Mauni Amavasya 2026 (18 जनवरी) पूजा विधि – ब्रह्म मुहूर्त स्नान, तुलसी 108 परिक्रमा, पितृ तर्पण, दान सामग्री। गंगा अमृत स्नान, मौन व्रत नियम। कुम्भ मेला प्रथम स्नान। पाप नाश, मोक्ष के शुभ उपाय। हिंदू पंचांग मुहूर्त।
Mauni Amavasya 2026 पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और दान का महत्व
मौनी अमावस्या 2026 (18 जनवरी) पर मौन व्रत, गंगा स्नान, तुलसी परिक्रमा और पितृ तर्पण कैसे करें। ब्रह्म मुहूर्त, दान सामग्री, महत्वपूर्ण नियम। पाप नाश, मोक्ष प्राप्ति के उपाय। हिंदू पंचांग अनुसार सटीक गाइड।
मौनी अमावस्या पूजा विधि: स्टेप बाय स्टेप
भोर में उठें, गंगा जल मिला स्नान लें। मौन व्रत का संकल्प लें। तुलसी की 108 परिक्रमा करें। सूर्य को अर्घ्य दें। पितरों को तर्पण दें। दान करें। मंत्र जप मानसिक रूप से।
शुभ मुहूर्त और समय
अमावस्या तिथि: 18 जनवरी 12:03 AM से 19 जनवरी 01:21 AM। ब्रह्म मुहूर्त: 5:47 AM-6:42 AM। गंगा स्नान: सूर्योदय से सूर्यास्त तक। पूजा मुहूर्त: सुबह 6:42-8:24 AM।
| समय | मुहूर्त | महत्व |
|---|---|---|
| 12:03 AM Jan 18 | तिथि प्रारंभ | व्रत संकल्प |
| 5:47-6:42 AM | ब्रह्म मुहूर्त | गंगा स्नान |
| सुबह 6:42 AM | स्नान विंडो | पाप नाश |
दान का महत्व और सामग्री
दान से पुण्यफल मिलता। गरीबों को अन्न, वस्त्र, जूते दान करें। तिल, चावल, गुड़। ब्राह्मण भोजन। पितृ दोष निवारण।
आध्यात्मिक महत्व
मौन से मन शुद्ध। गंगा अमृत बनती। पितर प्रसन्न। कर्म बंधन टूटते। योगी मोक्ष पाते। कुम्भ मेला प्रथम स्नान।
मुख्य नियम और व्रत विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त स्नान। मौन रखें। नकारात्मक विचार टालें। मंत्र जप: ओम नमो भगवते वासुदेवाय। तर्पण: जल, तिल अर्घ्य। दान। ध्यान।
5 FAQs
- मौनी अमावस्या 2026 पर पूजा का सही समय क्या?
ब्रह्म मुहूर्त (5:47-6:42 AM) में गंगा स्नान, फिर तुलसी परिक्रमा और तर्पण। - मौनी अमावस्या पर कौन सा दान सबसे फलदायी?
तिल, गुड़, चावल, काले वस्त्र, जूते। ब्राह्मण भोजन विशेष पुण्य। - मौन व्रत में बोलना वर्जित तो मंत्र जप कैसे?
मानसिक जप – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ नमः शिवाय। - तुलसी परिक्रमा कितनी बार?
108 बार सुबह। सूर्य को अर्घ्य अवश्य दें। - पितृ तर्पण के लिए क्या चाहिए?
जल, काले तिल, कुशा घास। पंचांग अनुसार दिशा पूर्व।
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