विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया। बिरला ने सचिवालय को जांच कर प्रक्रिया तेज करने को कहा। राहुल गांधी ने साइन नहीं किया।
विपक्ष का धमाका: स्पीकर को हटाने का नोटिस, बिरला ने ‘तुरंत जांच’ का आदेश दिया
विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया
10 फरवरी 2026 को विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जमा कर दिया। कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई, चीफ व्हिप के. सुरेश और व्हिप मोहम्मद जावेद ने लोकसभा सचिवालय को नोटिस सौंपा। इसमें समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई विपक्षी दल शामिल हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया कि स्पीकर ने सदन का संचालन पक्षपातपूर्ण तरीके से किया है। बिरला ने एक घंटे के अंदर सचिवालय को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच करें और प्रक्रिया तेज करें। यह बयान हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट किया।
स्पीकर पर पक्षपात का आरोप: विपक्ष ने क्या–क्या कहा?
विपक्ष ने कहा कि स्पीकर ने संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर कांग्रेस सांसदों पर झूठे आरोप लगाए। कई मौकों पर LoP राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। 2 फरवरी को राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में राहुल का भाषण बीच में काट दिया गया। विपक्ष ने कहा LoP को हमेशा बोलने से रोका जाता है। 3 फरवरी को 8 विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया। केवल लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल करने पर सजा दी गई।
BJP सांसद को छूट: विपक्ष ने उठाया सवाल
विपक्ष ने आरोप लगाया कि 4 फरवरी को BJP सांसद निशिकांत दुबे को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर व्यक्तिगत हमले करने की छूट मिली। सदन की मर्यादा तोड़ने पर स्पीकर ने कोई फटकार नहीं लगाई। विपक्ष ने कहा हमारी गुजारिश के बावजूद दुबे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुबे को आदतन ऐसा करने वाला बताया। स्पीकर को सदन की मर्यादा का रक्षक होना चाहिए लेकिन उन्होंने सदन में ही कांग्रेस पर झूठे आरोप लगाए। यह संवैधानिक पद का दुरुपयोग है।
राहुल गांधी ने क्यों साइन नहीं किया नोटिस?
LoP राहुल गांधी ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किया। कारण बताया गया कि संसदीय लोकतंत्र में LoP का स्पीकर हटाने वाले प्रस्ताव पर साइन करना उचित नहीं। राहुल ने पहले ही कई बार कहा है कि स्पीकर ने उनका भाषण रोका। लेकिन वे नोटिस से अलग रहे। विपक्ष के अन्य नेता आगे आए। सचिवालय अब नोटिस की वैलिडिटी चेक करेगा। अगर मान्य हुआ तो सदन में चर्चा हो सकती है।
स्पीकर का जवाब: जांच करें, प्रक्रिया तेज करें
ओम बिरला ने नोटिस मिलते ही लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया। उन्होंने कहा नोटिस की जांच करें और प्रक्रिया को तेजी दें। बिरला ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि वे PM मोदी के आसन की ओर बढ़ सकते हैं। विपक्ष ने इसे झूठा बताया। अब सचिवालय प्रक्रिया शुरू करेगा। अविश्वास प्रस्ताव के लिए 50 सांसदों का समर्थन जरूरी। विपक्ष के पास INDIA गठबंधन में संख्या है।
बजट सत्र में बढ़ा तनाव: विपक्ष का हमला तेज
यह नोटिस बजट सत्र के दौरान आया जब सदन में हंगामा हो रहा था। विपक्ष संसदीय मर्यादा पर सवाल उठा रहा। स्पीकर ने कई बार सदन स्थगित किया। अब अविश्वास प्रस्ताव सदन में बड़ा मुद्दा बनेगा। BJP ने कहा विपक्ष सदन चलने नहीं देना चाहता। कांग्रेस ने कहा स्पीकर निष्पक्ष नहीं। राजनीतिक घमासान तेज हो गया।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या है?
लोकसभा नियम 267 के तहत स्पीकर हटाने का प्रस्ताव 14 दिन का नोटिस चाहिए। 50 सांसदों का समर्थन जरूरी। अगर स्पीकर प्रस्ताव स्वीकार करते हैं तो सदन में वोटिंग। बहुमत से हारने पर हट जाएंगे। विपक्ष को संख्या जुटानी होगी। सचिवालय पहले वैलिडिटी चेक करेगा। अगर अस्वीकार तो विपक्ष सुप्रीम कोर्ट जा सकता।
विपक्ष की एकजुटता: कौन–कौन शामिल?
नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके के सांसदों ने हस्ताक्षर किए। गौरव गोगोई, के. सुरेश, मोहम्मद जावेद मुख्य। INDIA गठबंधन में और दल जुट सकते हैं। राहुल गांधी ने समर्थन तो दिया लेकिन साइन नहीं। BJP के पास बहुमत है लेकिन सदन में बहस से बचना चाहेगी। राजनीतिक संकट गहरा सकता है।
स्पीकर पद की अहमियत: निष्पक्षता क्यों जरूरी
लोकसभा स्पीकर सदन का संचालन करता है। नियमों का पालन करवाता है। LoP को बोलने का हक देता। अगर पक्षपात तो लोकतंत्र कमजोर। विपक्ष ने कहा बिरला ने BJP को फायदा दिया। BJP ने कहा विपक्ष अराजकता फैला रहा। अविश्वास प्रस्ताव सदन की कार्यवाही प्रभावित करेगा।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: विपक्ष ने स्पीकर के खिलाफ क्या नोटिस दिया?
उत्तर: अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, जिसमें आरोप लगाया कि ओम बिरला पक्षपाती हैं, सदन संचालन में भेदभाव किया। - प्रश्न: बिरला ने नोटिस पर क्या जवाब दिया?
उत्तर: सचिवालय को नोटिस की जांच कर प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। - प्रश्न: राहुल गांधी ने नोटिस क्यों साइन नहीं किया?
उत्तर: संसदीय परंपरा के अनुसार LoP का स्पीकर हटाने वाले नोटिस पर साइन करना उचित नहीं। - प्रश्न: विपक्ष के मुख्य आरोप क्या हैं?
उत्तर: राहुल को बोलने न देना, 8 MPs सस्पेंड, BJP MP को छूट, झूठे आरोप लगाना। - प्रश्न: अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या?
उत्तर: 50 सांसद समर्थन, 14 दिन नोटिस, सदन में वोटिंग पर बहुमत से हार तो स्पीकर हटेंगे।
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