मद्रास हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को गंधर्व विवाह बताया। शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने पर BNS धारा 69 के तहत 10 साल सजा। महिलाओं को पत्नी का दर्जा दो। प्रभाकरन को जमानत नामंजूर।
लिव-इन में महिलाओं का कोई भरोसा नहीं: कोर्ट ने कहा- गंधर्व विवाह की तरह पत्नी मानो, वरना कानून सजा देगा
लिव-इन रिलेशनशिप को गंधर्व विवाह मानें, महिला को पत्नी का दर्जा दें: मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
ये बात आजकल हर तरफ चर्चा में है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक ऐसे केस में फैसला सुनाया जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया। जस्टिस एस श्रीमथी ने साफ कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को गंधर्व विवाह या लव मैरिज की तरह देखा जाए। इसमें रहने वाली महिला को पत्नी का कानूनी दर्जा मिलना चाहिए। अगर पुरुष शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में मुकर जाता है, तो ये धोखे से शारीरिक संबंध का अपराध है। नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। कोर्ट ने आरोपी प्रभाकरन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
केस की शुरुआत स्कूल के दोस्ती से हुई। लड़की ने शिकायत की कि प्रभाकरन ने सालों से शादी का वादा किया। उसी वादे पर रिश्ता शारीरिक हो गया। अगस्त 2024 में दोनों घर छोड़कर त्रिची चले गए, शादी करने का इरादा था। लड़की के पिता ने मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों को पकड़ा। पूछताछ में प्रभाकरन ने रिश्ता माना और फिर शादी का वादा किया, बोला रेलवे भर्ती परीक्षा पास करने के बाद करेगा। लेकिन बाद में पीछे हट गया। लड़की ने पुलिस में धोखा और धमकी की शिकायत की।
कोर्ट ने देखा कि एफआईआर में BNS धारा 69 नहीं थी, लेकिन तथ्य साफ धोखा दिखाते हैं। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि ये धारा जोड़ी जाए। आरोपी ने बचाव में कहा रिश्ता सहमति से था, लड़की के पुराने रिलेशन पता चले तो खत्म किया। बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से शादी नहीं कर सका। लेकिन जस्टिस श्रीमथी ने साफ कहा- पुराने आईपीसी में ये चीटिंग या रेप के तहत आता था, लेकिन संसद ने जानबूझकर धारा 69 बनाई। शादी का झांसा देकर संबंध बनाना अलग अपराध। चूंकि आरोपी शादी से इनकार कर रहा, हिरासत में पूछताछ जरूरी।
जस्टिस ने लिव-इन पर गहरी बात कही। कहा, भारतीय समाज के लिए ये कल्चरल शॉक है। लोग इसे मॉडर्न समझकर घुसते हैं, लेकिन टूटने पर कानूनी सुरक्षा नहीं। थोड़े समय बाद पता चलता है कि शादी जैसी कोई प्रोटेक्शन नहीं, आग लग जाती है। नाबालिग लड़कियों को POCSO बचाता है, शादीशुदा या तलाकशुदा महिलाओं के पास कानून हैं, लेकिन लिव-इन वाली महिलाएं बिना सुरक्षा के। मानसिक ट्रॉमा झेलती हैं। जब झगड़ा होता है, पुरुष महिला का चरित्र ही असॉल्ट कर देता। लड़की ने सेटलमेंट में पैसे ठुकराए, बोली पैसों के लिए सोने वाली कहलाएंगी। कोर्ट ने इसे गंभीर बताया।
गंधर्व विवाह क्या है? मनुस्मृति और महाभारत जैसे पुराने ग्रंथों में आठ प्रकार के विवाह बताए। गंधर्व विवाह इच्छा और सहमति से होता, कोई रस्म, साक्षी या माता-पिता की मंजूरी नहीं। प्रेमी जोड़े गुप्त रूप से विवाह कर लेते। कोर्ट ने कहा लिव-इन वैसा ही। ऐसे मामलों में महिला को पत्नी मानो। अगर शादी संभव न हो, तो पुरुष कानून की मार झेले। ये फैसला महिलाओं को मजबूत सुरक्षा देता।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- लिव-इन रिलेशनशिप को गंधर्व विवाह क्यों कहा?
क्योंकि पुराने ग्रंथों में सहमति से विवाह बिना रस्म। लिव-इन वैसा ही। महिला को पत्नी दर्जा मिले सुरक्षा के लिए। - BNS धारा 69 क्या है?
शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध। 10 साल सजा। धोखे पर स्पष्ट कानून। - इस केस में जमानत क्यों नहीं मिली?
आरोपी ने रिश्ता माना, शादी से इनकार। धोखा साबित। हिरासत जांच जरूरी। - लिव-इन महिलाओं को क्या खतरा?
कोई कानूनी सुरक्षा नहीं। टूटने पर ट्रॉमा। चरित्र हमला। - क्या संसद लिव-इन कानून बनाएगी?
फैसला सुझाव देता। सुप्रीम कोर्ट फैसले हैं, लेकिन स्पष्ट कानून जरूरी।
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