PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट 2026 में कहा कि AI नागरिकों को सशक्त बनाकर भारत की 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा तेज करेगा। उन्होंने TB/डायबिटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती पहचान, ग्रामीण शिक्षा, खेती‑डेयरी, भारतीय भाषाओं और डीपफेक से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
“भारत टॉप-3 AI सुपरपावर बने” – आत्मनिर्भर AI पर मोदी का फोकस, डीपफेक से सुरक्षा तक गार्डरेल
AI भारत की 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की रफ्तार बढ़ाएगा: PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट 2026 में बताया रोडमैप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की 2047 तक “विकसित राष्ट्र” बनने की यात्रा को तेज करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान ANI को दिए बयान में उन्होंने इसे एक “सभ्यतागत मोड़” बताया और कहा कि यह तकनीक सिर्फ नई मशीनों या ऐप्स की बात नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक सशक्तिकरण पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
PM मोदी ने समिट की सोच को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के विचार से जोड़ते हुए कहा कि इनोवेशन का असली मकसद “सबका कल्याण, सबका सुख” होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि डिजिटल प्रगति इंसानों की सेवा करे, उन्हें पीछे न छोड़े—खासकर वे लोग जो अक्सर टेक्नोलॉजी की दौड़ में छूट जाते हैं।
AI और 2047 का लक्ष्य: टेक्नोलॉजी नहीं, नागरिक सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री ने साफ कहा, “यह AI है जो नागरिकों को वास्तव में सशक्त बनाता है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की हमारी यात्रा को गति देता है।” उनके मुताबिक, AI का उद्देश्य “टेक्नोलॉजी के लिए टेक्नोलॉजी” नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी में ठोस बदलाव लाना है।
उन्होंने यह भी बताया कि AI का इस्तेमाल अब सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट तक सीमित नहीं रहा। सरकार और संस्थान इसे ऐसे तरीकों से लागू कर रहे हैं, जिससे सामाजिक और भौगोलिक दूरी कम हो, और विकास का लाभ गांव‑कस्बों तक पहुंचे।
ग्राउंड पर AI के उदाहरण: स्वास्थ्य, शिक्षा, खेती और विरासत
PM मोदी ने कुछ ऐसे उदाहरण गिनाए जिनसे पता चलता है कि AI के उपयोग अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रासरूट हेल्थ सेंटर्स में TB (ट्यूबरकुलोसिस) और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में AI मदद कर रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीण स्कूलों के छात्रों के लिए भारतीय भाषाओं में कस्टमाइज्ड लर्निंग टूल्स की बात कही। उनका कहना था कि जब पढ़ाई बच्चे की भाषा में और उसकी जरूरत के मुताबिक होती है, तो सीखना आसान और असरदार बनता है।
खेती और डेयरी सेक्टर में उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी महिलाओं के जरिए चलने वाले डेयरी प्रोडक्शन को गाइड कर रही है, और किसानों को मिट्टी व मौसम से जुड़े जरूरी संकेत (soil and weather insights) मिल रहे हैं, जिससे फैसले बेहतर हो सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने प्राचीन पांडुलिपियों (ancient manuscripts) को संरक्षित करने में डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल का भी जिक्र किया।
इंक्लूसिव AI: डेटा और भाषा में विविधता क्यों जरूरी है?
प्रधानमंत्री ने यह भी माना कि अगर AI सिस्टम सावधानी से डिजाइन न हों, तो वे समाज में मौजूद असमानताओं की नकल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे डेटासेट जो मुख्य रूप से अंग्रेजी या शहरी संदर्भों पर आधारित हों, वे भारत की भाषा‑संस्कृति और विविधता को सही तरह से नहीं समझ पाएंगे।
इसी को सुधारने के लिए उन्होंने कहा कि भारत डेटा और रिसर्च में व्यापक प्रतिनिधित्व (broader representation) को बढ़ावा दे रहा है, ताकि AI ज्यादा निष्पक्ष, ज्यादा उपयोगी और ज्यादा “भारत‑केंद्रित” बन सके।
सेफ्टी और गार्डरेल: डीपफेक, अपराध और दुरुपयोग पर चिंता
PM मोदी ने AI के साथ जुड़े जोखिमों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मानव निगरानी (human oversight) केंद्र में रहनी चाहिए और डीपफेक व आपराधिक दुरुपयोग जैसे खतरों से बचने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर सहयोगी फ्रेमवर्क की जरूरत पर जोर दिया—ताकि सुरक्षा, जवाबदेही और नियमों को लेकर देशों के बीच साझा समझ बने और AI का इस्तेमाल भरोसे के साथ आगे बढ़े।
आत्मनिर्भर AI: भारत को “कंज्यूमर” से “क्रिएटर” बनना होगा
प्रधानमंत्री ने AI को “आत्मनिर्भर भारत” की सोच से जोड़ते हुए कहा कि भारत को सिर्फ AI का उपभोक्ता (consumer) नहीं, बल्कि एडवांस सिस्टम्स का निर्माता (creator) भी बनना चाहिए। उन्होंने लक्ष्य रखा कि “भारत दुनिया के टॉप तीन AI सुपरपावर” में होना चाहिए।
उन्होंने जिस तीन‑स्तंभ (three-fold approach) की बात की, वह है—सॉवरेन्टी, इंक्लूसिविटी और इनोवेशन। इसके लिए घरेलू कंप्यूट क्षमता (compute capacity) मजबूत करना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, रिसर्च संस्थानों का सपोर्ट और डिजिटल स्किल्स का विस्तार जरूरी बताया गया।
नौकरियों का सवाल: डर नहीं, स्किलिंग और री‑स्किलिंग
PM मोदी ने माना कि AI के कारण नौकरी को लेकर लोगों में चिंता है, लेकिन उन्होंने कहा कि इतिहास में हर तकनीकी बदलाव ने नए अवसर भी पैदा किए हैं। उनके मुताबिक, सही स्किलिंग और री‑स्किलिंग के जरिए भारत का “डेमोग्राफिक डिविडेंड” AI युग में भी आगे बढ़ सकता है।
उनका संदेश साफ था—AI का फायदा तभी “सब तक” पहुंचेगा, जब लोगों को नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से तैयार किया जाए और तकनीक का इस्तेमाल कल्याण और अवसर बढ़ाने के लिए हो।
टेबल: PM मोदी के AI रोडमैप के मुख्य बिंदु
FAQs (5)
- PM मोदी ने AI को 2047 के लक्ष्य से कैसे जोड़ा?
उन्होंने कहा कि AI नागरिकों को सशक्त बनाकर भारत की 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा को तेज करेगा और यह टेक्नोलॉजी “meaningful empowerment” पर केंद्रित होनी चाहिए। - PM मोदी ने AI को लेकर कौन सा बड़ा वाक्य कहा?
उन्होंने कहा, “Today, AI stands at a civilisational inflection point.” - मोदी ने AI के कौन‑कौन से उपयोग बताए?
उन्होंने TB और डायबिटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती पहचान, ग्रामीण स्कूलों के लिए भारतीय भाषाओं में लर्निंग टूल्स, डेयरी‑खेती में मार्गदर्शन, मिट्टी‑मौसम संकेत, और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण जैसे उपयोग गिनाए। - AI में बायस (Bias) को लेकर मोदी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि AI सिस्टम सामाजिक असमानताओं को प्रतिबिंबित कर सकते हैं, खासकर जब डेटा मुख्यतः अंग्रेजी या शहरी संदर्भों पर आधारित हो; इसलिए विविध प्रतिनिधित्व जरूरी है। - “आत्मनिर्भर AI” से उनका क्या मतलब है?
PM मोदी के मुताबिक भारत को AI का सिर्फ उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनना चाहिए और लक्ष्य होना चाहिए कि भारत दुनिया के टॉप तीन AI सुपरपावर में शामिल हो—इसके लिए कंप्यूट क्षमता, स्टार्टअप्स, रिसर्च और स्किलिंग मजबूत करनी होगी।
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