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पर्सनल टैक्स कलेक्शन क्यों बढ़ा? मिडिल क्लास का विस्तार या दबाव – FM का चौंकाने वाला जवाब

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Nirmala Sitharaman middle class, personal income tax collection growth
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राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा, पर्सनल इनकम टैक्स बढ़ना मिडिल क्लास दबाव नहीं बल्कि विस्तार दिखाता है। टैक्सपेयर्स 5.26 करोड़ से 12.13 करोड़ हुए, 12 लाख तक टैक्स–फ्री।

12 लाख तक टैक्स–फ्री, फिर भी मिडिल क्लास दुखी क्यों? सीतारामन ने राज्यसभा में तोड़ा मिथक

राज्यसभा में मिडिल क्लास बहस: विपक्ष का आरोप, FM का डेटा–आधारित जवाब

राज्यसभा में यूनियन बजट 2026-27 पर बहस के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि मिडिल क्लास अमीरों और गरीबों के बीच कुचली जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने गुरुवार को इसका सीधा जवाब देते हुए कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन बढ़ना मिडिल क्लास पर दबाव का सबूत नहीं है। बल्कि यह मिडिल क्लास के ऐतिहासिक विस्तार और अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण (formalisation) का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में मिडिल क्लास की दमन की कोई मिसाल नहीं है, उल्टा सबूत यही हैं कि अब ज्यादा लोग टैक्सेबल इनकम वाली श्रेणी में आ चुके हैं। विपक्ष के सैंडविच थ्योरी को खारिज करते हुए उन्होंने डेटा से समझाया कि अर्थव्यवस्था अब एलीट तक सीमित नहीं रही। मिडिल क्लास की टोकरी चौड़ी हो रही है।

टैक्सपेयर्स की संख्या में जबरदस्त उछाल: आंकड़े क्या कहते हैं?

सीतारामन ने राज्यसभा में साफ आंकड़े पेश किए कि 2013-14 में टैक्सपेयर्स (जिनसे ITR फाइल होते हैं या TDS कटता है) सिर्फ 5.26 करोड़ थे, जो 2024-25 तक 12.13 करोड़ हो गए। पिछले 11 सालों में यह संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है और CAGR 7.9 प्रतिशत रहा। उन्होंने कहा कि यह सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल एक्सपैंशन है, जिसमें ज्यादा लोग फॉर्मल सेक्टर में दिख रहे हैं। पहले अर्थव्यवस्था संकुचित थी लेकिन अब टैक्स नेट खुद चौड़ा हो रहा है। लोग खुद टैक्स भरने के लिए आ रहे हैं, न कि ऊंचे रेट्स की वजह से। अगर टैक्स नेट फैल रहा है तो दमन कैसे हो सकता है। यह बदलाव आर्थिक सुधारों का नतीजा है।

पर्सनल टैक्स कलेक्शन बढ़ा लेकिन कॉर्पोरेट से ज्यादा क्यों?

विपक्ष ने कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन कॉर्पोरेट टैक्स से ज्यादा हो गया, इसलिए मिडिल क्लास दब रही है। सीतारामन ने जवाब दिया कि हाई पर्सनल टैक्स कलेक्शन का मतलब मिडिल क्लास क्रश होना नहीं है। बल्कि ज्यादा लोग टैक्सेबल इनकम ब्रैकेट में आ गए हैं। 2013-14 में कॉर्पोरेट टैक्स ज्यादा था लेकिन अब पर्सनल टैक्स आगे निकल गया क्योंकि बेस वाइडनिंग हुई। उन्होंने डेटा दिखाया कि नई टैक्स रेट्स नहीं बल्कि फॉर्मलाइजेशन से यह हुआ। डेमोक्रेटाइजेशन, GST, आधार–PAN लिंकिंग ने लोगों को सिस्टम में लाया। अब अर्थव्यवस्था एलीट तक सीमित नहीं, मिडिल क्लास का बास्केट वाइड हो रहा।

टैक्स रिलीफ के उपाय: 12 लाख तक टैक्स–फ्री कैसे?

सीतारामन ने जोर देकर कहा कि अगर मिडिल क्लास दब रही होती तो सरकार 12 लाख तक इनकम टैक्स–फ्री कैसे रखती। नई टैक्स रिजीम में हर किसी के लिए 12 लाख और सैलरीड क्लास के लिए 12.75 लाख तक टैक्स–फ्री है। स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ाया गया है। नई रिजीम से फाइलिंग सरल हुई और ड्यू डिलिजेंस कम हुआ। अगर 12.76 लाख तक सैलरीड को टैक्स न देना पड़े तो दमन कहाँ है। उन्होंने कहा कि ये कदम मिडिल क्लास को राहत देते हैं। साथ ही GST रेशनलाइजेशन से घरेलू खर्च घटा क्योंकि कई चीजों पर रेट कम हुए।

मुद्रास्फीति कम, रियल इनकम बढ़ी: दमन का मिथक टूटा

FM ने तर्क दिया कि हिस्टोरिक लो इन्फ्लेशन और बढ़ती रियल इनकम के साथ मिडिल क्लास दमन एक साथ नहीं रह सकता। मुद्रास्फीति रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। GST ने घरेलू खर्च घटाया। वर्कफोर्स में अपवर्ड मोबिलिटी हो रही है। लोग नई जॉब्स, बेहतर सैलरी पा रहे। बजट में शिक्षा से रोजगार तक की योजनाएँ इसी को सपोर्ट करती हैं। विपक्ष का आरोप डेटा से मेल नहीं खाता। आखिर 11 सालों में टैक्स बेस दोगुना होना दमन कैसे दिखाता। यह विकास और फॉर्मलाइजेशन का प्रमाण है।

बजट पर विपक्ष का आरोप: फंड कटौती क्यों?

विपक्ष ने कहा कि कई वेलफेयर स्कीम्स में खर्च कम हुआ। सीतारामन ने खारिज किया कि किसी स्कीम के फंड रोके या बंद नहीं किए गए। स्टेट्स को स्कीम्स में हिस्सेदारी करने को कहा। बजट आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प दिखाता है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य अपने स्टेट गवर्नमेंट्स से कहें कि बजट स्कीम्स में पार्टिसिपेट करें। कोई इनकार या स्टॉपेज नहीं है। यह जवाब विपक्ष के फंड कटौती वाले आरोप को सीधे चुनौती देता है।

मिडिल क्लास विस्तार के पीछे सुधारों की भूमिका

सीतारामन ने पिछले दस सालों के आर्थिक सुधारों को क्रेडिट दिया। डेमोक्रेटाइजेशन ने कैश इकॉनमी को फॉर्मल बनाया। GST ने टैक्स सिस्टम एकीकृत किया। आधार–PAN ने डुप्लिकेट कम किए। डिजिटल पेमेंट्स बढ़े। नतीजा टैक्स बेस का विस्तार। अब सैलरीड और छोटे बिजनेस वाले 94 प्रतिशत रिटर्न फाइल करते हैं। कॉर्पोरेट सिर्फ 2 प्रतिशत। यह लोकतांत्रिककरण है। मिडिल क्लास अब एलीट नहीं, व्यापक हो रही।

क्या मिडिल क्लास अभी भी दुखी है – वास्तविकता?

हालांकि FM के आंकड़े सकारात्मक हैं लेकिन कुछ सर्वे बताते हैं कि मिडिल क्लास महंगाई, हाउसिंग, हेल्थकेयर से परेशान। फिर भी टैक्स बेस बढ़ना पॉजिटिव साइन है। बजट 2026 में और रिलीफ की उम्मीद। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा सकता है। न्यू रिजीम को आकर्षक बनाना। कुल मिलाकर डेटा दिखाता है कि मिडिल क्लास बढ़ रही है। दमन नहीं हो रहा।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: वित्त मंत्री ने मिडिल क्लास दमन के आरोप पर क्या कहा?
    उत्तर: उन्होंने कहा कोई सबूत नहीं, बल्कि मिडिल क्लास का ऐतिहासिक विस्तार हो रहा है, टैक्स बेस चौड़ा होने से पर्सनल टैक्स बढ़ा।
  2. प्रश्न: टैक्सपेयर्स की संख्या कितनी बढ़ी?
    उत्तर: 2013-14 में 5.26 करोड़ से 2024-25 में 12.13 करोड़, 11 सालों में दोगुनी से ज्यादा, CAGR 7.9 प्रतिशत।
  3. प्रश्न: टैक्स–फ्री लिमिट क्या है?
    उत्तर: नई रिजीम में 12 लाख हर किसी के लिए, सैलरीड के लिए 12.75 लाख, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया गया।
  4. प्रश्न: GST और इन्फ्लेशन का मिडिल क्लास पर असर?
    उत्तर: GST रेशनलाइजेशन से घरेलू खर्च घटा, इन्फ्लेशन हिस्टोरिक लो पर, रियल इनकम बढ़ रही।
  5. प्रश्न: वेलफेयर स्कीम्स के फंड पर क्या कहा?
    उत्तर: कोई कटौती या रोक नहीं, स्टेट्स को स्कीम्स में हिस्सेदारी करने को कहा गया।

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