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लद्दाख की मांगें ठुकराईं: केंद्र ने छठी अनुसूची–राज्य का दर्जा रिजेक्ट किया, काउंसिल मॉडल ऑफर

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Centre rejects Sixth Schedule Ladakh
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केंद्र ने लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची देने से इनकार किया। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की मांगों पर दिल्ली में बैठक में केंद्र ने ‘टेरिटोरियल काउंसिल’ मॉडल ऑफर किया – LAHDC चीफ को CM, डेप्युटी को DCM।

लद्दाख के LAB–KDA को केंद्र का प्रस्ताव: LAHDC चीफ को CM, डेप्युटी को DCM बनाएं

लद्दाख को केंद्र का ठहराव: राज्य–छठी अनुसूची नामुमकिन, काउंसिल मॉडल का प्रस्ताव

13 फरवरी 2026 को सामने आया कि केंद्र सरकार ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को ठुकरा दिया। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के नेताओं के साथ दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र ने साफ कर दिया कि ये दोनों मांगें पूरी नहीं होंगी। इसके बजाय, केंद्र ने ‘टेरिटोरियल काउंसिल’ मॉडल का प्रस्ताव रखा।

यह प्रस्ताव लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसके तहत LAHDC का चीफ एक्जीक्यूटिव काउंसिलर को ‘चीफ मिनिस्टर’ (CM) और डेप्युटी चीफ एक्जीक्यूटिव काउंसिलर को ‘डेप्युटी CM’ का दर्जा दिया जाएगा।

लद्दाख की मांगें और केंद्र की बैठक

LAB और KDA ने पिछले हफ्ते दिल्ली में गृह मंत्रालय के साथ बैठक की। उन्होंने 22 अक्टूबर 2025 के ड्राफ्ट प्रस्ताव पर चर्चा की, जिसमें राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग थी। केंद्र ने इन दोनों को रिजेक्ट किया। नेताओं ने कहा कि केंद्र ने काउंसिल मॉडल ऑफर किया, लेकिन राज्य या छठी अनुसूची पर अड़े रहे।

LAB–KDA ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य हिरासत में लिए गए लोगों की बिना शर्त रिहाई की भी मांग की। वांगचुक NSA के तहत राजस्थान के जोधपुर जेल में हैं। 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा में 4 मौतें हुईं।

छठी अनुसूची क्या है और क्यों मांग?

छठी अनुसूची संविधान का वह हिस्सा है जो आदिवासी इलाकों को स्वायत्त शासन देता है। यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में लागू है। काउंसिल्स को विधायी, न्यायिक और कार्यकारी अधिकार मिलते हैं।

लद्दाख की 97% आबादी आदिवासी (भोटिया, बाल्टी, ब्रोखपा आदि) है। वे स्थानीय कानून बनाने, पर्यावरण–संस्कृति–जमीन की रक्षा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट चाहते हैं।

छठी अनुसूची के लाभलद्दाख के लिए मांग
स्वायत्त काउंसिल्सस्थानीय कानून बनाने का अधिकार
आदिवासी हित संरक्षणजमीन–जॉब्स–संस्कृति की सुरक्षा
विधायी–कार्यकारी पावरपर्यावरण संरक्षण

2019 के बाद लद्दाख का संघर्ष

2019 में आर्टिकल 370 हटने से पहले लद्दाख जम्मू–कश्मीर राज्य का हिस्सा था। 370 और 35A के तहत जमीन–नौकरियां–संस्कृति की सुरक्षा थी। अब UT बिना विधानसभा के।

लद्दाख UT बना, लेकिन विधायी पावर खत्म। LAB–KDA ने छठी अनुसूची या आर्टिकल 244A की मांग की। केंद्र ने UT मॉडल दिया, लेकिन स्थानीय असंतोष बढ़ा।

केंद्र का काउंसिल प्रस्ताव

– LAHDC लेह और कारगिल के चीफ एक्जीक्यूटिव को CM–DCM दर्जा।
– मौजूदा काउंसिल पावर बढ़ाना।
– लेकिन राज्य या छठी अनुसूची नहीं। केंद्र UT को सीधे कंट्रोल रखेगा।

सोनम वांगचुक का केस

वांगचुक लेह आंदोलन के नेता। 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा में 4 मौतें। वे NSA के तहत हिरासत में। LAB–KDA ने रिहाई मांगी।

लद्दाख की राजनीति: आगे क्या?

– LAB–KDA प्रस्ताव पर विचार।
– अगर अस्वीकार, आंदोलन तेज।
– 2026–27 में चुनावी असर।
केंद्र का मॉडल मौजूदा LAHDC को मजबूत करेगा, लेकिन पूर्ण स्वायत्तता नहीं।

5 FAQs

  1. केंद्र ने लद्दाख को क्या ऑफर किया?
    राज्य या छठी अनुसूची नहीं, बल्कि टेरिटोरियल काउंसिल मॉडल – LAHDC चीफ को CM, डेप्युटी को DCM।
  2. छठी अनुसूची क्यों मांग रहे लद्दाखवासी?
    आदिवासी हित, स्वायत्त कानून, जमीन–संस्कृति–पर्यावरण सुरक्षा के लिए। 97% आबादी आदिवासी।
  3. आर्टिकल 370 हटने से लद्दाख पर क्या असर?
    पूर्व में J&K राज्य का हिस्सा, अब UT बिना विधानसभा। सुरक्षा खत्म।
  4. सोनम वांगचुक कौन हैं?
    जलवायु कार्यकर्ता, लेह आंदोलन नेता। NSA के तहत जोधपुर जेल में।
  5. LAB और KDA क्या हैं?
    Leh Apex Body (लेह) और Kargil Democratic Alliance (कारगिल) – लद्दाख की मुख्य राजनीतिक संगठन।

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