मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 4 फरवरी 2026 को हटा। NDA विधायक दल नेता Y खेमचंद सिंह शाम 6 बजे CM पद की शपथ लेंगे। फरवरी 2025 से चला आ रहा शासन खत्म। हिंसा, विस्थापन, NDA की रणनीति, नई सरकार के चैलेंजेस, मणिपुर का भविष्य विस्तार से।
मणिपुर में NDA सरकार फिर सत्ता में – राष्ट्रपति शासन खत्म, लेकिन चुनौतियाँ बरकरार क्यों?
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म: Y खेमचंद सिंह नए CM बने
मणिपुर की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। गृह मंत्रालय ने 4 फरवरी 2026 को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। यह शासन पिछले साल 13 फरवरी 2025 को लगाया गया था जब राज्य में भारी अस्थिरता थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत जारी प्रोज़ेकलामेशन को रद्द कर दिया। कुछ ही घंटों बाद शाम 6 बजे लोक भवन में NDA विधायक दल नेता वाई खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ। भाजपा मणिपुर ने इसे शांति विकास और अच्छे शासन की नई शुरुआत बताया। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को NDA प्रतिनिधिमंडल ने सरकार बनाने का दावा सौंपा था जिसमें चुराचांदपुर और फेरज़ावल के दो विधायक भी शामिल थे।
राष्ट्रपति शासन लगने की पूरी पृष्ठभूमि
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगने के पीछे राज्य की गहरी जातीय हिंसा थी। मई 2023 में मीती और कुकी–ज़ो समुदायों के बीच शुरू हुई झड़पें तेज़ हो गईं। भूमि अधिकार आरक्षण और जनगणना जैसे मुद्दों ने आग में घी का काम किया। हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हजारों विस्थापित हुए। इम्फाल वैली और हिल जिलों के बीच तनाव चरम पर था। केंद्र ने आर्मी CRPF भेजी लेकिन स्थानीय स्तर पर शांति नहीं बनी। विधानसभा सत्र बुलाए गए लेकिन बहुमत साबित नहीं हुआ। आख़िरकार 13 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया और राष्ट्रपति शासन लगा। केंद्र ने शांति बहाली के लिए कई कदम उठाए लेकिन पूर्ण स्थिरता नहीं आई। कुकी ज़ो इलाकों में अलगाव की मांग तेज़ हुई। यह लगभग एक साल चला शासन अब खत्म हो गया।
NDA का दावा और Y खेमचंद सिंह की पृष्ठभूमि
NDA ने दिल्ली में मंगलवार को खेमचंद सिंह को विधायक दल नेता चुना। बुधवार को वे राज्यपाल से मिले और बहुमत का दावा किया। भाजपा के पास 32 विधायक हैं NPP के 5 NPF के 4 और दो निर्दलीय समर्थन। कुल मिलाकर NDA के पास स्पष्ट बहुमत। 62 वर्षीय सिंह अनुभवी नेता हैं। वे पहले मंत्री रह चुके हैं और मणिपुर की राजनीति को अच्छे से समझते हैं। भाजपा ने कहा कि उनके नेतृत्व में मणिपुर शांति विकास और सद्भाव की राह पर चलेगा। शपथ ग्रहण लोक भवन में शाम 6 बजे हुआ जहाँ कड़ी सुरक्षा थी। सिंह ने कहा कि हिंसा रोकना उनका पहला लक्ष्य होगा। कुकी मीती संवाद को बढ़ावा देंगे। केंद्र का पूरा समर्थन मिलेगा। यह NDA की रणनीति का हिस्सा था कि स्थानीय चेहरा आगे रखा जाए।
नई सरकार के सामने चुनौतियाँ क्या हैं
नई सरकार बन गई लेकिन मणिपुर की समस्याएँ जस की तस हैं। सबसे बड़ी चुनौती जातीय हिंसा रोकना। मीती बहुल इम्फाल वैली और कुकी ज़ो हिल जिलों के बीच अविश्वास गहरा है। हजारों लोग अभी भी रिलीफ कैंपों में हैं। आर्थिक नुकसान अरबों में। विकास रुका हुआ। सुरक्षा बल तैनात हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर शांति प्रक्रिया शुरू करनी होगी। दूसरी समस्या विस्थापितों का पुनर्वास। स्कूल अस्पताल बंद पड़े। शिक्षा स्वास्थ्य प्रभावित। तीसरा राजनीतिक स्थिरता। कुकी विधायकों का समर्थन शर्तों पर हो सकता है। चौथा केंद्र राज्य समन्वय। गृह मंत्रालय ने शासन हटाया लेकिन निगरानी रखेगा। पांचवां आर्थिक पुनरुद्धार। पर्यटन कृषि उद्योग पटरी पर लाना। सिंह सरकार को इन सब पर तेज़ी से काम करना होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और केंद्र की भूमिका
भाजपा ने इसे नई शुरुआत बताया। मणिपुर इकाई ने कहा सिंह के विज़न से राज्य प्रगति करेगा। विपक्ष ने सवाल उठाए कि हिंसा क्यों नहीं रुकी। कांग्रेस ने कहा केंद्र ने देर की। कांग्रेसी नेता ने कहा शांति बहाली पहले होनी चाहिए। NPP NPF ने समर्थन दिया। कुकी संगठनों ने सतर्कता बरती। राज्यपाल भल्ला ने दावा स्वीकार करते हुए कहा संवैधानिक प्रक्रिया पूरी। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति शासन हटाने का नोटिफिकेशन जारी किया। केंद्र ने पीएम योजना के तहत फंडिंग बढ़ाने का ऐलान किया। मोदी ने ट्वीट कर शुभकामनाएँ दीं। यह कदम नॉर्थ ईस्ट में स्थिरता लाने की दिशा में था। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी।
मणिपुर हिंसा का इतिहास और आंकड़े
मई 2023 से हिंसा में 250 से ज़्यादा मौतें 60 हज़ार विस्थापित। इम्फाल चुराचांदपुर जैसे इलाके सबसे प्रभावित। मीती ST आरक्षण के खिलाफ कुकी ज़ो प्रदर्शन से शुरू। हथियारबंद झड़पें हुईं। केंद्र ने AFSPA बढ़ाया। आर्मी ने ऑपरेशन चलाए। लेकिन जड़ें गहरी। नई सरकार को संवाद समितियाँ बनानी होंगी। पीस कमिटी का गठन। युवाओं को रोज़गार। विकास पर फोकस। पिछले राष्ट्रपति शासन में केंद्र ने शांति वार्ता की कोशिश की लेकिन सफलता सीमित। अब स्थानीय नेतृत्व से उम्मीदें।
नई सरकार की उम्मीदें और भविष्य
खेमचंद सिंह के नेतृत्व में मणिपुर को शांति चाहिए। केंद्र राज्य मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी की नॉर्थ ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा। इंफ्रास्ट्रक्चर पर्यटन रोड कनेक्टिविटी बढ़ेगी। लेकिन जातीय सद्भाव पहली प्राथमिकता। विपक्ष निगरानी रखेगा। जनता उम्मीद में है कि हिंसा खत्म हो विकास हो। राष्ट्रपति शासन खत्म होना सकारात्मक कदम। लेकिन स्थिरता बनाए रखना चुनौती। मणिपुर भारत का गेटवे है। यहाँ शांति पूरे नॉर्थ ईस्ट के लिए मिसाल बनेगी।
5 FAQs
प्रश्न 1: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन कब और क्यों लगाया गया था?
उत्तर: राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी 2025 को लगाया गया। जातीय हिंसा के कारण विधानसभा में बहुमत साबित न होने पर तत्कालीन CM बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया। मीती कुकी तनाव चरम पर था।
प्रश्न 2: राष्ट्रपति शासन कब और कैसे हटाया गया?
उत्तर: 4 फरवरी 2026 को गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन से तुरंत हटाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 356 के तहत प्रोज़ेकलामेशन रद्द किया। NDA ने सरकार बनाने का दावा किया।
प्रश्न 3: नए मुख्यमंत्री कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या?
उत्तर: वाई खेमचंद सिंह। भाजपा विधायक दल नेता। 62 वर्षीय अनुभवी नेता। पहले मंत्री रह चुके। शाम 6 बजे लोक भवन में शपथ ली। NDA में भाजपा NPP NPF समर्थन।
प्रश्न 4: नई सरकार के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर: जातीय हिंसा रोकना। विस्थापितों का पुनर्वास। आर्थिक नुकसान भरना। मीती कुकी संवाद। सुरक्षा विकास पर फोकस। केंद्र राज्य समन्वय।
प्रश्न 5: इसका मणिपुर पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: उम्मीद शांति स्थिरता। विकास तेज़ होगा। लेकिन परीक्षा कठिन। जनता उम्मीद में। विपक्ष निगरानी करेगा।
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