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“ये प्रशासन नहीं, राजनीति है” – 50 से ज़्यादा अफसर हटे तो ममता बनर्जी ने क्यों कहा ‘सबसे ऊँचे स्तर की दखलअंदाजी’?

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पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP समेत 50 से ज़्यादा वरिष्ठ IAS–IPS अफसरों के ट्रांसफर को “राजनीतिक हस्तक्षेप का सबसे ऊँचा स्तर” और “संविधान पर सीधा हमला” बताया, कहा – बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है

बंगाल में चुनाव से पहले IAS–IPS का बड़ा तबादला, ममता बोलीं: EC ने संविधान की सीमाएँ लांघ दीं

चुनाव से पहले बंगाल में बड़ा अफसरशाही फेरबदल, ममता भड़कीं

विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और पुलिस तंत्र में बड़ा फेरबदल कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों – जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), कई अतिरिक्त महासंचालक (ADG), आईजी, डीआईजी, ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हैं – को उनके पदों से हटाकर नई जगहों पर भेज दिया गया है। इसके अलावा, कुछ अफसरों को अन्य चुनावी राज्यों में ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है और 13 IAS व 5 IPS अफसरों को चुनाव प्रबंधन की अहम भूमिकाओं में लगाया गया है।

ममता का हमला: “यह प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, राजनीतिक हस्तक्षेप है”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे “political interference of the highest order” बताया। उन्होंने X (पूर्व Twitter) पर लिखा कि “election notification से पहले ही 50 से ज़्यादा वरिष्ठ अधिकारियों को बिना किसी वजह बताए एक साथ हटा देना अभूतपूर्व है और बेहद चिंताजनक भी।” उनके शब्दों में, “This is not administrative action; this is political interference of the highest order.” तृणमूल सुप्रीमो का आरोप है कि चुनाव आयोग “तटस्थ संस्था” की जगह “राजनीतिक हितों की पूर्ति” का औज़ार बनता दिख रहा है।

“संविधान पर सीधा हमला” और “अनडिक्लेयर्ड इमरजेंसी”

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर “systematic politicisation of institutions” का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे “nothing short of an undeclared emergency” करार दिया और दावा किया कि यह सब “coercion और institutional manipulation के ज़रिए बंगाल पर कब्ज़ा करने की सोची–समझी साज़िश” का हिस्सा है। उनके मुताबिक, संवैधानिक रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष रहने वाली संस्थाओं को इस तरह राजनीतिक रूप से झुकाना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक मिसाल है।

IB, STF, CID जैसे अहम विभागों के अफसर भी हटाए गए: ममता का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सिर्फ़ प्रशासनिक अफसर ही नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और CID जैसी अहम एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को भी “selectively removed” किया गया है। उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों के टॉप अफसरों को राज्य से बाहर भेजना बंगाल की प्रशासनिक मशीनरी को “कमज़ोर और पंगु” बनाने की सोची–समझी कोशिश लगती है। ममता के शब्दों में, “This is not governance, it reflects chaos, confusion, and sheer incompetence being passed off as authority.”

इलेक्टोरल रोल और SIR प्रक्रिया पर भी सवाल

ममता बनर्जी ने अपनी पोस्ट में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) और मतदाता सूचियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब तक सप्लीमेंटरी इलेक्टोरल रोल की अंतिम सूचियाँ प्रकाशित नहीं हो जातीं, तब तक इस तरह का भारी प्रशासनिक फेरबदल मतदाताओं के अधिकार और भरोसे दोनों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि “SIR प्रक्रिया खुद ही ख़राब और पक्षपाती रही है, जिसमें 200 से ज़्यादा लोगों की जान भी ख़तरे में पड़ी या गई है,” और अब ऊपर से अफसरों का अचानक तबादला इस “बायस” को और बढ़ाता है।

चुनाव आयोग की दलील: फ्री–फेयर चुनाव के लिए ज़रूरी तटस्थता

उधर, चुनाव आयोग और उससे जुड़े सूत्रों ने मीडिया को बताया कि यह पूरी कवायद राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए की गई है। आयोग का कहना है कि चुनावी राज्यों में टॉप लेवल पर लंबे समय से बैठे अफसरों को हटाकर या बदलकर “neutral administrative set-up” बनाना उसकी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि चुनावी machinery सरकार की जगह आयोग के प्रति जवाबदेह रहे। सूचनाओं के अनुसार, नई पोस्टिंग्स के लिए डेडलाइन भी कड़ी रखी गई – कई अफसरों को 18 मार्च सुबह 11 बजे तक नई जगह जॉइन करने को कहा गया, साथ में राज्य सरकार से अनुपालन रिपोर्ट माँगी गई।

TMC कोर्ट पहुँची: कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती

रिपोर्ट्स के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने इन तबादलों को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी की ओर से दायर याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार को प्रतिवादी बनाया गया है और दलील दी गई है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर “मनमाने और असंवैधानिक” हैं। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग “प्रशासनिक तटस्थता के नाम पर असल में चुनी हुई राज्य सरकार की अधिकार–क्षेत्र में अनावश्यक और राजनीतिक दखल दे रहा है।”

पिछले अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि

ममता बनर्जी पहले भी केंद्र और चुनाव आयोग पर अफसरों की अदला-बदली को लेकर सवाल उठाती रही हैं, खासकर 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी इस तरह के टकराव देखे गए थे। इस बार अंतर यह है कि reshuffle की रेंज कहीं ज़्यादा बड़ी है और अफसरों की संख्या भी अधिक है। मौजूदा चुनाव में आदिवासी बहुल सीटों, सीमावर्ती ज़िलों और हिंसा–प्रभावित इलाकों को लेकर पहले से संवेदनशीलता बनी हुई है, जिस पर अलग से सियासी टकराव चल रहा है। ऐसे में अफसरशाही में बड़े पैमाने की हेरफेर ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

आगे क्या? संभावित कानूनी और राजनीतिक मोड़

अब नज़र इस बात पर होगी कि कलकत्ता हाईकोर्ट TMC की याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या कोर्ट चुनाव आयोग के ट्रांसफर ऑर्डर्स पर कोई रोक लगाता है या नहीं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि नई तैनाती वाले अफसर जमीन पर चुनाव तैयारियों को किस तरह संभालते हैं और क्या हिंसा या गड़बड़ी के आरोप कम होते हैं या नहीं। राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा TMC के लिए “Delhi बनाम Bengal” नैरेटिव को मजबूत करने का जरिया बन सकता है, जबकि बीजेपी और विपक्ष इसे फ्री–फेयर चुनाव के लिए ज़रूरी कदम के रूप में प्रोजेक्ट करेंगे।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: ममता बनर्जी किस फैसले को “highest order of political interference” कह रही हैं?
    उत्तर: वह चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में 50 से ज़्यादा वरिष्ठ IAS–IPS अधिकारियों, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP, ADG, IG, DIG, DM और SP शामिल हैं, के अचानक तबादले और हटाए जाने को ऐसा बता रही हैं।
  2. प्रश्न: ममता का मुख्य आरोप क्या है?
    उत्तर: उनका आरोप है कि चुनाव आयोग बंगाल को “single out” कर रहा है, तटस्थ संस्थानों को राजनीतिक रूप से झुका रहा है और यह सब संविधान पर “सीधा हमला” तथा “अनडिक्लेयर्ड इमरजेंसी” जैसा माहौल बनाता है।
  3. प्रश्न: चुनाव आयोग इस reshuffle को कैसे जस्टिफाई कर रहा है?
    उत्तर: आयोग कहता है कि यह फ्री और फेयर चुनाव के लिए तटस्थ प्रशासनिक सेटअप बनाने की नियमित प्रक्रिया है, जिसमें लंबे समय से संवेदनशील पदों पर बैठे अफसरों को बदला जाता है और नई पोस्टिंग्स दी जाती हैं।
  4. प्रश्न: क्या इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई भी हुई है?
    उत्तर: हाँ, TMC ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इन तबादलों को चुनौती दी है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को प्रतिवादी बनाकर इन्हें मनमाना और असंवैधानिक बताया गया है।
  5. प्रश्न: IB, STF, CID के अफसरों को लेकर ममता ने क्या कहा?
    उत्तर: ममता का कहना है कि इन अहम एजेंसियों के वरिष्ठ अफसरों को भी “selectively removed” कर राज्य से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे बंगाल की प्रशासनिक और सुरक्षा मशीनरी को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

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