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व्हाट्सऐप को CJI सूर्यकांत का अल्टीमेटम – “हमारा डेटा शेयर मत करो, वरना भारत छोड़ दो!”

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CJI Surya Kant WhatsApp warning
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CJI सूर्यकांत ने व्हाट्सऐप-मेटा को फटकारा – “हमारी प्राइवेसी से मत खेलो, एक डिजिट डेटा शेयर नहीं। कानून न मानो तो भारत छोड़ दो!” 2021 पॉलिसी, CCI 213 करोड़ फाइन, NCLAT रूलिंग, सुप्रीम कोर्ट हियरिंग का पूरा केस, डेटा प्रोटेक्शन लॉ और यूज़र राइट्स।

व्हाट्सऐप पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का धमाका: 213 करोड़ फाइन, डेटा शेयरिंग बैन क्यों?

व्हाट्सऐप को CJI सूर्यकांत का कड़ा संदेश – “हमारी प्राइवेसी से मत खेलो, कानून न मानो तो भारत छोड़ दो”

सोशल मीडिया का ज़माना है, हर कोई व्हाट्सऐप पर चैट करता है, फोटो शेयर करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका ये डेटा दूसरे ऐप्स में कैसे बिक रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 3 फरवरी 2026 को मेटा (व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा – “तुम देश की प्राइवेसी से नहीं खेल सकते। हम एक डिजिट भी शेयर नहीं होने देंगे। अगर हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दो।”

ये सुनते ही वकील मुकुल रोहतगी और अकील सिबल (मेटा के वकील) के कान खड़े हो गए। केस व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी का है, जिसमें CCI ने 213 करोड़ का फाइन लगाया था। NCLAT ने फाइन तो बरकरार रखा लेकिन 5 साल का डेटा शेयरिंग बैन हटा दिया। अब SC ने साफ कहा – डेटा कमर्शियल यूज़ के लिए नहीं।

ये सिर्फ़ एक सुनवाई नहीं, बल्कि भारत में डिजिटल प्राइवेसी की जंग का बड़ा मोड़। आइए स्टेप बाय स्टेप समझें – केस क्या, CJI ने क्या कहा, पॉलिसी का सच और आगे क्या होगा।

केस की शुरुआत: व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी क्या थी?

2021 में व्हाट्सऐप ने पॉलिसी अपडेट की। मुख्य पॉइंट – यूज़र्स को दो फेसबुक (अब मेटा) कंपनियों के साथ डेटा शेयर करने की ‘कंसेंट’ ले ली। अगर न मानें तो चैटिंग बंद।

  • बिज़नेस अकाउंट्स से डेटा शेयर (ट्रांजेक्शन, लोकेशन)।
  • मेटा के दूसरे ऐप्स (फेसबुक, इंस्टा) में यूज़र बिहेवियर के लिए।
  • एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन रहता है, लेकिन मेटाडेटा (कौन किससे बात कर रहा, कब, कितनी बार) शेयर।

भारत में 50 करोड़+ यूज़र्स। CCI ने इसे ‘अब्यूज़ ऑफ डोमिनेंस’ कहा – क्योंकि व्हाट्सऐप का कोई अल्टरनेटिव नहीं, यूज़र्स मजबूर।

CCI ने नवंबर 2024 में 213.14 करोड़ फाइन लगाया। 5 साल डेटा शेयरिंग बैन। सीज़ एंड डेसिस्ट ऑर्डर।

NCLAT ने नवंबर 2025 में फाइन बरकरार रखा लेकिन बैन हटा दिया। कहा – पॉलिसी अब्यूज़ नहीं। मेटा ने पेनल्टी जमा कर दी।

सुप्रीम कोर्ट में अपील – और CJI का धमाका

3 फरवरी 2026 को CJI सूर्यकांत, जस्टिस ज्योमल्या बागची और विपुल पंचोली की बेंच ने सुनवाई की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गवर्नमेंट की तरफ से पॉलिसी को ‘एक्सप्लॉइटेटिव’ कहा।

CJI ने तीखे सवाल किए:

  • “ये पॉलिसी इतनी चालाकी से लिखी है कि आम आदमी समझ ही न पाए। तमिलनाडु के गली–मोहल्ले का दुकानदार इसे कैसे पढ़ेगा?”
  • “एंड्रॉइड–iOS यूज़र्स को अलग–अलग दिखाना फेयर नहीं।”
  • “टारगेटेड ऐड्स के लिए डेटा यूज़? मैसेज इनक्रिप्टेड हैं लेकिन बिहेवियर ट्रैकिंग क्यों?”
  • “ये कम्युनिकेशन ऐप है, डेटा बेचने की दुकान नहीं। एक शब्द भी शेयर नहीं होगा।”

CJI ने मेटा को चेतावनी – “हमारी प्राइवेसी से खेलो मत। संविधान न मानो तो भारत छोड़ दो।” कोर्ट ने MeitY को पार्टी बनाया। मेटा को अफिडेविट देने को कहा। अगली सुनवाई 9 फरवरी।

व्हाट्सऐप पॉलिसी का असर: आपका डेटा कैसे बिक रहा?

पॉलिसी कहती है – बिज़नेस चैट्स से डेटा शेयर। लेकिन असल में:

  • ट्रांजेक्शन डेटा, लोकेशन, डिवाइस इंफो।
  • फेसबुक/इंस्टा पर ऐड्स टारगेट।
  • 2021 अपडेट के बाद लाखों यूज़र्स ने सिग्नल/टेलीग्राम शिफ्ट किया।

भारत में डेटा प्रोटेक्शन बिल 2023 लागू, लेकिन डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDPA) अभी फुल एनफोर्स नहीं।

CCI का तर्क: व्हाट्सऐप का 90%+ मार्केट शेयर। ‘टेक इट ऑर लीव इट’ पॉलिसी अब्यूज़।

क्यों CJI इतने सख्त? प्राइवेसी का अधिकार फंडामेंटल

भारत में प्राइवेसी राइट टू लाइफ का हिस्सा (पुट्टास्वामी केस 2017)। SC ने कहा – डेटा प्राइवेसी ज़ीलसली प्रोटेक्टेड।

CJI का पॉइंट:

  • पॉलिसी कॉम्प्लिकेटेड, ऑप्ट-आउट मुश्किल।
  • कमर्शियल गेन यूज़र कंसेंट से ऊपर नहीं।
  • टेक जायंट्स को लोकल लॉ का पालन।

गवर्नमेंट का स्टैंड: सॉलिसिटर मेहता ने कहा – एक्सप्लॉइटेटिव पॉलिसी।

मेटा का बचाव क्या?

वकीलों ने कहा – पेनल्टी जमा। पॉलिसी बिज़नेस कम्युनिकेशन के लिए। प्राइवेट चैट्स इनक्रिप्टेड। लेकिन SC ने खारिज – मेटाडेटा भी प्राइवेसी का हिस्सा।

आगे क्या होगा? अगली सुनवाई 9 फरवरी

SC ने:

  • मेटा को डिटेल्ड रिस्पॉन्स और अफिडेविट।
  • डेटा शेयरिंग कैसे काम करता, क्लियरिंग।
  • इंटरिम डायरेक्शन्स पर विचार।

अगर SC सख्त रहा तो:

  • डेटा शेयरिंग पर बैन।
  • फाइन बढ़ा।
  • पॉलिसी चेंज।

यूज़र्स के लिए टिप्स: प्राइवेसी कैसे बचाएं?

  • दो-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन।
  • प्राइवेसी सेटिंग्स चेक।
  • सिग्नल जैसे अल्टरनेटिव ट्राई।
  • DPDPA आने पर अलर्ट रहें।

ग्लोबल इम्पैक्ट: भारत पहला देश जहां SC ने टेक जायंट को इतना सख्त मैसेज दिया। GDPR यूरोप जैसा।

क्या व्हाट्सऐप भारत छोड़ेगा? नामुमकिन। लेकिन पॉलिसी चेंज तो होगा। ये सुनवाई डिजिटल इंडिया के लिए मील का पत्थर।

5 FAQs

प्रश्न 1: CJI सूर्यकांत ने व्हाट्सऐप को क्या चेतावनी दी?
उत्तर: “देश की प्राइवेसी से मत खेलो। एक डिजिट डेटा शेयर नहीं। संविधान न मानो तो भारत छोड़ दो।” 3 फरवरी 2026 सुनवाई में।

प्रश्न 2: केस का बैकग्राउंड क्या?
उत्तर: 2021 पॉलिसी पर CCI ने 213 करोड़ फाइन, अब्यूज़ ऑफ डोमिनेंस। NCLAT ने फाइन रखा, 5 साल बैन हटाया। SC अपील।

प्रश्न 3: CJI ने पॉलिसी पर क्या आपत्ति की?
उत्तर: “चालाकी से लिखी, आम आदमी न समझे। टेक इट ऑर लीव इट। टारगेटेड ऐड्स के लिए डेटा चोरी।”

प्रश्न 4: अगली सुनवाई कब?
उत्तर: 9 फरवरी 2026। मेटा को अफिडेविट, MeitY पार्टी बनी। इंटरिम ऑर्डर पर विचार।​

प्रश्न 5: यूज़र्स का क्या नुकसान?
उत्तर: डेटा मेटा ऐप्स में शेयर, ऐड्स टारगेट। प्राइवेसी खतरे में। अल्टरनेटिव यूज़ करें।

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