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गुजरात वोटर लिस्ट से 77 लाख नाम क्यों गायब? SIR ने क्या साफ किया

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Gujarat SIR voter revision 2026
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चुनाव आयोग ने गुजरात की अंतिम वोटर लिस्ट जारी की, SIR के बाद 77.6 लाख नाम हटे, कुल वोटर 4.40 करोड़। 5.6 लाख नए जुड़े। ड्राफ्ट से फाइनल में 3.9 लाख और डिलीट।

अहमदाबाद में 49 लाख वोटर, सूरत में सबसे ज्यादा डिलीट – SIR का असर क्या?

गुजरात SIR का नतीजा: वोटर लिस्ट से 77 लाख नाम गए, कुल संख्या 13% घटी

चुनाव आयोग ने 17 फरवरी 2026 को गुजरात की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के बाद राज्य के कुल वोटर 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गए, यानी 13.4 प्रतिशत की कमी। ड्राफ्ट सूची (19 दिसंबर 2025) में 4.34 करोड़ थे, फाइनल में 5.6 लाख नए जुड़े लेकिन 3.9 लाख और नाम हटे। SIR अक्टूबर 2025 से चला, 50 हज़ार BLO ने डोर-टू-डोर सर्वे किया। 4.34 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज्ड। CEO हरित शुक्ला ने कहा पारदर्शिता बरती गई। राजनीतिक दल को सूची मिली, पब्लिक चेक कर सकती।

ड्राफ्ट से फाइनल तक: दो चरणों में नाम हटे, कारण क्या रहे?

पहले चरण में ड्राफ्ट जारी करते समय 73.7 लाख नाम हटे। मौत के रिकॉर्ड, माइग्रेशन, गलत रजिस्ट्रेशन चेक। ड्राफ्ट में 4.34 करोड़ वोटर। ऑब्जेक्शन के बाद दूसरे चरण में 3.9 लाख और डिलीट। कुल 77.6 लाख नाम गए। कारण: 40 लाख स्थायी माइग्रेंट, 18 लाख मृत, 9.8 लाख ट्रेस नहीं हुए, 3.8 लाख डुप्लीकेट ID। 1.9 लाख अन्य। जनवरी 1 क्वालीफाइंग डेट। शहरी इलाकों में ज्यादा प्रभाव।

जिलों में असर: सूरत सबसे ज्यादा डिलीशन, अहमदाबाद सबसे ज्यादा ऐड

अहमदाबाद में सबसे ज्यादा वोटर 49.1 लाख, ड्राफ्ट के 48 लाख से बढ़े। 1.53 लाख नए जुड़े। सूरत में 1.01 लाख ऐड लेकिन 85,734 डिलीट, सबसे ज्यादा। राजकोट 53,517 ऐड, वडोदरा 47,070, भावनगर 40,074। डिलीशन में बनासकांठा (21,710), सुरेंद्रनगर (21,415), राजकोट (20,096)। शहरी जिलों में माइग्रेशन ज्यादा। ग्रामीण में कम।

कांग्रेस ने HC में चुनौती दी: SIR में नियम तोड़े?

दो कांग्रेस नेता विपुल उद्धवाला और विनोद पाटिल ने सूरत से गुजरात HC में याचिका दाखिल की। आरोप SIR में रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 का उल्लंघन, मनमानी डिलीशन। जनवरी 24 नोटिस दिया। गुजरात कांग्रेस चीफ अमित चावड़ा ने CEO को पत्र लिखा। HC ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया। कांग्रेस का कहना मतदाता अधिकार प्रभावित। CEO ने पारदर्शिता का दावा।

SIR प्रक्रिया: कैसे चली, ऑब्जेक्शन कैसे?

SIR 27 अक्टूबर से चला। डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन। ड्राफ्ट 19 दिसंबर। क्लेम-ऑब्जेक्शन 18 जनवरी तक। फाइनल 17 फरवरी। डिजिटाइजेशन, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने मदद की। CEO पोर्टल पर चेक। डिलीट नामों के कारण बताए। राजनीतिक दलों को सूची दी।

शहरी इलाकों में ज्यादा प्रभाव: माइग्रेशन का बोलबाला

गुजरात में शहरीकरण तेज़, इसलिए सूरत-अहमदाबाद में डिलीशन ज्यादा। 40 लाख माइग्रेंट शायद दूसरे शहर या राज्य चले गए। डुप्लीकेट ID से साफ। मृत नाम हटना सामान्य। पारदर्शिता से विश्वास बढ़ा। आने वाले चुनावों में सटीक लिस्ट।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: BJP ने सफाई दी

BJP ने कहा SIR पारदर्शी था, डेड-माइग्रेंट नाम साफ जरूरी। कांग्रेस का HC केस राजनीतिक। CEO ने कहा नियम फॉलो। फाइनल लिस्ट पब्लिक। मतदाता चेक करें।

कुल मिलाकर SIR का असर

SIR से वोटर लिस्ट साफ हुई। 13% कमी लेकिन 5.6 लाख नए। गुजरात अब तैयार।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: गुजरात SIR के बाद वोटर संख्या क्या बची?
    उत्तर: कुल 4.40 करोड़ 30 हज़ार 725 वोटर, 13.4% कमी।
  2. प्रश्न: कितने नाम हटे?
    उत्तर: कुल 77.6 लाख, ड्राफ्ट में 73.7 लाख, फाइनल से पहले 3.9 लाख।
  3. प्रश्न: डिलीशन के मुख्य कारण?
    उत्तर: 40 लाख माइग्रेंट, 18 लाख मृत, 9.8 लाख अनट्रेस्ड, 3.8 लाख डुप्लीकेट।
  4. प्रश्न: सबसे ज्यादा ऐड कहाँ?
    उत्तर: अहमदाबाद 1.53 लाख, सूरत 1.01 लाख।
  5. प्रश्न: कांग्रेस ने क्या किया?
    उत्तर: HC में याचिका, SIR में नियम उल्लंघन का आरोप।

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