फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने AIIMS में कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा प्रक्रिया सरल करेगा और 2030 तक हर साल 10,000 से बढ़ाकर 30,000 भारतीय छात्रों को प्रवेश देने का लक्ष्य रखा गया है। फ्रांस में इंग्लिश-टॉट कोर्स भी बढ़ेंगे।
फ्रांस में पढ़ाई अब आसान? मैक्रों बोले—वीज़ा प्रक्रिया स्ट्रीमलाइन करेंगे, छात्रों के लिए बेहतर सपोर्ट नेटवर्क बनेगा
फ्रांस का भारतीय छात्रों के लिए बड़ा ऑफर: वीज़ा नियम आसान होंगे, 2030 तक हर साल 30,000 छात्रों का लक्ष्य
क्या हुआ और क्यों यह खबर बड़ी है
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत यात्रा के दौरान भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए वीज़ा प्रक्रिया को सरल और ज्यादा प्रैक्टिकल बनाएगा तथा छात्र सपोर्ट सिस्टम को बेहतर करेगा। सबसे अहम बात यह है कि भारत और फ्रांस ने मिलकर तय किया है कि 2030 तक हर साल फ्रांस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 30,000 की जाएगी।
AIIMS में मैक्रों का बयान: “30,000 प्रति वर्ष”
मैक्रों ने राष्ट्रीय राजधानी में AIIMS कैंपस में कहा कि अभी दोनों देशों के बीच छात्र मोबिलिटी के तहत लगभग 10,000 भारतीय छात्र हर साल फ्रांस जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर इसे 2030 तक 30,000 प्रति वर्ष करने का निर्णय लिया गया है। मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांसीसी पक्ष “sourcing” और वीज़ा प्रक्रिया को सरल करेगा।
वीज़ा प्रक्रिया में क्या बदलाव संकेतित हैं
मैक्रों के अनुसार, फ्रांस छात्रों की “expectations” के हिसाब से अप्रोच को स्ट्रीमलाइन करेगा, ताकि पूरा प्रोसेस ज्यादा व्यावहारिक बने। उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस बेहतर कनेक्शंस स्थापित करेगा ताकि छात्रों को अधिक प्रभावी सपोर्ट मिल सके। इस बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में वीज़ा अपॉइंटमेंट, डॉक्यूमेंटेशन, यूनिवर्सिटी-टू-वीज़ा लिंक और ऑन-ग्राउंड हेल्प डेस्क जैसे हिस्सों में सुधार हो सकता है।
फ्रांस में इंग्लिश-टॉट (English-taught) कोर्स क्यों अहम हैं
बहुत से भारतीय छात्र फ्रेंच भाषा की वजह से फ्रांस को “दूसरा विकल्प” मानते रहे हैं, जबकि यूरोप में कई देशों में इंग्लिश प्रोग्राम्स पहले से ज्यादा हैं। इसी गैप को भरने के लिए मैक्रों ने कहा कि फ्रांस अलग-अलग अप्रोच के जरिए इंग्लिश में पढ़ाई के विकल्प ऑफर कर सकता है। उन्होंने फ्रांस की “best-in-class teaching” और मजबूत रिसर्च सेंटर्स का भी जिक्र किया, जहां इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग मिलता है।
AIIMS में Indo-French Campus on AI in Global Health: शिक्षा + टेक का नया ब्रिज
मैक्रों ने यूनियन हेल्थ मिनिस्टर जे.पी. नड्डा के साथ AIIMS में “Indo-French Campus on AI in Global Health” का उद्घाटन भी किया। यह पहल AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस, जॉइंट रिसर्च, इनोवेशन और क्षमता निर्माण (capacity building) को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई है। इसका मतलब यह है कि शिक्षा सहयोग केवल स्टूडेंट इंटेक तक नहीं, बल्कि उभरती टेक्नोलॉजी और हेल्थ रिसर्च जैसे क्षेत्रों में गहराई तक जा रहा है।
2030 का लक्ष्य: 10,000 से 30,000 — एक नजर में
नीचे एक सरल टेबल से यह समझना आसान है कि मैक्रों का प्लान किस दिशा में जाता है:
टेबल: फ्रांस का भारतीय छात्रों के लिए रोडमैप (घोषित लक्ष्य)
| बिंदु | अभी (मैक्रों के अनुसार) | लक्ष्य | समयसीमा |
|---|---|---|---|
| फ्रांस जाने वाले भारतीय छात्र | 10,000 प्रति वर्ष | 30,000 प्रति वर्ष | 2030 |
| वीज़ा प्रक्रिया | मौजूदा व्यवस्था | “simplify” + “streamline” | जल्द/आने वाले वर्षों में |
| पढ़ाई की भाषा विकल्प | फ्रेंच + कुछ इंग्लिश प्रोग्राम | इंग्लिश-टॉट कोर्स बढ़ेंगे | 2030 रोडमैप के साथ |
भारतीय छात्रों के लिए प्रैक्टिकल मतलब: किसे फायदा हो सकता है
यह घोषणा खासकर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो यूरोप में पढ़ना चाहते हैं लेकिन UK/US/Canada की लागत या वीज़ा अनिश्चितता के कारण विकल्प देख रहे हैं। यदि फ्रांस का वीज़ा प्रोसेस वास्तव में आसान होता है और इंग्लिश-टॉट कोर्स बढ़ते हैं, तो STEM, मैनेजमेंट, हेल्थ, डेटा/AI, डिजाइन और रिसर्च ट्रैक के छात्रों को ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।
क्या तैयारी करें: आवेदन करने से पहले 8 जरूरी कदम
- कोर्स की भाषा और क्रेडेंशियल पहले चेक करें (English-taught या French track)।
- यूनिवर्सिटी/प्रोग्राम की रिसर्च प्रोफाइल देखें, खासकर अगर मास्टर्स/PhD लक्ष्य हो।
- वीज़ा टाइमलाइन को ध्यान में रखकर 8–12 महीने पहले प्लानिंग करें।
- SOP/LoR को अपने डोमेन प्रोजेक्ट्स और स्किल्स से जोड़ें।
- फंडिंग: ट्यूशन + रहने का खर्च + बीमा + ट्रैवल का रियल बजट बनाएं।
- बेसिक फ्रेंच सीखना शुरू करें (भले ही कोर्स इंग्लिश में हो, दैनिक जीवन आसान होता है)।
- इंटरनशिप और पार्ट-टाइम नियमों को पहले समझें।
- AI/Healthcare जैसी थीम में जाना हो तो AIIMS वाले Indo-French कैंपस और सहयोगी रिसर्च अवसरों पर नजर रखें।
5 FAQs
- फ्रांस ने भारतीय छात्रों के लिए क्या बड़ा ऐलान किया?
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा प्रक्रिया सरल करेगा और 2030 तक हर साल भारतीय छात्रों का इंटेक 10,000 से बढ़ाकर 30,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। - यह घोषणा कहां की गई?
इमैनुएल मैक्रों ने यह बात नई दिल्ली में AIIMS कैंपस में कही। - वीज़ा प्रक्रिया में क्या बदलने की बात कही गई है?
मैक्रों के अनुसार, फ्रांस “sourcing” और “visa process” को simplify करेगा तथा छात्रों की अपेक्षाओं के अनुसार अप्रोच को streamline करके इसे ज्यादा practical बनाएगा। - फ्रांस में इंग्लिश-टॉट कोर्स बढ़ाने का क्या मतलब है?
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों को इंग्लिश में भी अलग-अलग अप्रोच और विकल्प देगा, यानी इंग्लिश में पढ़ाई के अवसर बढ़ाने पर जोर होगा। - AIIMS में Indo-French Campus on AI in Global Health क्यों बनाया गया?
यह पहल AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशंस, संयुक्त रिसर्च, इनोवेशन और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है, ताकि भारत-फ्रांस सहयोग उभरती तकनीकों में भी बढ़े।
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