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यूनियन बजट 2026 पर ममता का तीखा हमला: “बंगाल को एक पैसा भी नहीं, झूठ का पुलिंदा!”

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Mamata Banerjee budget criticism
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ममता बनर्जी ने यूनियन बजट 2026-27 को ‘दिशाहीन, दृष्टिहीन, एंटी-पीपल’ बताया। बंगाल को कुछ नहीं मिला, 2 लाख करोड़ बकाया, GST फंड्स रोकना, इकोनॉमिक कॉरिडोर पर झूठा क्रेडिट। बजट हाइलाइट्स, बंगाल का हिस्सा, राजनीतिक कोण और केंद्र-राज्य विवाद की पूरी कहानी।

बजट में बंगाल को कुछ नहीं मिला, 2 लाख करोड़ बकाया: ममता का केंद्र पर जोरदार प्रहार क्यों?

यूनियन बजट 2026 पर ममता बनर्जी का तीखा प्रहार: बंगाल को एक पैसा भी नहीं मिला!

1 फरवरी 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना होने से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूनियन बजट 2026-27 पर ज़ोरदार हमला बोला। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पेश किए बजट को “दिशाहीन, दृष्टिहीन, एक्शनलेस और एंटी-पीपल” करार दिया। ममता का कहना था कि यह बजट आम आदमी, महिलाओं, किसानों, शिक्षा और SC/ST/OBC वर्गों के खिलाफ़ है। बंगाल को इसमें कुछ नहीं मिला।

ममता ने कहा, “यह बजट सिर्फ़ शब्दों का जुगाड़ है। बड़े–बड़े ऐलान करते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं होता। बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया। GST का एक ही टैक्स है, वो हमारा पैसा ले जाते हैं और देते कुछ नहीं।” उन्होंने केंद्र पर बंगाल के 2 लाख करोड़ से ज़्यादा के बकाये रोकने का आरोप लगाया।

यह हमला बंगाल विधानसभा चुनाव के ठीक पहले आया है, जहाँ TMC और BJP के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है। आइए इस पूरे विवाद को स्टेप बाय स्टेप समझते हैं – बजट के मुख्य ऐलान क्या थे, ममता ने क्या आपत्ति जताई, बंगाल को क्या मिला या नहीं मिला, और इसके पीछे राजनीतिक चाल क्या है।

यूनियन बजट 2026-27 के मुख्य हाइलाइट्स: क्या कहा गया?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में बजट पेश किया। यह मोदी सरकार 3.0 का दूसरा पूर्ण बजट था। मुख्य फोकस था – मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, एक्सपोर्ट बूस्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME सपोर्ट और फिस्कल डिसिप्लिन।

कुछ बड़े ऐलान:

  • FY26 कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाकर ₹50.65 लाख करोड़।
  • FY25 फिस्कल डेफिसिट 4.8%, FY26 टारगेट 4.4%।
  • नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन: फुटवियर, टॉयज, सोलर PV सेल्स पर फोकस।
  • MSME के लिए क्रेडिट गारंटी ₹10 करोड़ तक डबल। स्टार्टअप्स के लिए ₹10,000 करोड़ फंड।
  • गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी, ID कार्ड्स।
  • राज्यों को 50 साल ब्याज-मुक्त लोन ₹1.5 लाख करोड़।
  • 10,000 नए मेडिकल सीट्स, कैंसर डे-केयर सेंटर्स।
  • किसानों के लिए पल्सेस, फिशरीज़ मिशन। बिहार के लिए मखाना बोर्ड।
  • तीन इकोनॉमिक कॉरिडोर्स का ज़िक्र।

बजट में टैक्स स्लैब्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं, लेकिन EV, मोबाइल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर छूट।

ममता बनर्जी का हमला: बजट ‘हंप्टी डंप्टी’ और ‘झूठ का पुलिंदा’

ममता ने बजट को “हंप्टी डंप्टी बजट” कहा – यानी जो टूटा हुआ, बिखरा हुआ है। उनका कहना था:

  • एंटी-वुमन, एंटी-फार्मर, एंटी-एजुकेशन।
  • सोशल सेक्टर, फर्टिलाइज़र सब्सिडी कम।
  • बंगाल को कुछ नहीं।

खास तौर पर तीन इकोनॉमिक कॉरिडोर्स पर तीखा प्रहार: “ये झूठ का कचरा है। ये प्रोजेक्ट्स पहले से चल रहे हैं। हमने शुरू किए हैं।” उदाहरण दिया पुरुलिया के जंगलमहल जंगल सुंदरी प्रोजेक्ट का, जहाँ 72,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट प्लान हो चुका है।​

GST ड्यूज़ पर ज़ोर: “बंगाल को 2 लाख करोड़ से ज़्यादा बकाया। केंद्र हमारा पैसा लेता है, लौटाता नहीं। उनका नैतिक अधिकार ही नहीं सरकार चलाने का। वो देश को बर्बाद कर रहे हैं – इकोनॉमी, कांस्टीट्यूशन, फेडरल स्ट्रक्चर सब खत्म कर देंगे।”

ममता ने कहा, “बजट में आम आदमी के लिए कुछ नहीं। सिर्फ़ शब्दों का जुगाड़।”

बजट में बंगाल को क्या मिला – केंद्र का पक्ष

बजट स्पीच में बंगाल का सीधा ज़िक्र कम था। लेकिन ईस्टर्न इंडिया पर फोकस रहा – रेल, हाईवे, पोर्ट्स, अर्बन इंफ्रा। राज्यों को 1.5 लाख करोड़ ब्याज-मुक्त लोन, लेकिन स्टेट-स्पेसिफिक ऐलान कम। बिहार को मखाना बोर्ड जैसे स्पेशल ऐलान मिले।

GST कंपेंसेशन पर केंद्र का स्टैंड: 2022 तक 5 साल का प्रोविज़नल कंपेंसेशन दिया। कोविड लोन चुकाने के लिए सेस जारी। कुछ स्टेट्स (जैसे बंगाल) ने AG सर्टिफिकेट नहीं दिए, इसलिए फाइनल सेटलमेंट पेंडिंग।

बंगाल के बकाये का दावा: ममता का 2 लाख करोड़ का आंकड़ा GST कंपेंसेशन, स्टेट्यूटरी ट्रांसफर्स और अन्य ड्यूज़ का कुल है। केंद्र कहता है कि टैक्स डिवोल्यूशन के हिसाब से बंगाल को उसका शेयर मिल रहा है।

जंगलमहल कॉरिडोर: स्टेट का प्रोजेक्ट, केंद्र ने बजट में री-ऐलान किया? ममता कहती हैं क्रेडिट चोरी।​​

राज्यों के लिए बजट के प्रावधान: क्या बंगाल को नुकसान?

बजट में राज्यों को:

  • 1.5 लाख करोड़ 50-वर्ष ब्याज-मुक्त लोन।
  • 1 लाख करोड़ अर्बन चैलेंज फंड।
  • 25,000 करोड़ मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड।

लेकिन ममता का तर्क – ये जनरल हैं, बंगाल-स्पेसिफिक नहीं। साथ ही केंद्र GST सेस से पैसा लेता है, कम लौटाता।

बंगाल का स्टेट बजट 2025-26: GSDP ₹20.31 लाख करोड़ (12% ग्रोथ), एक्सपेंडिचर ₹3.41 लाख करोड़। लेकिन केंद्र से डिपेंडेंट।

5 FAQs

प्रश्न 1: ममता बनर्जी ने यूनियन बजट 2026 को क्या कहा?
उत्तर: ममता ने इसे “दिशाहीन, दृष्टिहीन, एक्शनलेस, एंटी-पीपल, एंटी-वुमन, एंटी-फार्मर” बताया। हंप्टी डंप्टी बजट कहकर शब्दों का जुगाड़ बताया।

प्रश्न 2: बंगाल को बजट में क्या नहीं मिला, ममता के अनुसार?
उत्तर: कुछ भी नहीं। 2 लाख करोड़ बकाया GST कंपेंसेशन, स्टेट्यूटरी फंड्स। इकोनॉमिक कॉरिडोर्स पर क्रेडिट चोरी का आरोप।

प्रश्न 3: जंगलमहल कॉरिडोर पर ममता का क्या कहना है?
उत्तर: केंद्र का ऐलान झूठा। स्टेट ने पहले ही शुरू किया, 72,000 करोड़ इन्वेस्टमेंट प्लान।

प्रश्न 4: यूनियन बजट 2026 के मुख्य ऐलान क्या थे?
उत्तर: मैन्युफैक्चरिंग मिशन, MSME क्रेडिट गारंटी डबल, गिग वर्कर्स सिक्योरिटी, राज्यों को 1.5 लाख करोड़ लोन, 10,000 मेडिकल सीट्स।

प्रश्न 5: क्या बंगाल को बजट में कुछ मिला?
उत्तर: डायरेक्ट ऐलान कम, लेकिन ईस्टर्न इंफ्रा पर फोकस। GST ड्यूज़ पेंडिंग AG सर्टिफिकेट के कारण। केंद्र कहता है डिवोल्यूशन से शेयर मिल रहा।

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