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कोयला खदान में विस्फोट से 18 की मौत: मेघालय की लापरवाही का खौफनाक चेहरा क्यों?

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Meghalaya coal mine blast
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मेघालय के पूर्वी जैनतिया हिल्स में रैट होल कोयला खदान में धमाका: 18 मजदूर मारे गए, 1 घायल, कई फंसे। अवैध खनन बैन के बावजूद हादसा, रेस्क्यू जारी। मेघालय कोयला घोटाला, रैट होल खतरों, सरकार एक्शन, मजदूर सुरक्षा का पूरा विश्लेषण।

18 लाशें निकलीं मेघालय खदान से: अवैध खनन का काला सच फिर उजागर कैसे

मेघालय कोयला खदान धमाका: 18 मजदूरों की मौत, कई अभी भी फंसे

मेघालय के घने जंगलों और पहाड़ियों में छिपी कोयला खदानों का काला इतिहास फिर से खुल गया है। पूर्वी जैनतिया हिल्स जिले के लुम्बिंग नामक इलाके में एक रैट होल कोयला खदान में धमाके से कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई है। एक घायल को बचा लिया गया लेकिन कई अन्य अभी भी खदान के अंदर फंसे बताए जा रहे हैं। ये हादसा 5 फरवरी 2026 की सुबह हुआ जब मजदूर संकरी सुरंगों में कोयला निकाल रहे थे। स्थानीय लोग और खदान मालिकों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया लेकिन हालात की गंभीरता देखते हुए NDRF की टीमें बुलाई गईं। ये घटना मेघालय में 2014 के कोयला खनन बैन के बावजूद अवैध खनन की लापरवाही को बेनकाब करती है। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है और सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लग रहा है।

रैट होल खनन क्या है और ये इतना खतरनाक क्यों

रैट होल माइनिंग मेघालय जैसे पहाड़ी इलाकों में सबसे आम लेकिन सबसे घातक तरीका है कोयला निकालने का। इसमें मजदूर चूहेदानी जितनी संकरी सुरंगें खोदते हैं जिनमें सिर्फ़ एक या दो लोग घुस सकें। ये सुरंगें 100-200 फीट गहरी होती हैं और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूर झुककर कोयला तोड़ते हैं। हवा का प्रवाह कम होने से मीथेन गैस जमा हो जाती है जो विस्फोट का कारण बनती है। दीवारें कमज़ोर होने से कभी भी ढह सकती हैं और बाहर निकलने का रास्ता मुश्किल। मेघालय में ये तरीका अवैध घोषित है लेकिन आर्थिक लालच में जारी रहता है। ज्यादातर मजदूर असम बंगाल झारखंड के प्रवासी होते हैं जो कम पैसे के लालच में जान जोखिम में डालते हैं। ये हादसा उसी की मिसाल है जहाँ गैस विस्फोट से सुरंगें भर गईं।

हादसे का पूरा विवरण: कैसे शुरू हुआ सब

5 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे लुम्बिंग के पास एक रैट होल खदान में धमाके की आवाज़ आई। स्थानीय लोगों ने देखा कि धुआँ निकल रहा है और चीखें सुनाई दे रही हैं। तुरंत खदान मालिकों ने रेस्क्यू शुरू किया और बाहर निकले मजदूरों ने बताया कि अंदर 20 से ज़्यादा लोग थे। पहले 1 घायल को बचा लिया गया जिसने बताया कि मीथेन गैस ब्लास्ट हुआ। फिर लगातार लाशें निकलने लगीं। 6 फरवरी तक 18 शव बरामद हो चुके थे जिनमें ज़्यादातर असम बंगाल के मजदूर थे। NDRF की 2 टीमें शिलांग से पहुंचीं और ऑक्सीजन पंप रस्सियाँ लगाकर रेस्क्यू जारी है। खदान मालिक फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस ने केस दर्ज किया। परिवार रो रहे हैं कि पैसे के लालच में ये सब हुआ।

मेघालय का कोयला खनन का काला इतिहास

मेघालय भारत का कोयला भंडार है लेकिन रैट होल माइनिंग ने इसे मौत का जाल बना दिया। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण खतरे से अवैध घोषित किया लेकिन बैन के बावजूद जारी। 2018 में सौथ गारो हिल्स में 15 मजदूर डूब गए। 2021 में दो अलग हादसों में 9 मौतें। 2022 में जैनतिया में 5 डूबे। हर बार वादे होते हैं लेकिन अमल नहीं। कोयला माफिया स्थानीय नेता पुलिस सब मिले हुए। 2024 के कोयला घोटाले में 1000 करोड़ का मामला सामने आया। ये हादसा बैन के 12 साल बाद हुआ जो दिखाता है सिस्टम फेल है। केंद्र ने NGT के ज़रिए मॉनिटरिंग की लेकिन ग्राउंड पर कुछ नहीं बदला।

सरकार का रिएक्शन और रेस्क्यू अपडेट

मेघालय CM कोनराड संगमा ने हादसे पर शोक जताया और NDRF SDRF को तुरंत भेजा। उन्होंने कहा दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र ने भी मदद का ऐलान किया। लेकिन विपक्ष ने लापरवाही का आरोप लगाया। रेस्क्यू में ऑक्सीजन पंप वेंटिलेटर लगाए गए हैं। 6 फरवरी सुबह तक 18 शव निकले 5 फंसे अनुमान। हालात मुश्किल क्योंकि सुरंगें संकरी। डॉग स्क्वॉड भी लगाए गए। परिवारों को 5 लाख मुआवज़ा देने का ऐलान। लेकिन ये हादसे रोकने के लिए क्या होगा ये सवाल बाक़ी।

रैट होल खनन के खतरे: क्यों बार–बार हादसे

रैट होल में कोई हेलमेट गैस मास्क नहीं। मीथेन गैस विस्फोट का सबसे बड़ा खतरा। पानी भरने से डूबने का डर। ढहने से दब जाना। बाहर निकलना नामुमकिन। वैज्ञानिक खनन के मुकाबले ये 10 गुना घातक। मेघालय में 2000 से ज़्यादा ऐसी खदानें। मज़दूरी 800-1200 रोज़। लेकिन मौत का रिस्क 100%। सुप्रीम कोर्ट NGT ने बैन किया लेकिन मॉनिटरिंग कमज़ोर। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर निर्भरता बैन रोकती है। वैकल्पिक रोज़गार की कमी। केंद्र राज्य को वैज्ञानिक खनन की सलाह देता लेकिन अमल नहीं।

मजदूरों की कहानियाँ: कौन थे मरे

मरने वालों में ज़्यादातर असम के करीमगंज बंगाल के मालदा झारखंड के प्रवासी। उम्र 20 से 45। परिवार पर निर्भर। एक मज़दूर का बेटा बोला पापा पैसे भेजते थे पढ़ाई के लिए। अब क्या होगा। खदान मालिक अमीर लेकिन मज़दूरों को इंश्योरेंस नहीं। ये लोग गरीबी से आते हैं और लालच में जान देते हैं। हादसे के बाद परिवार भटकते फिरते। मुआवज़ा मिले भी कितना। ये चक्र बार–बार चलता रहता।

कानूनी पहलू: बैन का क्या मतलब

2014 में NGT ने रैट होल बैन किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में साफ किया कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं तो बंद। लेकिन मेघालय हाई कोर्ट ने 2020 में कुछ छूट दी। केंद्र ने CBI जांच कराई। लेकिन ग्राउंड पर अवैध खनन जारी। ये खदान भी बैन के बावजूद चल रही थी। पुलिस FIR दर्ज करेगी लेकिन मालिक बच निकलेंगे। सिस्टम में सुधार की ज़रूरत।

भविष्य में हादसे रोकने के उपाय क्या

वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा। मज़दूरों को ट्रेनिंग इंश्योरेंस। सख्त मॉनिटरिंग ड्रोन कैमरा। वैकल्पिक रोज़गार जैसे पर्यटन कृषि। केंद्र की स्किल इंडिया से जोड़ना। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए। परिवारों को न्याय दोषियों को सजा। वरना ये सिलसिला चलेगा। मेघालय कोयला राजस्व देता लेकिन कीमत जानें।

5 FAQs

प्रश्न 1: मेघालय कोयला धमाके में कितने मरे और फंसे?
उत्तर: 18 मजदूर मारे गए। 1 घायल बचा। 5 या ज़्यादा अभी फंसे। पूर्वी जैनतिया हिल्स लुम्बिंग में 5 फरवरी को हुआ। NDRF रेस्क्यू जारी।

प्रश्न 2: रैट होल खनन क्या है और खतरे क्यों?
उत्तर: संकरी चूहेदानी सुरंगें। गैस विस्फोट ढहना डूबना। कोई सुरक्षा नहीं। मेघालय में अवैध लेकिन जारी। 2014 बैन।

प्रश्न 3: सरकार ने क्या कार्रवाई की?
उत्तर: CM संगमा ने NDRF भेजा। 5 लाख मुआवज़ा। FIR दर्ज। लेकिन विपक्ष लापरवाही का आरोप।

प्रश्न 4: मेघालय में पहले ऐसे हादसे हुए?
उत्तर: हां। 2018 में 15 डूबे। 2021-22 में कई। बैन के बावजूद अवैध खनन। कोयला माफिया सक्रिय।

प्रश्न 5: हादसे रोकने क्या उपाय?
उत्तर: वैज्ञानिक खनन ट्रेनिंग मॉनिटरिंग। वैकल्पिक रोज़गार। सख्त कानून अमल। केंद्र राज्य मिलकर।

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