प्रधानमंत्री मोदी ने नितिन नाबिन को भाजपा का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। 45 साल के सबसे युवा लीडर को 2030 का ब्लूप्रिंट सौंपा। दक्षिण-पूर्व भारत फतह, युवा संगठन और सामाजिक गठजोड़ की चुनौती। पूरी रणनीति जानें।
मोदी ने नितिन नाबिन को माला पहनाई: भाजपा की अगली पीढ़ी की असली परीक्षा शुरू!
भाजपा का नया दौर: नितिन नाबिन बने 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष, मोदी ने सौंपा 2030 का ब्लूप्रिंट
सोमवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नाबिन को माला पहनाई, तो ये सिर्फ औपचारिकता नहीं थी। ये भाजपा के भविष्य का संकेत था। नई दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में नितिन नाबिन ने 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कमान संभाली। 45 साल की उम्र में भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने नाबिन। मोदी ने साफ कहा- अब भाजपा को नेक्स्ट जेनरेशन मॉडल बनाना है, जो लीडरशिप चेंज और जनसांख्यिकीय बदलाव झेले। ये चुनावी चुनौतियों से आगे की सोच है, 2030 तक की।
पिछले दशक में मोदी ने भाजपा को हिंदी पट्टी से निकालकर पूरे भारत में फैलाया। पंचायत से संसद तक जड़ें जमा लीं। लेकिन मोदी का संदेश साफ- ये सफलता को संभालना नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए मॉडल बनाना है। नाबिन की नियुक्ति इसी डिजाइन का हिस्सा। युवा लीडर को सौंपकर जनरेशनल ट्रांजिशन का संकेत। आरएसएस भी ‘फ्यूचर रेडी लीडरशिप’ की बात करता रहा। 2029 और उसके बाद की प्लानिंग शुरू। नाबिन ने अपने पहले भाषण में कहा- मैं संगठन का बच्चा हूं, ब्रेक नहीं। साधारण कार्यकर्ता से शीर्ष तक पहुंचाया।
नाबिन का सबसे बड़ा फोकस युवाओं पर। 15 अगस्त 2024 को मोदी ने एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने का आह्वान किया था। नाबिन ने वही दोहराया। राजनीति से दूर भागना समाधान नहीं, भागीदारी जरूरी। लेकिन चेतावनी दी- राजनीति शॉर्टकट नहीं, 100 मीटर रेस नहीं। मैराथन है, स्टैमिना चाहिए। स्पीड से ज्यादा धैर्य। राजनीति को ताकत या विशेषाधिकार नहीं, अनुशासन और त्याग बताया। ये सदस्यता अभियान के अंत के साथ आया, जो पिछले साल शुरू हुआ।
मोदी ने पूर्व अध्यक्षों की उपलब्धियों गिनाईं। अटल-अडवाणी ने मार्जिन से मेनस्ट्रीम बनाया। राजनाथ ने पहली पूर्ण बहुमत दिलाई। अमित शाह ने रिपीट जीत। जेपी नड्डा ने बूथ से संसद मजबूत किया, मुश्किल सीटें जीतीं। तीन लगातार केंद्र सरकारें। 20 राज्यों में सरकार या समर्थन। लेकिन अब भाजपा चैलेंजर नहीं, एस्टैब्लिशमेंट है। चुनौती- जहां ऐतिहासिक रूप से कमजोर, वहां फैलाव। खासकर दक्षिण और पूर्व भारत।
नाबिन के सामने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, पुदुच्चेरी। सिर्फ असम में भाजपा की अपनी सरकार। बाकी में सालों की मेहनत के बावजूद बाहर। नाबिन ने टोन सेट किया- जनसांख्यिकीय बदलाव की चर्चा है, चुनौती है। लेकिन कार्यकर्ता संघर्ष से मजबूत लीडरशिप देंगे। ये सिर्फ सीटें नहीं, प्रतीक और मनोवैज्ञानिक बैरियर तोड़ना। अलग भाषा, संस्कृति, परंपरा वाले इलाकों में राष्ट्रीय मॉडल साबित करना।
सबसे बड़ी परीक्षा- सामाजिक गठजोड़ का प्रबंधन। भाजपा ऊपरी जातियों से ओबीसी, दलित, गैर-प्रभावी जातियों तक फैली। हिंदुत्व के बड़े छत्र के नीचे। ये फॉर्मूला जीत दिला चुका। लेकिन राजनीतिक जमीन हिल रही। स्वतंत्रता के बाद पहली जनगणना हो रही। ओबीसी-अपर जाति के सटीक आंकड़े जाति आधारित जुटाव को फिर तेज करेंगे। भाजपा का धीमा लेकिन दिखा पिवट- मंदिर राजनीति से जाति आउटरीच। ये जोखिम और अवसर दोनों।
नाबिन को मोदी के सोशल इंजीनियरिंग को बचाना, नए वास्तविकता के अनुकूल बनाना। जाति डेटा प्रतिनिधित्व और पावर शेयरिंग की मांगें तय करेगा। नाबिन की सफलता चुनावी नतीजों से नहीं, भाजपा की वर्चस्व संस्थागत बनाने और विस्तार पर होगी।
5 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- नितिन नाबिन कौन हैं?
45 साल के बिहार नेता, भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष। साधारण कार्यकर्ता से शीर्ष पहुंचे। - मोदी ने नाबिन को क्यों चुना?
जनरेशनल शिफ्ट के लिए। 2030 का ब्लूप्रिंट सौंपा। युवा लीडरशिप, आरएसएस समर्थन। - नाबिन के सामने मुख्य चुनौतियां क्या?
दक्षिण-पूर्व विस्तार, बंगाल-तमिलनाडु चुनाव, जाति जनगणना का असर, युवा संगठन। - नाबिन ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
राजनीति शॉर्टकट नहीं, मैराथन। भागीदारी जरूरी, 1 लाख युवाओं का आह्वान। - भाजपा अब कितने राज्यों में सत्ता में?
20 राज्यों में सरकार या समर्थन। तीन केंद्र कार्यकाल।
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