बजट 2026–27: 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ़, 7 रेयर डिज़ीज़ जोड़ीं। ट्रॉमा केयर 50% बढ़ेगा, NIMHANS-2, आयुष इंस्टीट्यूट्स। सीधे मरीज़ों को फायदा, लागत कम कैसे होगी, हेल्थकेयर पर पूरा फोकस
17 कैंसर दवाओं पर जीरो ड्यूटी: क्या गरीब मरीज़ों को मिलेगी राहत या सिर्फ़ हेडलाइन?
बजट 2026–27: कैंसर दवाओं पर जीरो ड्यूटी से मरीज़ों को मिलेगी राहत, हेल्थकेयर पर बड़ा फोकस
भारत में कैंसर के मरीज़ों की संख्या हर साल तेज़ी से बढ़ रही है। इलाज का खर्च देखकर लाखों परिवार कर्ज़ के जाल में फँस जाते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026–27 पेश करते हुए एक बड़ा ऐलान किया – 17 कैंसर दवाओं और मेडिसिन्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह माफ़ कर दिया जाएगा।
इससे इन दवाओं की कीमत में 10 से 20 फ़ीसदी तक की कमी आ सकती है, जो मरीज़ों के लिए बड़ी राहत होगी। साथ ही, 7 और दुर्लभ बीमारियों को लिस्ट में जोड़ा गया है, जिनके लिए पर्सनल इम्पोर्ट पर ड्यूटी माफ़ रहेगी। ट्रॉमा केयर और मेंटल हेल्थ पर भी नए कदम। आइए इन सभी घोषणाओं को डिटेल में समझें, कितना असर पड़ेगा और मरीज़ों को क्या फायदा होगा।
कैंसर दवाओं पर ड्यूटी माफ़ का पूरा प्लान
वित्त मंत्री ने संसद में कहा, “कैंसर के मरीज़ों को राहत देने के लिए मैं 17 दवाओं या मेडिसिन्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ़ करने का प्रस्ताव करती हूँ।” ये दवाएँ मुख्य रूप से इम्पोर्टेड होती हैं, जिनकी कीमत में कस्टम ड्यूटी का बड़ा हिस्सा शामिल होता है।
भारत में कैंसर के करीब 14 लाख नए केस हर साल आते हैं। इलाज में कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी वाली दवाएँ सबसे महँगी पड़ती हैं। एक कोर्स का खर्च लाखों में पहुँच जाता है। ड्यूटी माफ़ से आयातक कंपनियाँ कीमतें कम कर सकेंगी।
उदाहरण के तौर पर, अभी एक पॉपुलर टारगेटेड ड्रग की बोतल पर 10% BCD लगता है। माफ़ होने से खुदरा दाम में 5–10% गिरावट संभव। लंबे इलाज वाले मरीज़ों के लिए सालाना लाखों की बचत हो सकती है।
7 रेयर डिज़ीज़ को भी लिस्ट में जोड़ा गया। इन बीमारियों के लिए स्पेशल फूड, दवाएँ इम्पोर्ट करने पर अब ड्यूटी ज़ीरो। ये फैसला उन परिवारों के लिए वरदान है जो विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं।
ट्रॉमा केयर को 50% बूस्ट: इमरजेंसी में मिलेगी बेहतर सुविधा
मेडिकल इमरजेंसी सबसे बड़ा बोझ डालती है, खासकर गरीब परिवारों पर। वित्त मंत्री ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर कैपेसिटी को 50% बढ़ाया जाएगा। नए सेंटर खोले जाएँगे।
भारत में हर साल लाखों एक्सीडेंट होते हैं। ट्रॉमा केयर की कमी से गोल्डन ऑवर मिस हो जाता है। ये कदम ग्रामीण इलाकों में लाइफ सेविंग साबित हो सकता है। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर CT स्कैन, ICU बेड्स, स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की उपलब्धता बढ़ेगी।
मेंटल हेल्थ पर NIMHANS-2 और अपग्रेड
उत्तर भारत में कोई नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मेंटल हेल्थकेयर नहीं है। इसके लिए NIMHANS-2 बनाया जाएगा। राँची और तेजपुर के नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स को रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूशन के रूप में अपग्रेड किया जाएगा।
डिप्रेशन, एंग्जायटी, PTSD जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। ये कदम ट्रेनिंग, रिसर्च और ट्रीटमेंट में मदद करेंगे।
आयुष को ग्लोबल लेवल पर पुश: 3 नए AIIA
आयुर्वेद को वैश्विक मान्यता मिली है। कोविड के बाद इसकी डिमांड बढ़ी। वित्त मंत्री ने 3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (AIIA) खोलने का ऐलान किया।
ये इंस्टीट्यूट आयुर्वेदिक टर्शियरी हेल्थकेयर पर फोकस करेंगे। दिल्ली का AIIA पहले से सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस है। AYUSH फार्मेसीज़ और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड किया जाएगा। गुजरात के जामनगर में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को बेहतर बनाया जाएगा।
फायदा – किसानों को हर्बल प्लांट्स उगाने का मौक़ा, एक्सपोर्ट बढ़ेगा।
कैंसर इलाज की वास्तविक लागत और ड्यूटी माफ़ से राहत
भारत में कैंसर ट्रीटमेंट का औसत खर्च:
- स्टेज 1–2: 5–15 लाख प्रति साल
- स्टेज 3–4: 20–50 लाख या ज़्यादा
इम्पोर्टेड दवाएँ 40–60% खर्च कवर करती हैं। BCD माफ़ से 5–15% कुल बचत संभव। जेनेरिक बनने पर और सस्ता।
सरकारी स्कीम्स – आयुष्मान भारत, PM-JAY से कवरेज बढ़ रहा है, लेकिन प्राइवेट मरीज़ों को यह राहत मायने रखेगी।
रेयर डिज़ीज़ पर फोकस: क्या बदलाव आएगा?
रेयर डिज़ीज़ के मरीज़ों के लिए दवाएँ दुर्लभ और महँगी। पर्सनल इम्पोर्ट पर ड्यूटी माफ़ से परिवारों का बोझ कम। नई लिस्ट में 7 बीमारियाँ जोड़ी गईं – जैसे कुछ जेनेटिक डिसऑर्डर्स।
ट्रॉमा केयर अपग्रेड का ग्रामीण असर
डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में 50% कैपेसिटी बढ़ोतरी से:
- एक्सीडेंट केस में तुरंत CT/MRI
- सर्जरी थिएटर और ICU बेड्स
- ट्रेंड स्टाफ
मेंटल हेल्थ: NIMHANS-2 से उत्तर भारत में टेली-मेंटल हेल्थ, ट्रेनिंग बढ़ेगी।
आयुष का एक्सपोर्ट एंगल
आयुर्वेद एक्सपोर्ट 2025 में 5,000 करोड़ पार। नए इंस्टीट्यूट्स से क्वालिटी प्रोडक्ट्स, किसानों को आय।
बजट का हेल्थ सेक्टर पर कुल असर
हेल्थ बजट में बढ़ोतरी से प्रिवेंटिव केयर, डायग्नोस्टिक्स पर फोकस। लेकिन इम्प्लीमेंटेशन चैलेंज – डॉक्टर शॉर्टेज, इंफ्रास्ट्रक्चर।
मरीज़ टिप्स: ड्यूटी माफ़ के बाद कैसे फायदा लें?
- डॉक्टर से पूछें कि दवा लिस्टेड है या नहीं
- ऑनलाइन पोर्टल चेक करें अपडेट
- जेनेरिक ऑप्शन्स देखें
5 FAQs
प्रश्न 1: बजट 2026 में कैंसर मरीज़ों के लिए क्या बड़ा ऐलान हुआ?
उत्तर: 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ़। इससे दवाओं की कीमत 10–20% कम हो सकती है। साथ ही 7 रेयर डिज़ीज़ जोड़ी गईं पर्सनल इम्पोर्ट ड्यूटी वेवर लिस्ट में।
प्रश्न 2: ट्रॉमा केयर पर क्या प्लान है?
उत्तर: डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर कैपेसिटी को 50% बढ़ाया जाएगा। नए सेंटर खोले जाएँगे, ताकि एक्सीडेंट जैसे केस में तुरंत बेहतर इलाज मिले।
प्रश्न 3: मेंटल हेल्थ के लिए क्या नया होगा?
उत्तर: उत्तर भारत में NIMHANS-2 बनेगा। राँची और तेजपुर के नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स को रीजनल एपेक्स बनाया जाएगा।
प्रश्न 4: आयुष को कितना पुश मिला बजट में?
उत्तर: 3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (AIIA)। AYUSH फार्मेसीज़, ड्रग टेस्टिंग लैब्स अपग्रेड। जामनगर WHO सेंटर बेहतर होगा। ग्लोबल डिमांड पूरी करने को।
प्रश्न 5: इन बदलावों से कैंसर इलाज कितना सस्ता होगा?
उत्तर: इम्पोर्टेड दवाओं पर 10–20% BCD माफ़ से प्रति कोर्स 20,000–1 लाख तक बचत संभव। लेकिन जेनेरिक और सरकारी स्कीम्स के साथ मिलाकर कुल राहत और बढ़ेगी।
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