजी हो, पेटी वकील थोड़े बने हो। खुद को उस लेवल पर ले जाना चाहते हो तो ले जाओ। हम ये बर्दाश्त नहीं करते। तुम्हें पता नहीं मैं कौन हूं इस कोर्ट में।’ राजू ने कहा, ‘बहुत सम्मान है आपका, लेकिन मामले में बताना पड़ता है।’ जस्टिस दुदेजा ने बीच में कूदकर कहा, ‘माहौल शांत करो।’ फिर दोनों तरफ से संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करने की इजाजत दी और सुनवाई खत्म।
लैंड फॉर जॉब्स केस की पूरी पृष्ठभूमि समझ लीजिए। 2004-09 में लालू रेल मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन जबलपुर में ग्रुप डी की नौकरियां दिलाई गईं। बदले में बिहार में प्राइम लोकेशन की जमीनें लालू परिवार को गिफ्ट या ट्रांसफर हुईं। जमीनें पटना और आसपास की। ये सौदेबाजी थी। एफआईआर 2022 में दर्ज हुई। तीन चार्जशीट्स आईं। कोर्ट ने संज्ञान लिया। लालू की दलील- पुरानी जांचें क्लोजर पर रुकीं, छिपाकर फिर खोला।
कानूनी पचड़ा क्या है? भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A कहती है- आधिकारिक ड्यूटी से जुड़े कृत्यों पर जांच से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी जरूरी। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में इसे साफ किया। लालू पक्ष कहता है ये लागू होता है। सीबीआई बोली- अपॉइंटमेंट जीएम का काम, मंत्री का नहीं। तो प्राइवेट डील। ये बहस कोर्ट में चली आ रही। लालू के कई और केस हैं- चारा घोटाला, आईआरसीटीसी। स्वास्थ्य खराब रहता है।
कोर्टरूम में ऐसे हाई वोल्टेज ड्रामा आम नहीं। कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील हैं, कई पीएम रहे। एसवी राजू भी सीनियर, सरकार के। लेकिन यहां नोकझोंक साफ दिखी। जस्टिस दुदेजा ने सही समय पर संभाला। आदेश कब आएगा, कोई टाइमलाइन नहीं। अगर लालू जीत गए तो एफआईआर समेत सब रद्द। हार गए तो ट्रायल चलेगा। बिहार राजनीति पर असर पड़ेगा। आरजेडी अलर्ट मोड में।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- लैंड फॉर जॉब्स केस क्या है?
रेल मंत्री रहते ग्रुप डी नौकरियां जमाईं, बदले जमीनें लीं। 2004-09 का मामला। सीबीआई ने 2022 में एफआईआर की। - कोर्ट में वकीलों की लड़ाई क्यों हुई?
संन्यासी पर बहस में सिब्बल ने कहा सीबीआई गलत, राजू बोले गुमराह कर रहे। सिब्बल भड़के- तुम जज नहीं हो! - लालू की मुख्य दलील क्या?
धारा 17A के तहत संन्यासी जरूरी। आधिकारिक ड्यूटी थी। बिना मंजूरी सब अवैध। - सीबीआई का जवाब?
अपॉइंटमेंट जीएम का काम, संन्यासी नहीं चाहिए। प्राइवेट सौदा। - कोर्ट ने क्या किया?
आदेश सुरक्षित रखा। लिखित दलीलें मांगीं। ट्रायल पर अभी स्टे नहीं।
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