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कर्नाटक में EVM खत्म, बैलट पेपर से पंचायत चुनाव? क्या ये विपक्ष को मात देगा

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कर्नाटक कैबिनेट ने पंचायत, नागरिक निकाय चुनावों के लिए बैलट पेपर मंजूर किए, EVM खत्म। HK पाटिल ने EVM पर भरोसे की कमी बताई। बेंगलुरु, ग्रामीण पंचायतों पर असर, ग्राम स्वराज बिल, चुनावी रोल रिवीजन। फायदे नुकसान राजनीतिक मतलब विस्तार से।

बेंगलुरु पंचायत चुनाव अब कागज़ के बैलट से: कांग्रेस सरकार का मास्टरस्ट्रोक या जोखिम

कर्नाटक कैबिनेट का बड़ा फैसला: पंचायत, नगर निगम चुनाव अब बैलट पेपर से

कर्नाटक सरकार ने लोकल बॉडी चुनावों को लेकर एक ऐसा कदम उठाया है जो पूरे देश की नज़रों में आ गया है। 6 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की कैबिनेट ने पंचायत और नगर निगम चुनावों में ईवीएम की जगह बैलट पेपर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि जनता में ईवीएम पर भरोसे की कमी हो गई है इसलिए पारदर्शिता के लिए ये ज़रूरी था। ये फैसला ग्रामीण पंचायतों से लेकर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी तक लागू होगा। कांग्रेस सरकार इसे लोकतंत्र को मज़बूत करने वाला कदम बता रही है लेकिन विपक्ष इसे चुनावी चाल कह रहा। आइए इस फैसले के हर पहलू को विस्तार से समझें।

EVM पर भरोसे की कमी: मंत्री पाटिल का तर्क क्या था

कैबिनेट मीटिंग के बाद एचके पाटिल ने पत्रकारों से कहा कि जनता की लगातार मांग रही है और ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को विश्वास हो कि वोटिंग प्रक्रिया पारदर्शी है इसलिए बैलट पेपर पर वापसी का सुझाव दिया गया। ये बदलाव ग्रामीण स्थानीय निकायों जैसे ज़िला पंचायत तालुका पंचायत और शहरी निकायों विशेषकर बेंगलुरु की पांच निगमों पर लागू होगा। पाटिल ने इसे प्रक्रियागत बदलाव बताया न कि बड़े चुनावी सुधार। विपक्षी भाजपा ने इसे कांग्रेस की हार का डर बताया लेकिन सरकार इसे जनता के भरोसे की जीत कह रही। ये फैसला राज्य स्तर का है इसलिए विधानसभा चुनावों पर असर नहीं पड़ेगा।

कैबिनेट के अन्य फैसले: ग्राम स्वराज बिल और चुनावी रोल रिवीजन

कैबिनेट ने कर्नाटक ग्राम स्वराज एंड पंचायत राज अमेंडमेंट बिल 2026 को भी मंजूरी दी। ये बिल ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों में बैलट पेपर सुनिश्चित करेगा। शहरी निकायों के लिए भी यही प्रस्ताव है खासकर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के तहत। इसके अलावा चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनावी रोल के प्रस्ताव पर चर्चा अधूरी रही। राज्य सरकार को और जानकारी मांगी गई। ये रिवीजन वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम है। कैबिनेट के ये फैसले लोकल गवर्नेंस को पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम हैं। सिद्धरमैया सरकार इसे अपनी गुड गवर्नेंस इमेज का हिस्सा बता रही।

पंचायत चुनावों का बैकग्राउंड: कर्नाटक में कब होंगे

कर्नाटक में पंचायत चुनाव पिछले साल टाले गए थे। कोविड के बाद वोटर लिस्ट रिवीजन और आरक्षण विवादों से देरी हुई। अब बैलट पेपर फैसले के बाद चुनाव प्रक्रिया तेज़ हो सकती है। ग्रामीण कर्नाटक में 5,000 से ज़्यादा ग्राम पंचायतें हैं और ये चुनाव स्थानीय मुद्दों जैसे पानी सड़क विकास पर केंद्रित होते हैं। शहरी स्तर पर बेंगलुरु महानगरपालिका और अन्य निगम चुनाव भी इसी बदलाव के दायरे में आएंगे। कांग्रेस को उम्मीद है कि पारदर्शिता का नैरेटिव ग्रामीण वोटरों को आकर्षित करेगा। भाजपा जेडीएस गठबंधन इसे पुरानी प्रथा बताकर हमला कर रहे। चुनाव आयोग को अब विधानसभा से मंजूरी लेनी होगी।

बैलट पेपर vs ईवीएम: फायदे और नुकसान क्या हैं

बैलट पेपर की वापसी से पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि वोटर खुद मतपेटी देख सकेंगे। ईवीएम में मैनिपुलेशन के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन बैलट में गिनती लंबी होती है और बूथ कैप्चरिंग का रिस्क ज़्यादा। कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में लाखों वोटरों की गिनती में देरी हो सकती। ईवीएम तेज़ और सटीक होती है लेकिन ब्लैक बॉक्स का डर रहता। राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा विधानसभा चुनाव ईवीएम से ही होते हैं लेकिन कई राज्य लोकल पोल्स में बैलट यूज़ करते रहे। केरल पश्चिम बंगाल में भी बैलट से पंचायत चुनाव होते हैं। कर्नाटक का ये कदम दक्षिण भारत में ट्रेंड सेट कर सकता। सरकार का दावा है कि इससे वोटर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

राजनीतिक मतलब: कांग्रेस की स्ट्रेटेजी क्या है

कांग्रेस सरकार पर लोकल चुनावों में हार का दबाव है। 2023 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पंचायत स्तर पर कमज़ोर रही। बैलट फैसला ईवीएम टेम्परिंग के आरोपों को न्यूट्रलाइज़ कर सकता। सिद्धरमैया को ग्रामीण आधार मज़बूत करने का मौक़ा मिलेगा। भाजपा ने इसे हताशा बताया कहा कांग्रेस बैलट में भी हारेगी। जेडीएस भी समर्थन में लेकिन शर्तें लगा रही। ये फैसला 2026 लोकसभा चुनाव से पहले ग्रामीण मूड टेस्ट करेगा। अगर पारदर्शिता नैरेटिव काम किया तो कांग्रेस को फायदा। विपक्ष इसे पुराने ज़माने की वापसी कह रहा।

विपक्ष का रिएक्शन: भाजपा जेडीएस ने क्या कहा

भाजपा ने तुरंत हमला बोला। पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई ने कहा ये ईवीएम पर कांग्रेस का डर है। हम बैलट में भी जीतेंगे। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने स्वागत किया लेकिन कहा पारदर्शिता सभी स्तर पर हो। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस वोट ट्रांसफर रोकने की चाल चला रही। सिद्धरमैया ने कहा ये जनता की मांग पूरी कर रहे। राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं ये रिस्की लेकिन स्मार्ट मूव।

चुनाव प्रक्रिया पर असर: कब होंगे चुनाव कैसे तैयार हों

अब विधानसभा को बिल पास करना होगा। उसके बाद चुनाव आयोग नोटिफिकेशन जारी करेगा। वोटर लिस्ट SIR से अपडेट होगी। बैलट से प्रशिक्षण बढ़ेगा। देरी का रिस्क लेकिन ट्रांसपेरेंसी का फायदा। ग्रामीण कर्नाटक में महिलाओं एससी ST आरक्षण प्रभावित होगा। ये बदलाव कर्नाटक को मॉडल बना सकता।

5 FAQs

प्रश्न 1: कर्नाटक कैबिनेट ने बैलट पेपर कब मंजूर किया?
उत्तर: 6 फरवरी 2026 को सिद्धरमैया कैबिनेट ने पंचायत नगर निगम चुनावों के लिए बैलट पेपर मंजूर किए। ईवीएम खत्म। HK पाटिल ने जनता के भरोसे की कमी बताई।

प्रश्न 2: ये फैसला किन चुनावों पर लागू होगा?
उत्तर: ग्रामीण पंचायत ज़िला तालुका पंचायत और शहरी निकाय विशेषकर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी। ग्राम स्वराज अमेंडमेंट बिल से लागू।

प्रश्न 3: EVM की जगह बैलट क्यों?
उत्तर: मंत्री पाटिल ने कहा ईवीएम पर भरोसा कम। पारदर्शिता के लिए बैलट। जनता की मांग। प्रक्रियागत बदलाव।

प्रश्न 4: विपक्ष ने क्या रिएक्शन दिया?
उत्तर: भाजपा ने कांग्रेस का डर बताया। जेडीएस ने समर्थन किया। कहा पारदर्शिता अच्छी लेकिन सभी स्तर पर।

प्रश्न 5: चुनाव कब होंगे?
उत्तर: विधानसभा मंजूरी के बाद चुनाव आयोग नोटिफाई करेगा। SIR वोटर लिस्ट अपडेट पहले। देरी संभव लेकिन ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी।

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