नीमच MP के रानपुर आंगनवाड़ी में मधुमक्खी झुंड ने 20 बच्चों पर हमला किया। कुक कंचन बाई मेघवाल ने चादर–चटाई से ढककर बचाया, खुद सैकड़ों डंक झेलकर शहीद। परिवार, गांव की प्रतिक्रिया, मधुमक्खी हमले के खतरे, फर्स्ट एड टिप्स विस्तार से।
क्या एक चादर ने 20 जिंदगियों को बचा लिया? आंगनवाड़ी कुक कंचन बाई का दिल छूने वाला किस्सा
आंगनवाड़ी कुक कंचन बाई का बलिदान: 20 बच्चों को मधुमक्खी झुंड से बचाया, खुद सैकड़ों डंक झेलकर चल बसीं
एक आम सी दिन, आंगनवाड़ी के बाहर बच्चे खेल रहे थे। अचानक आसमान से मधुमक्खियों का भारी झुंड टूट पड़ा। चीखें गूंजीं, बच्चे इधर–उधर भागे। लेकिन एक महिला दौड़ पड़ी – कंचन बाई मेघवाल। आंगनवाड़ी की कुक, ‘जय माता दी’ सेल्फ हेल्प ग्रुप की प्रेसिडेंट। उन्होंने पास की चादर और चटाई उठाई, बच्चों को एक–एक करके लपेटा, कमरे में बंद किया। खुद झुंड के बीच खड़ी रहीं। नतीजा? 20 बच्चे सेफ, लेकिन कंचन बाई सैकड़ों डंक खाकर अस्पताल पहुंचीं तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
ये घटना 2 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव (मदावाड़ा पंचायत) में हुई। कंचन बाई का शव पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया। ये कहानी सिर्फ़ हादसे की नहीं, बल्कि एक आम महिला के असाधारण साहस की है। आइए पूरी घटना, कंचन बाई के परिवार, गांव की प्रतिक्रिया, मधुमक्खी हमलों के खतरे और बचाव के तरीकों को विस्तार से समझते हैं।
घटना का पूरा विवरण: कैसे बचीं 20 जिंदगियां?
नीमच जिला मध्य प्रदेश का एक ग्रामीण इलाका है, जहां आंगनवाड़ी सेंटर्स बच्चों के पोषण और खेलकूद का केंद्र होते हैं। सोमवार दोपहर करीब 20 बच्चे आंगनवाड़ी भवन के बाहर खेल रहे थे। पास के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता था। अचानक झुंड बाहर आ गया।
गांववालों के मुताबिक, बच्चे घबरा गए। चीखने लगे। कंचन बाई उसी वक्त वहां थीं। बिना सोचे–समझे दौड़ पड़ीं। पास पड़ी तिरपाल (टार्पॉलिन) और फर्श की चटाई उठाई। एक–एक बच्चे को लपेटा, खुद को ढाल बनाकर अंदर कमरे में धकेला। आखिरी बच्चा सेफ होते ही झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। सैकड़ों डंक मारे।
गांववाले दौड़े। कांस्टेबल कलुनाथ और पायलट राजेश राठौर ने उन्हें CHC ले जाया। लेकिन डॉक्टरों ने ब्रॉट डेड घोषित किया। पोस्टमॉर्टम मंगलवार को हुआ। शव पर असंख्य डंक के निशान।
20 बच्चे बिल्कुल सेफ। कोई चोट नहीं। कंचन बाई ने अपनी जान देकर बचाई।
कंचन बाई कौन थीं? परिवार का हाल
कंचन बाई मेघवाल ‘जय माता दी’ SHG की प्रेसिडेंट थीं। आंगनवाड़ी में खाना बनातीं। परिवार: पति शिवलाल लकवाग्रस्त, बेटा और दो बेटियां। कंचन ही घर चलातीं। SHG से थोड़ी कमाई।
परिजन सदमे में। बेटे ने कहा – “मां बच्चों को बहुत प्यार करती थीं।” गांववालों ने प्रशासन से मांग की – छत्ता हटवाएं, परिवार को आर्थिक मदद दें।
गांव और प्रशासन की प्रतिक्रिया
रानपुर गांव शोक में डूबा। ग्राम पंचायत ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखी। CMO नीमच ने जांच के आदेश दिए। महिला एवं बाल विकास विभाग ने शोक संदेश जारी।
कलेक्टर ने कहा – परिवार को हर संभव मदद। छत्ता तुरंत हटवाया जाएगा।
5 FAQs
प्रश्न 1: कंचन बाई ने क्या किया?
उत्तर: नीमच के रानपुर आंगनवाड़ी में मधुमक्खी झुंड से 20 बच्चों को चादर–चटाई से ढककर बचाया। खुद सैकड़ों डंक झेलकर शहीद।
प्रश्न 2: घटना कब–कहां हुई?
उत्तर: 2 फरवरी 2026, मध्य प्रदेश नीमच जिले रानपुर गांव (मदावाड़ा पंचायत) आंगनवाड़ी सेंटर।
प्रश्न 3: कंचन बाई का परिवार?
उत्तर: पति शिवलाल लकवाग्रस्त। एक बेटा, दो बेटियां। कंचन SHG ‘जय माता दी’ चलातीं।
प्रश्न 4: मधुमक्खी डंक से मौत क्यों?
उत्तर: सैकड़ों डंक से एनाफिलेक्सिस, शॉक। 500+ डंक घातक।
प्रश्न 5: बचाव कैसे करें?
उत्तर: डंक निकालें, बर्फ लगाएं। एलर्जी पर एपिपेन। कई डंक पर डॉक्टर। छत्ते हटवाएं।
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